SKY – कप्तानी की ट्रॉफी हाथ में है, लेकिन बल्ला खामोश—सूर्यकुमार यादव के लिए 2025 का इंटरनेशनल टी20 साल कुछ ऐसा ही रहा है।
एशिया कप जीतकर बतौर कप्तान उन्होंने टिक किया, पर निजी आंकड़े वही सवाल खड़े कर रहे हैं जिनसे बड़े टूर्नामेंट से पहले कोई टीम बचना चाहती है। टी20 वर्ल्ड कप बस दो महीने दूर है, और कप्तान का फॉर्म टीम इंडिया की सबसे बड़ी टेंशन बन चुका है।
साल का आखिरी टी20 सामने है। फैंस उम्मीद लगाए बैठे हैं कि SKY साल का अंत उसी अंदाज़ में करें, जिसके लिए वह पहचाने जाते हैं—बेबाक, तेज़ और मैच पलट देने वाला।
2025: जब आंकड़े साथ नहीं आए
कभी दुनिया के नंबर एक टी20 बल्लेबाज़ रहे सूर्यकुमार यादव के लिए 2025 बेहद कठिन रहा।
करीब 20 मैचों की 18 पारियों में—
– रन: 213
– औसत: 14.20
– अर्धशतक: 0
यहां तक कि अक्टूबर 2024 के बाद से उनके नाम एक भी टी20 फिफ्टी नहीं जुड़ी। टी20 क्रिकेट में यह आंकड़ा सिर्फ खराब फॉर्म नहीं, लंबे साइलेंस की कहानी कहता है।
कप्तानी सफल, लेकिन बल्लेबाज़ी क्यों अटकी?
एशिया कप जीत—यह छोटी बात नहीं। कप्तानी में रणनीति, फैसले और टीम मैनेजमेंट में SKY ने नंबर काटे। लेकिन टी20 फॉर्मेट में कप्तान का बल्ला अगर नहीं चलता, तो दबाव दोगुना हो जाता है।
वर्ल्ड कप से पहले टीम को चाहिए:
– टॉप-ऑर्डर से तेज़ शुरुआत
– मिडिल में स्थिरता
– और डेथ ओवर्स में क्लीन हिटिंग
यही तीनों चीज़ें सूर्यकुमार के बैट से आती थीं। आती थीं।
दक्षिण अफ्रीका सीरीज़: संघर्ष साफ दिखा
मौजूदा सीरीज़ में भी परेशानी कम नहीं हुई।
तीन मैचों में:
– रन: 29
– औसत: 9.67
– स्ट्राइक रेट: 111.54
– चौके-छक्के: 4 चौके, 1 छक्का
यह SKY के स्टैंडर्ड से बहुत नीचे है। गेंदबाज़ लाइन और लेंथ पर टिके रहे, और सूर्यकुमार वह गैप नहीं ढूंढ पाए, जो पहले उनकी पहचान था।
“मैं फॉर्म से बाहर नहीं हूं”—कप्तान का भरोसा
तीसरे टी20 में जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार यादव ने अपनी स्थिति पर खुलकर बात की।
उनके शब्दों में,
“खेल आपको बहुत कुछ सिखाता है। आप कैसे वापसी करते हैं, यह ज़्यादा महत्वपूर्ण है। मैं नेट्स में बहुत अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहा हूं। जब रन आने होंगे, तब आएंगे। मैं फॉर्म से बाहर नहीं हूं—यह अलग बात है कि रन नहीं आ रहे।”
यह बयान दो बातें कहता है:
– कप्तान का आत्मविश्वास कायम है
– लेकिन आंकड़े अब भी मना कर रहे हैं
समय कम, दबाव ज़्यादा
भारत टी20 सीरीज़ में 2-1 से आगे है और शुक्रवार का मुकाबला साल का आखिरी मैच होगा। इसके बाद 11 जनवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 वनडे और 5 टी20—यानी मौके हैं, लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं।
वर्ल्ड कप से पहले:
– प्रयोग की गुंजाइश कम
– भरोसा टूटने का जोखिम ज़्यादा
– और कप्तानी बदलने का समय नहीं
यही वजह है कि SKY पर दबाव हर मैच के साथ बढ़ रहा है।
क्या एक पारी सब बदल सकती है?
टी20 क्रिकेट का सच यही है—
एक पारी पूरी कहानी पलट सकती है।
– एक 60(30)
– एक चेज़ फिनिश
– एक मैच-विनिंग नॉक
और नैरेटिव बदल जाता है। सूर्यकुमार के पास स्किल है, अनुभव है, कप्तानी का भरोसा है। कमी सिर्फ रन की है—और वो कभी भी लौट सकते हैं।
टीम इंडिया की चिंता जायज़ क्यों है?
क्योंकि:
– कप्तान मिडिल ऑर्डर का एंकर भी है
– डेथ ओवर्स का फिनिशर भी
– और बड़े मैचों का एक्स-फैक्टर भी
अगर यही खिलाड़ी लय में नहीं, तो प्लान-A के साथ प्लान-B भी डगमगाता है।
आगे की राह: भरोसा या बैकअप?
फिलहाल संकेत साफ हैं—
टीम मैनेजमेंट भरोसे पर टिकेगा।
क्योंकि समय कम है, विकल्प आज़माने की खिड़की बंद हो रही है, और कप्तानी का फैसला उलटना आसान नहीं।
अब सबकी निगाहें उस आखिरी टी20 पर हैं—
जहां SKY के बल्ले से सिर्फ रन नहीं, सुकून चाहिए।















