IPL – आईपीएल अभी तीन महीने दूर है, लेकिन शुभमन गिल की फॉर्म पर बहस अभी से गर्म हो चुकी है। दो मैच, कुछ कम रन, और सोशल मीडिया से लेकर स्टूडियो तक सवालों की लाइन—और यहीं पर गुजरात टाइटन्स के मुख्य कोच आशीष नेहरा को आपत्ति है। साफ, बेबाक और बिना घुमाव-फिराव के।
क्रिकेट में जल्दबाज़ी से फैसले निकालने की आदत पर नेहरा ने सीधे उंगली रख दी है—खासकर तब, जब बात टी20 जैसे अस्थिर प्रारूप की हो।
“दो मैच में जज करना हमारी सबसे बड़ी समस्या है” — नेहरा
एशिया कप के दौरान उप-कप्तान के रूप में टी20 टीम में लौटे शुभमन गिल ने पिछले 10 मैचों में 181 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 140 से नीचे रहा है। आंकड़े देखने में साधारण हैं, और शायद इसी वजह से आलोचना तेज़ हुई।
लेकिन नेहरा को यह गणित पसंद नहीं आया।
उन्होंने कहा:
“तीन महीने छोड़िए, अगर आईपीएल तीन हफ्ते बाद भी होता, तब भी मैं चिंतित नहीं होता। आप टी20 की बात कर रहे हैं। और अगर मैं गलत नहीं हूं, तो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सिर्फ दो मैच ही खेले गए हैं।”
यह बयान सिर्फ गिल का बचाव नहीं था, बल्कि उस मानसिकता पर हमला था जो नंबर देखकर फैसला सुना देती है।
टी20 क्रिकेट और जल्दबाज़ी का जाल
नेहरा का मानना है कि भारत में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हम सैंपल साइज को भूल जाते हैं।
दो मैच खराब? खिलाड़ी सवालों के घेरे में।
तीन मैच अच्छे? अगला सुपरस्टार तैयार।
“अगर इस फॉर्मेट में—चाहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हो या आईपीएल—आप शुभमन गिल जैसे खिलाड़ी को दो-तीन मैच में जज करेंगे, तो मुश्किल होगी,” नेहरा ने दो टूक कहा।
व्यंग्य के साथ विकल्पों की लंबी लिस्ट
नेहरा की खासियत यही है—वह बात को हल्का रखते हुए गहरी चोट कर देते हैं।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा:
“आपके पास बहुत विकल्प हैं। अगर आप चाहें तो अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल को हटा सकते हैं, और साई सुदर्शन व ऋतुराज गायकवाड़ से ओपनिंग करा सकते हैं।”
और यहीं नहीं रुके।
“अगर आप इन्हें भी हटाना चाहें, तो वॉशिंगटन सुंदर और ईशान किशन से पारी का आगाज़ करा सकते हैं। विकल्पों की कोई कमी नहीं है।”
मैसेज साफ था—बदलाव आसान है, लेकिन स्थिरता मुश्किल।
गुजरात टाइटन्स का सबक—संयोजन ही असली ताकत
नेहरा ने यह भी इशारा किया कि हर मैच के बाद टीम बदलने की सोच लंबी दौड़ में नुकसानदेह होती है।
उन्होंने माना कि पिछले सीज़न में एक तय कॉम्बिनेशन की वजह से वॉशिंगटन सुंदर सिर्फ छह मैच खेल पाए थे। लेकिन इस बार तस्वीर अलग हो सकती है।
संकेत साफ है—अगर सुंदर फिट रहते हैं, तो गुजरात टाइटन्स उन्हें कहीं ज्यादा बड़ी भूमिका में देख सकती है।
कप्तान गिल और भरोसे की लड़ाई
शुभमन गिल सिर्फ बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि अब फ्रेंचाइज़ी कप्तान भी हैं। ऐसे में फॉर्म की आलोचना सिर्फ रन तक सीमित नहीं रहती—वह नेतृत्व तक पहुंच जाती है।
नेहरा का रुख यहां भी स्पष्ट है।
टी20 में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है, और कप्तान को उसी तरह ट्रीट किया जाना चाहिए—लंबी रेस का घोड़ा मानकर, न कि दो मैच का प्रोजेक्ट।















