Ishan – टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम आते ही सबसे ज़्यादा भौंहें जिस नाम पर उठीं, वह था ईशान किशन। लंबे वक्त तक टीम इंडिया से दूर, अचानक सीधे वर्ल्ड कप स्क्वॉड में एंट्री—वो भी बिना किसी ट्रायल सीरीज़ के। ऊपर से न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ में भी वही नाम। सवाल लाज़मी है—आखिर ऐसा क्या बदला?
जवाब सीधा नहीं है।
यह कोई भावनात्मक फैसला नहीं, बल्कि तीन लेयर वाला मास्टर प्लान है—जिसे टीम मैनेजमेंट ने काफी पहले डिजाइन कर लिया था।
फैक्टर नंबर 1: कॉम्बिनेशन, जो बिना हिले फिट हो जाए
ईशान किशन की सबसे बड़ी ताकत उनका टैलेंट नहीं, बल्कि उनकी उपयोगिता है।
टीम इंडिया ने उन्हें:
– शुभमन गिल के रिप्लेसमेंट के तौर पर
– बैकअप ओपनर
– और बैकअप विकेटकीपर
के रूप में चुना है।
यहां एक अहम बात समझनी होगी—ईशान पहली पसंद की प्लेइंग XI में नहीं हैं।
लेकिन अगर:
– संजू सैमसन चोटिल होते हैं
– या अभिषेक शर्मा अनुपलब्ध रहते हैं
तो सीधे:
– ओपनर की जगह ओपनर
– विकेटकीपर की जगह विकेटकीपर
मिल जाएगा।
कॉम्बिनेशन हिलेगा नहीं।
टी20 वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में यही सबसे बड़ा प्लस पॉइंट होता है—फ्लेक्सिबिलिटी बिना अफरा-तफरी के।
फैक्टर नंबर 2: जितेश आउट, रिंकू इन—और रास्ता साफ
अब आते हैं उस फैसले पर, जिसने डोमिनो इफेक्ट पैदा किया।
अब तक:
– जितेश शर्मा = विकेटकीपर + फिनिशर
लेकिन नई सोच में:
– संजू सैमसन = ओपनर + विकेटकीपर
तो सवाल उठा—जितेश की जगह क्या बची?
साफ जवाब—कुछ नहीं।
अगर विकेटकीपिंग संजू कर रहे हैं, तो:
– जितेश सिर्फ फिनिशर रह जाते हैं
– और उसी रोल में टीम के पास रिंकू सिंह जैसा विकल्प है
और ईमानदारी से देखें तो:
– दबाव में
– बड़े मैचों में
– आखिरी ओवरों में
रिंकू सिंह, जितेश शर्मा से एक लेवल ऊपर हैं।
यही वजह है कि:
– जितेश बाहर गए
– एक फिनिशर की सीट खाली हुई
– और रिंकू सिंह की एंट्री पक्की हो गई
इसके बाद टीम आराम से:
– हार्दिक पांड्या
– और शिवम दुबे
को एक साथ खिला सकती है।
बैटिंग गहराई भी बनी रहती है, और रोल भी क्लियर रहते हैं।
फैक्टर नंबर 3: डोमेस्टिक क्रिकेट में धमाकेदार फॉर्म
अब सबसे मजबूत आधार—परफॉर्मेंस।
ईशान किशन ने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि स्टेटमेंट दिया।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 में:
– 500+ रन
– स्ट्राइक रेट: 200 से ज्यादा
– दो शतक
– कप्तान के तौर पर झारखंड को पहला खिताब
यह सिर्फ एक अच्छा टूर्नामेंट नहीं था।
यह एक कमबैक ऑडिशन था—और ईशान उसमें पास नहीं, टॉप पर रहे।
सबसे अहम बात:
– वह पहले ही भारत के लिए
– तीनों फॉर्मेट खेल चुके हैं
तो चयनकर्ताओं को:
– नया खिलाड़ी तैयार नहीं करना पड़ा
– नर्व टेस्ट करने की जरूरत नहीं पड़ी
यही वजह है कि शुभमन गिल के बाहर होते ही, ईशान की दावेदारी सबसे मजबूत बन गई।
बीसीसीआई पहले भी साफ कर चुका है कि घरेलू प्रदर्शन को अब सीधा महत्व मिलेगा —और यह चयन उसी नीति की सीधी मिसाल है।
शुभमन गिल का बाहर होना क्यों बना टर्निंग पॉइंट?
गिल का टी20 फॉर्म:
– औसत कमजोर
– 2025 में एक भी अर्धशतक नहीं
टी20 वर्ल्ड कप से पहले:
– प्रयोग की गुंजाइश कम
– और भरोसे की ज़रूरत ज़्यादा
इसी वजह से टीम ने:
– फॉर्म + कॉम्बिनेशन
– को नाम से ऊपर रखा
और यहीं से ईशान किशन की एंट्री का रास्ता खुला।
न्यूजीलैंड सीरीज़ क्यों अहम है?
न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ में:
– ईशान किशन टीम का हिस्सा होंगे
– लेकिन प्लेइंग XI में जगह पक्की नहीं
यह सीरीज़ असल में:
– उन्हें सिस्टम में फिट करने
– और बैकअप रोल में तैयार रखने
का प्लेटफॉर्म है।
वर्ल्ड कप से पहले यह एक सेफ ट्रायल है—बिना टीम का संतुलन बिगाड़े।
मैनेजमेंट का मैसेज साफ है
तीन बातें बिल्कुल क्लियर हैं:
- नाम नहीं, रोल चलेगा
- बैकअप उतना ही जरूरी है जितना प्लेइंग XI
- घरेलू क्रिकेट अब शॉर्टकट नहीं, मेन रोड है
ईशान किशन इस पूरी सोच में परफेक्ट फिट बैठते हैं।
क्या ईशान वर्ल्ड कप खेलेंगे?
यह तय नहीं है।
लेकिन यह तय है कि:
– अगर कोई चोट
– या अचानक फॉर्म स्लंप
आता है, तो टीम के पास रेडी-टू-गो ऑप्शन है।
और टी20 वर्ल्ड कप में यही टीमों को चैंपियन बनाता है—
बड़े नाम नहीं, सही बैकअप।















