T20I – तिरुवनंतपुरम की शाम ने भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक और सुनहरा अध्याय लिख दिया। स्कोरबोर्ड पर फर्क बड़ा नहीं दिखता—आठ विकेट की जीत—लेकिन इसके पीछे जो कहानी है, वो कहीं ज़्यादा बड़ी है।
हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारत ने श्रीलंका को तीसरे टी20 में रौंदते हुए पांच मैचों की सीरीज़ में 3–0 की अजेय बढ़त बना ली। यानी सीरीज़ भारत की। और हां, यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि दबदबे की मुहर है।
श्रीलंका पर लगातार चौथी टी20 सीरीज़ जीत
भारत और श्रीलंका की टी20 प्रतिद्वंद्विता में पिछले एक दशक का पैटर्न साफ है। 2014 में एक बार श्रीलंका ने भारत को टी20 सीरीज़ में चौंकाया था। उसके बाद से—दरवाज़ा बंद।
- 2014 के बाद से श्रीलंका को भारत के खिलाफ सीरीज़ जीत नसीब नहीं हुई।
- 2022 में पांच मैचों की सीरीज़ में श्रीलंका सिर्फ एक मैच जीत पाई।
- और अब 2025 की सीरीज़ में भारत ने लगातार तीन मैच जीतकर काम पहले ही निपटा दिया।
तीसरा टी20: पहले गेंदबाज़ी, फिर शेफाली का शो
टॉस के बाद भारत ने वही किया, जो इस टीम की पहचान बन चुका है—डिसिप्लिन।
श्रीलंका पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी, लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों ने रन-रेट को शुरू से ही जकड़े रखा।
श्रीलंका की पारी: 112/7 (20 ओवर)
| बल्लेबाज़ी | स्थिति |
|---|---|
| कुल स्कोर | 112/7 |
| ओवर | 20 |
| हालात | दबाव में, रन-रेट बंधी |
भारतीय गेंदबाज़ों ने लेंथ और फील्डिंग से श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों को सांस नहीं लेने दी। नतीजा—एक साधारण लक्ष्य, लेकिन टी20 में कोई लक्ष्य छोटा नहीं होता। सिवाय तब, जब सामने शेफाली वर्मा हों।
शेफाली वर्मा: “डॉट से डर नहीं लगता”
113 रन का लक्ष्य था। शुरुआत में तीन डॉट बॉल—और यहीं से कहानी दिलचस्प होती है। कई बल्लेबाज़ यहां रुकते हैं। शेफाली ने गियर बदला।
- स्मृति मंधाना (1) जल्दी आउट
- जेमिमा रोड्रिग्स (9) को समय लगा
- लेकिन शेफाली? बिल्कुल अलग मोड
शेफाली वर्मा की पारी
| आंकड़ा | विवरण |
|---|---|
| रन | 79* |
| गेंदें | 42 |
| चौके | 11 |
| छक्के | 3 |
| स्ट्राइक रेट | ~188 |
पावरप्ले में भारत के 55 रनों में से 50 अकेले शेफाली के थे। फील्ड फैली—तब भी बाउंड्री। फील्ड अंदर—तब भी बाउंड्री। गेंदबाज़ बदले—तब भी बाउंड्री। यह सिर्फ हिटिंग नहीं थी; यह कंट्रोल्ड आक्रामकता थी।
मैच 13.2 ओवर में खत्म। 6.4 ओवर बाकी। शेफाली ने विजयी चौका लगाया—और स्टेडियम ने फैसला सुना दिया।
हरमनप्रीत कौर: कप्तानी का विश्व रिकॉर्ड
इस जीत के साथ हरमनप्रीत कौर ने एक और कीर्तिमान अपने नाम कर लिया।
वह टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज़्यादा मैच जीतने वाली कप्तान बन गईं।
टी20I में सबसे ज़्यादा जीत—कप्तान के रूप में
| कप्तान | जीत |
|---|---|
| हरमनप्रीत कौर (भारत) | 77 |
| मेग लैनिंग (ऑस्ट्रेलिया) | 76 |
यह रिकॉर्ड सिर्फ लंबी कप्तानी का नहीं, निरंतर जीत का प्रमाण है। हरमनप्रीत की पारी (18 गेंद, 21*) इस मैच में छोटी दिखेगी, लेकिन उनका असर—मैच मैनेजमेंट, शेफाली को स्पेस देना, गेंदबाज़ी रोटेशन—हर जगह दिखा।
क्यों एकतरफा रही सीरीज़?
तीन वजहें साफ दिखती हैं:
- पावरप्ले का कंट्रोल
भारत ने गेंद और बल्ले—दोनों से पावरप्ले जीता। - फील्डिंग का फर्क
कैच, रन-आउट, कट-ऑफ—हर जगह भारत आगे। - रोल-क्लैरिटी
शेफाली का काम—तेज़ शुरुआत।
मिडिल ऑर्डर—स्थिरता।
कप्तान—संतुलन।
श्रीलंका ने युवा खिलाड़ियों को मौके दिए—सही कदम—लेकिन शेफाली की रफ्तार के सामने अनुभव की कमी दिखी।
आंकड़ों के पार की कहानी
यह जीत सिर्फ सीरीज़ जीत नहीं है। यह बताती है कि भारतीय महिला टीम अब रूटीन में जीतती है। लक्ष्य छोटा हो या बड़ा, दबाव नया हो या पुराना—रिएक्शन वही रहता है: शांत, योजनाबद्ध, निर्णायक।
आगे क्या?
सीरीज़ तो जेब में है। बाकी दो मैच बेंच स्ट्रेंथ, कॉम्बिनेशन ट्रायल और वर्कलोड मैनेजमेंट के लिए होंगे। लेकिन एक बात तय है—इस टीम का टेम्पलेट सेट हो चुका है।
शेफाली की रात, हरमनप्रीत की विरासत
तीसरा टी20 शेफाली वर्मा के नाम रहा—बिना किसी संदेह के। लेकिन सीरीज़ हरमनप्रीत कौर की है—रिकॉर्ड, नेतृत्व और निरंतरता के साथ।
भारत ने श्रीलंका के खिलाफ लगातार चौथी टी20 सीरीज़ जीती। और जिस तरह जीती—वो बताता है कि यह टीम सिर्फ जीत नहीं रही, मानक तय कर रही है।















