SMAT – करीब दो साल की खामोशी के बाद जब ईशान किशन का नाम टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड में आया, तो यह सिर्फ एक चयन नहीं था—यह एक सिस्टम पर सवाल और जवाब, दोनों था।
सवाल यह कि वापसी कैसे हुई? और जवाब, सुनील गावस्कर की आवाज़ में आया—घरेलू क्रिकेट अब सिर्फ विकल्प नहीं, चयन की नींव होना चाहिए।
टीम इंडिया में ईशान की वापसी ने बहस छेड़ दी है। लेकिन अगर बहस को शोर से हटाकर तथ्यों पर लाया जाए, तो तस्वीर काफी साफ दिखती है।
दो साल बाद वापसी, लेकिन अचानक नहीं
ईशान किशन लंबे समय से भारतीय टी20 सेटअप से बाहर थे। न कोई इंटरनेशनल सीरीज़, न कोई बैकअप रोल। लेकिन वापसी अचानक नहीं हुई—वह मेहनत के दम पर हुई।
हाल ही में खत्म हुई सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में ईशान ने:
– रन बनाए
– मैच जिताए
– और कप्तान के तौर पर झारखंड को इतिहास में पहली बार चैंपियन बनाया
यह सिर्फ फॉर्म नहीं थी, यह लीडरशिप + परफॉर्मेंस का कॉम्बिनेशन था।
सुनील गावस्कर का साफ संदेश
जियोस्टार के शो में बात करते हुए सुनील गावस्कर ने ईशान किशन की वापसी को बिल्कुल सही ठहराया। और इसके साथ ही चयन नीति पर एक बड़ा बयान भी दे दिया।
गावस्कर ने कहा,
“जब आप किसी को शानदार प्रदर्शन करते हुए देखते हैं, तो आप उसे चुनते हैं। ईशान किशन पहले भी टीम का हिस्सा रहे हैं और दिखा चुके हैं कि वह क्या कर सकते हैं। यह एक बहुत बड़ा प्लस पॉइंट है।”
लेकिन असली लाइन आगे आई।
उनके मुताबिक,
“सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनकी हालिया फॉर्म यह साबित करती है कि चयन का आधार घरेलू क्रिकेट का प्रदर्शन होना चाहिए, न कि केवल आईपीएल।”
यह बयान सीधे उस बहस पर चोट करता है, जो सालों से चल रही है—IPL बनाम डोमेस्टिक क्रिकेट।
SMAT 2025: जहां से कहानी बदली
ईशान किशन का यह टूर्नामेंट सिर्फ अच्छा नहीं, डिस्ट्रक्टिव था।
– 10 पारियां
– 500+ रन
– स्ट्राइक रेट करीब 200
– दो शतक, दो अर्धशतक
– फाइनल में मैच-विनिंग सेंचुरी
और सबसे अहम—
झारखंड को पहला खिताब।
ऐसा प्रदर्शन सिर्फ स्कोरकार्ड में नहीं दिखता, वह चयनकर्ताओं की सोच में असर डालता है। और यही हुआ।
‘पहले भी खेल चुके हैं’—क्यों यह बात मायने रखती है
गावस्कर ने एक और अहम पॉइंट उठाया—अनुभव।
ईशान किशन:
– भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेल चुके हैं
– इंटरनेशनल दबाव देख चुके हैं
– IPL जैसे मंच पर बड़े शॉट्स लगा चुके हैं
यानी चयनकर्ताओं को:
– नया खिलाड़ी टेस्ट नहीं करना पड़ा
– नर्व्स की चिंता नहीं करनी पड़ी
घरेलू फॉर्म + इंटरनेशनल अनुभव = सेफ लेकिन असरदार चॉइस।
जितेश शर्मा पर गावस्कर की ईमानदारी
जहां ईशान की वापसी की तारीफ हुई, वहीं जितेश शर्मा के बाहर होने पर गावस्कर ने खुलकर सहानुभूति जताई।
उन्होंने कहा,
“मुझे जितेश शर्मा के लिए बुरा लग रहा है। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। जब भी मौके मिले, वह बहुत अच्छे विकेटकीपर साबित हुए।”
गावस्कर ने यहां तक कहा कि:
– एमएस धोनी के बाद
– स्टंप्स के पीछे से DRS कॉल में कप्तान की मदद
करने में जितेश शायद सबसे बेहतर विकेटकीपरों में से एक रहे हैं।
यह बयान दिखाता है कि चयन सिर्फ प्रदर्शन नहीं, कॉम्बिनेशन और रोल्स का खेल भी है।
घरेलू क्रिकेट का रास्ता अब साफ
गावस्कर का मानना साफ है—
अगर बाहर हो गए हो, तो:
– शिकायत नहीं
– सोशल मीडिया नहीं
– सीधा घरेलू क्रिकेट
उनके शब्दों में,
“वह अभी युवा हैं। उन्हें वापस घरेलू क्रिकेट में जाना होगा और अपना प्रदर्शन जारी रखना होगा।”
यही रास्ता ईशान किशन ने चुना।
और वही रास्ता अब दूसरों के लिए भी खुला है।
टीम मैनेजमेंट का बदला हुआ माइंडसेट
ईशान की वापसी यह भी दिखाती है कि:
– चयन सिर्फ IPL हाईलाइट्स पर नहीं होगा
– घरेलू टूर्नामेंट अब रियल ऑडिशन हैं
– और कप्तानी + परफॉर्मेंस को अलग से देखा जाएगा
बीसीसीआई पहले भी इस बात पर ज़ोर दे चुका है कि घरेलू क्रिकेट की अहमियत कम नहीं होगी
क्या ईशान प्लेइंग XI में होंगे?
यह अभी तय नहीं है।
लेकिन यह तय है कि:
– वह बैकअप ओपनर हैं
– बैकअप विकेटकीपर हैं
– और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत फिट बैठते हैं
टी20 वर्ल्ड कप में ऐसे खिलाड़ी ही टूर्नामेंट जिताते हैं—जो मौके का इंतज़ार नहीं, तैयारी करते हैं।















