IND – रांची की हवा में गुरुवार सुबह से ही क्रिकेट का एक अलग ही स्वाद घुला हुआ था—चाय की दुकानों पर चर्चा, बस स्टैंड पर पोस्टर, और जेएससीए स्टेडियम के बाहर लगी लंबी-सी लाइन… सब कुछ एक ही इशारा कर रहा था कि 30 नवंबर वाला पहला वनडे झारखंड की राजधानी को पूरी तरह बिजली-सा झटका देने वाला है।
भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें शहर में मौजूद हैं और तैयारी की रफ्तार ऐसी कि देखने वाले भी थक जाएँ, पर खिलाड़ी नहीं।
जेएससीए स्टेडियम में अभ्यास—दोनों टीमों ने पसीना बहाकर बनाई मैच की जमीन
गुरुवार को जब भारतीय टीम ने अभ्यास शुरू किया, स्टैंड में बैठे कुछ स्थानीय बच्चे हर शॉट पर ताली मार रहे थे—ऐसा लग रहा था जैसे आधा मैच यहीं तय हो रहा हो।
रोहित, राहुल, सूर्य… पूरा बैटिंग ग्रुप नेट्स पर बारी-बारी से उतरता रहा और बॉलिंग यूनिट ने भी लगभग टेस्ट मैच वाली तीव्रता के साथ स्पेल फेंके।
दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका की टीम ने भी खुद को हल्का नहीं दिखाया।
उनका अभ्यास सत्र लगभग दो घंटे चला, जिसमें टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों ने खास तौर पर स्पिन और बैक-ऑफ-लेंथ गेंदों के खिलाफ लम्बा सेशन लिया—स्पष्ट संकेत कि वे भारतीय पिच की धीमी प्रकृति के खिलाफ रणनीति पहले से बनाकर आए हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि कुछ समय के लिए दोनों टीमों के अभ्यास टाइम ओवरलैप कर गए, और लगभग आधा स्टेडियम उस ऊर्जा से भर गया जो सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट ही पैदा कर सकता है।
भारतीय बॉलिंग कोच मॉर्न मर्केल—“ड्रेसिंग रूम में पॉजिटिव एनर्जी है”
टेस्ट सीरीज में मिली हार के बाद माहौल कैसा है—इस पर सवाल तो लगातार उठ रहे थे।
लेकिन गुरुवार की प्रेस ब्रिफिंग में भारतीय बॉलिंग कोच मॉर्न मर्केल एकदम सधी आवाज़ में बोले—
“हम टेस्ट हार पीछे छोड़ चुके हैं। अब पूरा फोकस वनडे सीरीज पर है। टीम में पॉजिटिव एनर्जी है और खिलाड़ी पूरी ताकत के साथ उतरने को तैयार हैं।”
इस बयान में एक बात साफ दिखी—टीम किसी भी तरह का baggage लेकर नहीं खेलना चाहती।
मर्केल ने माना कि दक्षिण अफ्रीका को चुनौती देना आसान नहीं, लेकिन
“किसी भी दिन हम इस टीम को हरा सकते हैं—कंडीशन, तालमेल और आत्मविश्वास सब हमारे साथ हैं।”
यह बयान रांची के प्रशंसकों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं था।
भारतीय खिलाड़ी—यंगस्टर्स और सीनियर्स का परफेक्ट मिक्स
जेएससीए आउटफील्ड पर प्रैक्टिस के दौरान एक दिलचस्प नज़ारा था—
वरिष्ठ खिलाड़ी युवाओं को टिप्स दे रहे थे, और युवा खिलाड़ी मानो इस मौके को हल्के में लेने को तैयार ही नहीं।
कुछ प्रमुख फोकस प्वाइंट:
- स्पिनर्स के खिलाफ एंटी-ड्रिफ्ट अभ्यास
- तेज गेंदबाजों की डेथ-ओवर प्लानिंग
- मध्यक्रम का स्ट्राइक रोटेशन
- विकेट के बीच दौड़ का अलग से सत्र
- कवर और पॉइंट पर कैचिंग ड्रिल्स
कोचिंग स्टाफ एकदम माइक्रो-मैनेजमेंट मोड में दिखा—कभी वीडियो एनालिस्ट नोट्स देते दिखे, तो कभी फील्डिंग कोच स्टिक लेकर खिलाड़ियों की पोजिशनिंग सुधारते नज़र आए।
दक्षिण अफ्रीका की तैयारी—अनुसासन, शांत दिमाग और ठोस योजनाएँ
रांची के विकेट पर आम तौर पर पहली पारी में बल्लेबाजी आसान रहती है।
दक्षिण अफ्रीका के समर्थन स्टाफ को यह बात भली-भांति पता है।
उनके अभ्यास सत्र में तीन चीजें सबसे ज्यादा दिखीं:
- कड़क फिटनेस रन और शटल ड्रिल्स
- पेसर्स का लम्बा स्पेल सत्र—खासकर नई गेंद पर सीम मूवमेंट टेस्ट
- स्पिनर्स द्वारा लगातार गुड-लेंथ पर बॉल डालने की प्रैक्टिस
उनके बैटिंग कोच ने कुछ समय स्लोगन बोलते हुए खिलाड़ियों को उत्तेजित किया—साफ दिख रहा था कि वे आक्रामक और नियंत्रित क्रिकेट दोनों का मिश्रण तैयार कर रहे हैं।
रांची की जनता—हर क्रिकेट मैच को त्योहार बनाने में माहिर
अगर आप बस स्टैंड से स्टेडियम तक रिक्शा लें, तो रास्ते में ही समझ आ जाता है कि रांची में क्रिकेट किसी धर्म से कम नहीं।
दुकानों पर झंडे बिक रहे हैं, चाय वालों ने टीवी सेट कर रखा है, और टिकट ब्लैक में जाने की चर्चा भी हवा में तैरती दिख रही है।
स्टेडियम के बाहर सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी कि मानो कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम हो रहा हो।
पुलिस, लोकल वॉलंटियर, मेडिकल स्टॉल—सब कुछ मैच के पैमाने से पहले ही लाइन में है।
30 नवंबर की सुबह इस शहर की धड़कनें बढ़ने वाली हैं—यह बात अब किसी को समझाने की जरूरत नहीं।
क्यों यह मैच खास है?
यह सिर्फ वनडे सीरीज का पहला मुकाबला नहीं, बल्कि कई वजहों से महत्वपूर्ण है:
- भारत टेस्ट हार का जवाब देना चाहता है
- दक्षिण अफ्रीका पिछले कुछ समय में वनडे में बेहद मज़बूत रहा है
- रांची हमेशा से भारतीय टीम का लकी ग्राउंड माना जाता है
- वर्ल्ड कप साइकिल की तैयारी 2025 से पहले शुरू हो चुकी है
- भारतीय खिलाड़ियों का फॉर्म अगले 12 महीनों की दिशा तय करेगा
यह मैच सिर्फ दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि इच्छा बनाम चुनौती का संघर्ष बनने जा रहा है।















