Gavaskar : इंदौर हार पर गावस्कर का इशारा – फील्डिंग बनी विलेन

Atul Kumar
Published On:
Gavaskar

Gavaskar – इंदौर की हार सिर्फ स्कोरकार्ड तक सीमित नहीं रही। 41 रनों से मिली इस शिकस्त के बाद भारतीय क्रिकेट के गलियारों में बहस तेज है—किसकी गलती थी? बल्लेबाज़ों की? कप्तान की? गेंदबाज़ों की?
लेकिन टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने उंगली एक ऐसे पहलू पर रखी, जिस पर अक्सर शोर कम होता है—फील्डिंग।

338 रनों का विशाल लक्ष्य, शतकवीर विराट कोहली, दो अर्धशतक… फिर भी हार। गावस्कर के मुताबिक, जवाब कहीं और छुपा है।

गावस्कर का सीधा इशारा: नाम नहीं, मैसेज बड़ा

तीसरे वनडे के बाद साइमन डूल के साथ बातचीत में सुनील गावस्कर ने बिना किसी खिलाड़ी का नाम लिए अपनी बात बेहद साफ रखी।

उनके शब्द थे,
“मैं नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन कुछ फील्डर्स ने सिंगल बहुत आसानी से लेने दिए। थोड़ी और एक्टिवनेस दिख सकती थी।”

गावस्कर ने साथ ही यह भी जोड़ा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ी मैदान पर तेज़ और चुस्त दिखे, लेकिन पूरी टीम से वही ऊर्जा नहीं झलकी।

यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि आधुनिक वनडे क्रिकेट में 10–15 आसान सिंगल भी मैच का रुख बदल देते हैं।

338 का स्कोर: कहां फिसली भारतीय फील्डिंग?

न्यूजीलैंड की पारी की शुरुआत भारत ने शानदार की थी।

  • अर्शदीप सिंह ने डेवोन कॉनवे को आउट किया
  • हर्षित राणा ने हेनरी निकोल्स को पवेलियन भेजा
  • स्कोरबोर्ड पर न्यूजीलैंड 5/2

यहां से भारत के पास दबाव बनाने का मौका था।
लेकिन बीच के ओवर्स में—

  • सिंगल्स बहुत आसानी से मिले
  • इनर रिंग में चुस्ती की कमी दिखी
  • बल्लेबाज़ों को स्ट्राइक रोटेट करने से रोका नहीं जा सका

53 रन और जुड़ने के बाद हर्षित राणा ने विल यंग को आउट जरूर किया, लेकिन तब तक डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स जम चुके थे।

मिचेल–फिलिप्स की साझेदारी: यहीं पलटा मैच

तीसरे विकेट के बाद भारत की पकड़ ढीली पड़ी।
डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स ने—

  • दोनों ने शतक जड़े
  • गैप्स ढूंढे
  • और स्ट्राइक को लगातार घुमाते रहे

नतीजा—न्यूजीलैंड 338/7 तक पहुंच गया।

यह स्कोर सिर्फ बड़े शॉट्स से नहीं बना था, बल्कि लगातार मिलते रन इसका आधार थे।

लक्ष्य का पीछा: फिर वही कहानी

338 के जवाब में भारत की शुरुआत लड़खड़ा गई।

  • एक समय स्कोर था 71/4
  • टॉप ऑर्डर बिखर चुका था

इसके बाद—

  • नीतिश रेड्डी ने अर्धशतक जड़ा
  • हर्षित राणा ने भी बहादुरी दिखाई
  • और विराट कोहली ने 124 रन की शतकीय पारी खेली

लेकिन अकेले या दो-तीन बल्लेबाज़ मिलकर भी यह पहाड़ पार नहीं कर सके। भारत 296 रन पर ऑलआउट हो गया।

फील्डिंग: वो पहलू जिस पर मैच हारते हैं

गावस्कर की बात यहीं वजन पकड़ती है।
वनडे क्रिकेट में—

  • 15–20 रन फील्डिंग से बचाए जा सकते हैं
  • उतने ही रन ढीली फील्डिंग से दिए भी जा सकते हैं

इंदौर में भारत ने शायद वही 15–20 रन गंवाए, जिनका फर्क अंत में 41 रन बन गया।

क्या सिर्फ फील्डिंग जिम्मेदार?

नहीं।
लेकिन यह भी सच है कि—

  • गेंदबाज़ों ने शुरुआत दिलाई
  • बल्लेबाज़ों ने अंत तक कोशिश की

बीच में जो कमी रही, वह थी लगातार दबाव बनाए रखने की। और यह दबाव सिर्फ गेंद से नहीं, फील्डिंग से बनता है।

गावस्कर का मैसेज: इशारा भविष्य की ओर

सुनील गावस्कर का बयान सिर्फ इंदौर की हार पर टिप्पणी नहीं था।
यह एक वार्निंग भी थी।

आने वाले टूर्नामेंट्स में—

  • हर सिंगल मायने रखेगा
  • हर आधा मौका फर्क डालेगा
  • और हर खिलाड़ी को “एक्स्ट्रा” देना होगा

हार की वजह एक नहीं होती

इंदौर में भारत हारा क्योंकि—

  • न्यूजीलैंड ने बेहतर बल्लेबाज़ी की
  • भारत का टॉप ऑर्डर नहीं चला
  • और फील्डिंग में वह धार नहीं दिखी, जिसकी जरूरत थी
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