ODI – शनिवार की शाम, इंदौर में निर्णायक वनडे से ठीक पहले, टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम से एक आवाज़ आई—शांत, भरोसे से भरी हुई। यह आवाज़ थी मोहम्मद सिराज की, और विषय थे रविंद्र जडेजा। पिछले कुछ मैचों में विकेट नहीं मिले, सवाल उठे, बहस शुरू हुई। लेकिन सिराज ने साफ शब्दों में कहा—
“यह फॉर्म का नहीं, सिर्फ एक विकेट का मामला है।”
और भारतीय क्रिकेट में, यह लाइन अपने आप में बहुत कुछ कह देती है।
“बस एक विकेट”… और तस्वीर बदल जाएगी
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले दो वनडे में जडेजा विकेट नहीं ले पाए। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज़ में भी उनके खाते में सिर्फ एक विकेट आया था। आंकड़े सीधे हैं, और ऐसे में सवाल उठना भी लाज़मी था।
लेकिन सिराज ने उस शोर को वहीं थामने की कोशिश की।
मैच की पूर्व संध्या पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं लगता कि जडेजा की फॉर्म किसी भी तरह से चिंता का विषय है। यह केवल एक विकेट की बात है। एक बार वह विकेट मिल जाए, फिर आप एक बिल्कुल अलग तरह के गेंदबाज को देखेंगे।”
यह बयान सिर्फ समर्थन नहीं था। यह उस ड्रेसिंग रूम की सोच को दिखाता है, जहां अनुभव को आंकड़ों से ऊपर रखा जाता है।
जडेजा और वनडे क्रिकेट: सिर्फ विकेटों की कहानी नहीं
रविंद्र जडेजा का वनडे रोल कभी सिर्फ विकेट तक सीमित नहीं रहा।
- मिडिल ओवर्स में रन रोकना
- दबाव बनाना
- पार्टनरशिप तोड़ना, भले विकेट तुरंत न मिले
लेकिन जब विकेट नहीं आते, तो आलोचना सबसे पहले स्पिनर पर ही जाती है। खासकर तब, जब आप सीनियर ऑलराउंडर हों।
सिराज की बातों से साफ है कि टीम मैनेजमेंट भी इसे उसी नजर से देख रहा है—
इम्पैक्ट > नंबर।
हमने दोनों मैचों में अच्छा खेला – सिराज का आकलन
सीरीज़ 1-1 से बराबर है, लेकिन सिराज का मानना है कि भारत का प्रदर्शन उतना खराब नहीं था, जितना नतीजा बताता है।
उन्होंने कहा,
“हमने दोनों मैचों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। पहले वनडे में गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों शानदार रहीं। दूसरे मैच में शुरुआती विकेट गिरने के बावजूद केएल राहुल ने अच्छी बल्लेबाजी की और नितीश रेड्डी ने भी योगदान दिया।”
यानी टीम के भीतर कोई घबराहट नहीं है। हार को प्रोसेस की गलती माना जा रहा है, क्षमता की नहीं।
डैरिल मिचेल और वो एक कैच
दूसरे वनडे की हार का ज़िक्र आते ही सिराज एक ही पल पर रुके—
वो छूटा हुआ कैच।
उन्होंने साफ कहा,
“एक मौका था। जब कैच छूटा। अगर हमने उस मौके का फायदा उठाया होता, तो नतीजा अलग हो सकता था। विश्व स्तरीय बल्लेबाज आपको ज्यादा मौके नहीं देते।”
यह बयान क्रिकेट का सबसे कड़वा सच दोहराता है।
टॉप बल्लेबाज़ को जीवनदान दो—
और फिर मैच हाथ से जाता देखो।
निर्णायक मैच से पहले ड्रेसिंग रूम का माहौल
सीरीज़ का तीसरा और आखिरी वनडे। दबाव साफ है। लेकिन सिराज के मुताबिक, टीम का माहौल बिल्कुल संतुलित है।
“टीम का माहौल बहुत अच्छा है। सीनियर खिलाड़ियों का पूरा सहयोग मिल रहा है। जीत-हार होती रहती है, लेकिन ड्रेसिंग रूम पॉजिटिव है।”
यह वही माहौल है, जहां जडेजा जैसे खिलाड़ी को एक और मौका मिलता है—बिना किसी हड़बड़ी के।
अर्शदीप के साथ नई गेंद? सिराज का साफ जवाब
इंदौर के छोटे मैदान पर अर्शदीप सिंह के नई गेंद साझा करने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल को सिराज ने बड़े सधे अंदाज़ में टाल दिया।
“अर्शदीप ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की है और नई गेंद से विकेट लिए हैं। अंतिम एकादश पर फैसला कप्तान और कोच करते हैं। मेरा काम है दबाव बनाना और रन नहीं देना।”
यह बयान बताता है कि रोल क्लैरिटी कितनी साफ है।
अगर सामने वाला विकेट ले रहा है, तो दूसरे छोर से कसाव चाहिए।
टी20 वर्ल्ड कप से बाहर रहना: कोई शिकायत नहीं
टी20 वर्ल्ड कप स्क्वाड में जगह न मिलने पर भी सिराज ने कोई कड़वाहट नहीं दिखाई।
उन्होंने माना कि वह इस बड़े टूर्नामेंट में खेलना चाहते थे, लेकिन शायद वर्कलोड मैनेजमेंट की वजह से यह फैसला लिया गया।
यह वही सोच है, जो लंबे करियर की निशानी होती है—
हर टूर्नामेंट नहीं, बल्कि हर साल फिट रहना।
होलकर स्टेडियम: गेंदबाजों के लिए चुनौती
इंदौर का होलकर स्टेडियम—छोटा मैदान, तेज आउटफील्ड, और रन बरसने की पूरी संभावना।
सिराज ने इसे लेकर कहा,
“यह छोटा मैदान है। यहां आमतौर पर ज्यादा रन बनते हैं। लेकिन अगर आप स्टंप-टू-स्टंप गेंदबाजी करते हैं, तो LBW और बोल्ड के मौके मिलते हैं।”
यानी प्लान साफ है—
लंबाई में गलती नहीं, लाइन में अनुशासन।
जडेजा के लिए रविवार क्यों अहम है
रविवार का मुकाबला सिर्फ सीरीज़ का फैसला नहीं करेगा।
यह रविंद्र जडेजा के लिए भी एक मोमेंटम गेम हो सकता है।
- एक विकेट
- एक ओवर का ब्रेकथ्रू
- और फिर वही पुराना जडेजा
सिराज ने शायद इसी भरोसे के साथ यह बात कही—
“बस एक विकेट।”















