Test : बुमराह–पंत ने माफी मांगी – बावुमा ने खोले भारत दौरे के अंदरूनी किस्से

Atul Kumar
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Test – कोलकाता के उस टेस्ट मैच का शोर अब स्टेडियम में नहीं गूंजता, लेकिन उसकी गूंज क्रिकेट की बातचीत में अब भी बाकी है। भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका सीरीज़, नतीजों से ज़्यादा अब शब्दों और संवेदनाओं की वजह से याद की जा रही है। और इस पूरी कहानी के केंद्र में हैं—तेम्बा बावुमा।

दक्षिण अफ्रीका के कप्तान ने अब खुलकर बताया है कि भारत के दौरे के दौरान जो बातें मैदान पर कही गईं, उन पर क्या हुआ, क्या महसूस किया गया और कैसे मामला वहीं खत्म भी किया गया।

“बुमराह और पंत ने माफी मांग ली थी”

तेम्बा बावुमा ने ESPNcricinfo पर अपने कॉलम में उस घटना का ज़िक्र किया, जिसने पहले टेस्ट के दौरान हलचल मचा दी थी। कोलकाता में खेले गए मुकाबले में जसप्रीत बुमराह और ऋषभ पंत ने कथित तौर पर बावुमा के कद को लेकर टिप्पणी की थी, जिसमें “बौना” जैसे शब्द का इस्तेमाल हुआ।

बावुमा ने साफ कहा कि:

“दिन के आखिर में दो सीनियर खिलाड़ी—ऋषभ पंत और जसप्रीत बुमराह—मेरे पास आए और उन्होंने माफी मांग ली।”

दिलचस्प बात यह रही कि बावुमा ने उस वक्त खुद वह टिप्पणी सुनी भी नहीं थी।

“मुझे तो बाद में पता चला कि बात क्या थी”

बावुमा के मुताबिक, उन्हें उस समय यह भी नहीं पता था कि माफी किस बात की मांगी जा रही है।

उन्होंने लिखा,
“मैंने उस वक्त कुछ नहीं सुना था। मुझे अपने मीडिया मैनेजर से बात करनी पड़ी, तब जाकर पूरी बात समझ आई।”

यह बयान उस नैरेटिव को थोड़ा अलग रोशनी में रखता है, जिसमें अक्सर मैदान पर कही गई बातों को तुरंत टकराव के तौर पर देखा जाता है।

मैदान की बातें मैदान तक—लेकिन याद रहती हैं

बावुमा ने एक बेहद संतुलित लाइन कही, जो इस पूरे विवाद का सार बन जाती है।

“जो मैदान पर होता है, वह मैदान पर ही रहता है। लेकिन आप यह नहीं भूलते कि क्या कहा गया था।”

उन्होंने यह भी माना कि ऐसी बातें दुश्मनी नहीं बनातीं, बल्कि कई बार प्रेरणा बन जाती हैं।

यानी गुस्सा नहीं, बदला नहीं—बस प्रोफेशनल प्रतिस्पर्धा।

भारत दौरा: टेस्ट में इतिहास, व्हाइट बॉल में झटका

यह सीरीज़ खुद में काफी दिलचस्प रही।

  • दो टेस्ट – दक्षिण अफ्रीका ने भारत में 25 साल बाद टेस्ट सीरीज़ जीती
  • तीन वनडे + पांच T20I – भारत ने वापसी करते हुए सफेद गेंद की सीरीज़ अपने नाम की

लाल गेंद में इतिहास, सफेद गेंद में निराशा—और बीच में ये विवाद।

“भारत को घुटने पर लाने” वाली टिप्पणी और कोच का रोल

बावुमा ने सिर्फ खिलाड़ियों की बात नहीं की। उन्होंने अपने ही कोच शुकरी कॉनराड की विवादित टिप्पणी पर भी साफ राय रखी।

गुवाहाटी टेस्ट के दौरान कॉनराड ने कहा था कि दक्षिण अफ्रीका भारतीय टीम को “घुटने के बल लाना” चाहता है। यह बयान तुरंत सुर्खियों में आ गया और आलोचना भी हुई।

बावुमा ने माना कि:

“जब मैंने पहली बार यह सुना, तो मुझे अच्छा नहीं लगा।”

“कोच को बेहतर शब्द चुनने चाहिए थे”

दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ने खुलकर स्वीकार किया कि उनके कोच को भाषा को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए था।

उन्होंने लिखा,
“शुकरी को भी अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना झेलनी पड़ी। मुझे लगा कि वह बेहतर शब्द चुन सकते थे—और मैं उनसे सहमत हूं।”

बावुमा के मुताबिक, मीडिया का दबाव उन पर भी था और उनसे लगातार सफाई मांगी जा रही थी।

कॉनराड ने भी माना, मामला खत्म

इस पूरे प्रकरण का सबसे अहम हिस्सा यह है कि मामला बढ़ाया नहीं गया।

  • वनडे सीरीज़ के बाद शुकरी कॉनराड ने बात की
  • उन्होंने माना कि शब्दों का चयन बेहतर हो सकता था
  • और वहीं पर यह मुद्दा खत्म कर दिया गया

बावुमा ने भी कहा कि इसके बाद इस पर और कुछ कहने की ज़रूरत नहीं थी।

टेस्ट क्रिकेट की तीव्रता और भावनाएं

बावुमा ने एक अहम बात कही, जिसे अक्सर टीवी डिबेट्स में भुला दिया जाता है।

“इसने मुझे बस यह याद दिलाया कि टेस्ट सीरीज़ कितनी मुश्किल और प्रतिस्पर्धी थी।”

टेस्ट क्रिकेट सिर्फ स्किल का खेल नहीं है—यह मानसिक और भावनात्मक परीक्षा भी है। और कभी-कभी वही भावनाएं शब्दों में बाहर आ जाती हैं।

भारत–दक्षिण अफ्रीका: सम्मान बना रहा

इन सबके बीच एक बात साफ है—

  • न कोई औपचारिक शिकायत
  • न कोई ICC कार्रवाई
  • न कोई लंबी दुश्मनी

बावुमा के शब्दों से यह झलकता है कि भारतीय खिलाड़ियों और दक्षिण अफ्रीकी टीम के बीच सम्मान बना रहा।

आधुनिक क्रिकेट और भाषा की सीमाएं

यह पूरा मामला एक बड़े सवाल की तरफ भी इशारा करता है।

  • क्या मैदान पर स्लेजिंग की सीमा बदल चुकी है?
  • क्या हर शब्द अब माइक्रोफोन के दौर में ज्यादा भारी पड़ता है?

शायद हां।

और यही वजह है कि खिलाड़ी और कोच—दोनों—अब ज्यादा सतर्क दिखते हैं।

माफी, समझदारी और आगे बढ़ना

तेम्बा बावुमा की बातों में कोई कड़वाहट नहीं है। न शिकायत, न शिकायत का बोझ।

  • खिलाड़ियों ने माफी मांगी
  • कोच ने शब्दों पर पछतावा जताया
  • कप्तान ने संतुलन दिखाया

और क्रिकेट आगे बढ़ गया।

शायद यही प्रोफेशनलिज़्म है।
शायद यही अंतर है—मैच जीतने और खेल जीतने में।

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