T20I : वरुण चक्रवर्ती का फोकस साफ – आसान मैचों में भी खुद को चुनौती

Atul Kumar
Published On:
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T20I – टी20 वर्ल्ड कप की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और इसी बीच वरुण चक्रवर्ती की बातों ने साफ कर दिया है कि वह सिर्फ फॉर्म नहीं, बल्कि मेंटल गेम पर सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं।

भारत के मिस्ट्री स्पिनर का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट से पहले असली तैयारी तब होती है, जब खिलाड़ी आसान दिखने वाले मैचों में भी खुद पर दबाव बनाना सीख ले।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा सीरीज़ में लगातार असरदार प्रदर्शन के बीच वरुण ने अपनी सोच खोलकर रख दी है—सरल, स्पष्ट और आत्मविश्वास से भरी।

आत्मविश्वास और लेंथ: वरुण का पूरा फोकस

34 साल के वरुण चक्रवर्ती ने अब तक 32 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 51 विकेट झटके हैं। मौजूदा पांच मैचों की सीरीज़ के शुरुआती तीन मुकाबलों में ही उनके खाते में 6 विकेट आ चुके हैं। लेकिन आंकड़ों से ज्यादा अहम है उनका माइंडसेट।

‘जियोस्टार’ के ‘फॉलो द ब्लूज’ कार्यक्रम में वरुण ने कहा,
“विश्व कप की तैयारी के लिए खुद पर लगातार दबाव बनाए रखना बहुत जरूरी है।”

उनके मुताबिक, अगर मैच आसान लग रहा हो, तब भी दिमाग को आराम नहीं देना चाहिए।

आसान मैचों में भी खुद को चुनौती देना

वरुण का मानना है कि इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे बड़ा दुश्मन कंफर्ट ज़ोन है।

उन्होंने कहा,
“जब कोई चुनौती न हो तब भी आपको खुद को चुनौती देनी होगी। अगर कोई मैच आसान लगे, तो मानसिक रूप से खुद पर दबाव बनाना जरूरी है।”

यही सोच उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है—जहां कई खिलाड़ी आसान हालात में ढीले पड़ जाते हैं, वहीं वरुण वहां खुद को और कसते हैं।

टी20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए क्यों अहम हैं वरुण?

भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में 7 फरवरी से 8 मार्च तक होने वाला टी20 वर्ल्ड कप भारत के लिए बेहद खास है, क्योंकि टीम डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर उतरेगी।

ऐसे में:
– मिडिल ओवर्स में विकेट
– अलग-अलग लेंथ और फ्लाइट
– और बल्लेबाज़ों को पढ़ने की कला

वरुण चक्रवर्ती को टीम इंडिया का एक्स-फैक्टर बनाती है।

विपक्ष को पढ़ना, गेम को कंट्रोल करना

वरुण सिर्फ अपनी गेंदों पर नहीं, बल्कि बल्लेबाज़ों की सोच पर भी काम करते हैं।

उन्होंने कहा,
“मेरे लिए आत्मविश्वास, सही लेंथ पर गेंदबाजी करना और विपक्षी टीम को समझना बहुत जरूरी है। जब आप विरोधी टीम को बेहतर समझते हैं, तो आप बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।”

यही वजह है कि वरुण अब सिर्फ मिस्ट्री स्पिनर नहीं रहे—
वह प्लानिंग स्पिनर बन चुके हैं।

बुनियादी बातों में ही छिपी है सफलता

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दोबारा मजबूत वापसी को लेकर वरुण पूरी तरह साफ हैं।

उनका मंत्र:
– बेसिक्स पर टिके रहो
– अपनी लेंथ पर भरोसा रखो
– बार-बार कुछ नया करने की मजबूरी में न पड़ो

वरुण ने कहा,
“मेरी योजना काफी सरल है। बुनियादी बातों पर ध्यान देना और सही लेंथ पर गेंदबाजी करना। शुक्र है कि पिछले तीन मैचों में यह कारगर रहा।”

आत्मविश्वास टूटा तो स्किल भी टूटती है

वरुण चक्रवर्ती ने आत्मविश्वास और निरंतरता के रिश्ते को बेहद साफ शब्दों में समझाया।

उनके मुताबिक,
“जब आप आत्मविश्वास से भरे नहीं होते, तो आपकी मानसिकता आपके कौशल को प्रभावित करती है। आत्मविश्वास बना रहे, तो बिना ज्यादा बदलाव किए भी आप अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।”

यही निरंतरता का असली राज है—
हर मैच में खुद पर भरोसा।

शुरुआती संघर्ष और सीखा गया सबक

तमिलनाडु के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले वरुण ने माना कि इंटरनेशनल करियर की शुरुआत आसान नहीं थी।

उन्होंने कहा,
“अपने शुरुआती मैचों में मुझे परेशानी हुई थी। तभी मुझे समझ आया कि कहां सुधार की जरूरत है। अभ्यास के जरिए मैंने अपनी खामियों पर काम किया।”

उनके मुताबिक, टॉप लेवल पर टिके रहने के लिए खुद को पहचानना और सुधारना सबसे जरूरी है।

क्या वरुण बन सकते हैं भारत की ट्रंप कार्ड?

फॉर्म, फिटनेस और फोकस—तीनों फिलहाल वरुण के पक्ष में हैं।
अगर यही लय बरकरार रही, तो टी20 वर्ल्ड कप में:

– मिडिल ओवर्स में गेम पलटने वाला स्पेल
– बड़े बल्लेबाज़ों पर दबाव
– और कप्तान का भरोसेमंद हथियार

वरुण चक्रवर्ती भारत के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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