Pant – शनिवार को जब न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए भारतीय टीम आई, तो सबसे ज़्यादा शोर किसी एक नाम के चुने जाने पर नहीं, बल्कि कुछ नामों के छूटने पर हुआ। श्रेयस अय्यर और मोहम्मद सिराज की वापसी अपेक्षित थी।
लेकिन ऋतुराज गायकवाड़ का बाहर रहना और विकेटकीपर स्लॉट पर ऋषभ पंत को तरजीह—यहीं से बहस तेज़ हो गई।
यह चयन सिर्फ 15 खिलाड़ियों की सूची नहीं है। यह बताता है कि भारतीय चयनकर्ता अभी भी परफॉर्मेंस बनाम भरोसे की रस्साकशी में कहां खड़े हैं।
ऋतुराज गायकवाड़ बाहर, सवाल लाज़मी हैं
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज़ में शतक लगाने के बावजूद ऋतुराज गायकवाड़ का नाम टीम शीट में नहीं दिखा। यह फैसला क्रिकेटिंग लॉजिक से ज़्यादा “टीम कॉम्बिनेशन” की भाषा बोलता है।
चयनकर्ताओं का झुकाव साफ दिखता है—
टॉप ऑर्डर में रोहित, गिल, कोहली और यशस्वी मौजूद हैं। मिडिल ऑर्डर में श्रेयस की वापसी हो रही है। ऐसे में ऋतुराज को शायद “फ्लोटिंग रोल” में फिट नहीं माना गया।
लेकिन सवाल फिर भी रहेगा—
क्या शतक लगाने के बाद भी बाहर रहना सही संदेश है?
विकेटकीपर की जंग: पंत को फिर लाइफलाइन
टीम चयन से पहले सबसे दिलचस्प मुकाबला विकेटकीपर स्लॉट को लेकर था।
ऋषभ पंत बनाम ईशान किशन बनाम ध्रुव जुरेल।
काग़ज़ पर देखें तो पंत सबसे पीछे दिखते हैं।
मैदान पर देखें तो चयनकर्ताओं का भरोसा अब भी उन्हीं पर टिका है।
पंत को इस सीरीज़ में दूसरे विकेटकीपर के तौर पर रखा गया है। यानी केएल राहुल पहले विकल्प हैं, लेकिन पंत को पूरी तरह बाहर नहीं किया गया।
पंत का घरेलू प्रदर्शन: ठीक-ठाक, धमाकेदार नहीं
विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में दिल्ली की कप्तानी कर रहे ऋषभ पंत का प्रदर्शन न तो खराब है, न ही ऐसा कि चयन खुद-ब-खुद हो जाए।
उनके आंकड़े देखें—
| मैच | रन | औसत | हाई स्कोर |
|---|---|---|---|
| 5 | 188 | 62.67 | 70 / 67* |
पारियां आईं, लेकिन वो “मैच बदलने वाली” चमक नहीं दिखी, जिसकी उम्मीद पंत से रहती है। इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने अनुभव और इंटरनेशनल एक्सपोज़र को तरजीह दी।
ध्रुव जुरेल: परफॉर्मेंस का सबसे मजबूत दावा
अगर सिर्फ घरेलू फॉर्म देखा जाए, तो ध्रुव जुरेल इस रेस में सबसे आगे नज़र आते हैं।
उत्तर प्रदेश के लिए विजय हजारे ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन सीधा चयनकर्ताओं के दरवाज़े पर दस्तक है।
उनकी हालिया पारियां—
| विपक्ष | रन |
|---|---|
| हैदराबाद | 80 |
| चंडीगढ़ | 67 |
| बड़ौदा | 160* |
| जम्मू-कश्मीर | 52 |
101 गेंदों में नाबाद 160 रन—वो भी दबाव में—यह सिर्फ स्कोर नहीं, स्टेटमेंट था। फिर भी टीम में जगह नहीं मिली, क्योंकि सीनियर खिलाड़ियों की वापसी ने स्लॉट भर दिए।
ईशान किशन: टी20 का टिकट पक्का, वनडे में इंतज़ार
ईशान किशन की कहानी थोड़ी अलग है।
उन्होंने घरेलू क्रिकेट में ऐसा तूफान मचाया कि टी20 टीम में सीधा एंट्री मिल गई—और वही स्क्वॉड आगे टी20 विश्व कप भी खेलेगा।
विजय हजारे ट्रॉफी में उनका जलवा—
- कर्नाटक के खिलाफ 33 गेंदों में शतक
- 39 गेंदों में 125 रन, 14 छक्के
- शुरुआती दो मैचों में 146 रन
लेकिन वनडे टीम के लिए चयनकर्ताओं ने शायद उन्हें फॉर्मेट-स्पेसिफिक खिलाड़ी मानते हुए अभी रोक लिया है।
चयनकर्ताओं का असली संदेश क्या है?
इस पूरी तस्वीर को जोड़कर देखें, तो कुछ बातें साफ दिखती हैं—
- अनुभव अभी भी भारी पड़ता है
- घरेलू क्रिकेट “सीधा टिकट” नहीं, बल्कि लंबी लाइन है
- सीनियर खिलाड़ियों की वापसी से यंगस्टर्स को इंतज़ार करना पड़ता है
क्या यह फैसला सही है?
यह निर्भर करता है आप किस नज़र से देखते हैं।
- परफॉर्मेंस की नज़र से—जुरेल और ईशान आगे थे
- टीम मैनेजमेंट की नज़र से—पंत अभी भी ज़्यादा भरोसेमंद हैं
- भविष्य की नज़र से—तीनों लाइन में खड़े हैं
न्यूजीलैंड सीरीज़ शायद इन सवालों का तुरंत जवाब न दे, लेकिन अगली कुछ सीरीज़ में तस्वीर और साफ़ हो जाएगी।
लाइन लंबी है, लेकिन धैर्य की परीक्षा
ऋषभ पंत को मिला मौका बताता है कि भारतीय टीम अभी भी अनुभव को पूरी तरह छोड़ने के मूड में नहीं है।
ध्रुव जुरेल और ईशान किशन का इंतज़ार बताता है कि घरेलू क्रिकेट का इनाम तुरंत नहीं मिलता।
और ऋतुराज गायकवाड़ का बाहर रहना याद दिलाता है कि चयन हमेशा सिर्फ रन से तय नहीं होता।
टीम चुनी जा चुकी है।
बहस जारी है।
और यही भारतीय क्रिकेट की असली पहचान भी है।















