Italy – इटली के किसी क्रिकेटर के मुंह से यह सुनना आज भी चौंकाता है। लेकिन जब सामने जसप्रीत सिंह हों, तो यह वाक्य सिर्फ भाषा नहीं, एक पूरी यात्रा की कहानी बन जाता है। 10 साल की उम्र में पंजाब के फगवाड़ा से इटली के बर्गमो पहुंचे जसप्रीत ने न तो अपनी मिट्टी छोड़ी, न अपनी भाषा—और न ही क्रिकेट का सपना।
आज वही जसप्रीत सिंह इटली को टी20 वर्ल्ड कप 2026 तक ले आए हैं। यह कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, प्रवास, संघर्ष और पहचान बचाए रखने की है।
फगवाड़ा से बर्गमो नई ज़िंदगी नए इम्तिहान
22 साल पहले जब जसप्रीत अपने माता-पिता तीरथ सिंह और जसवीर कौर के साथ इटली पहुंचे, तो हालात आसान नहीं थे। नया देश, नई भाषा, और बिल्कुल अलग संस्कृति। उनके माता-पिता को फैक्ट्री में मजदूरी करनी पड़ी, और घर की जिम्मेदारियां जल्दी ही जसप्रीत के कंधों पर भी आ गईं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल कुछ और था—क्रिकेट कहां खेलेगा?
जसप्रीत खुद मानते हैं कि इटली पहुंचते ही उन्हें यह एहसास हो गया था कि यहां क्रिकेट उनके बचपन वाले रूप में मौजूद ही नहीं है। न टर्फ विकेट, न बड़े मैदान, न वो माहौल जो उन्होंने पंजाब में देखा था।
इटली में क्रिकेट नाम मात्र का इंफ्रास्ट्रक्चर
इटली में क्रिकेट खेलना अपने आप में संघर्ष था। जसप्रीत बर्गमो क्रिकेट क्लब से जुड़े, लेकिन सुविधाएं बेहद सीमित थीं। उसी दौरान उन्होंने अपने पिता के साथ काम बंटाने के लिए दो साल का इलेक्ट्रीशियन कोर्स भी पूरा किया।
दिन काम, शाम क्रिकेट—और बीच में सपनों को जिंदा रखने की जिद।
यहां क्रिकेट जुनून था, पेशा नहीं। और शायद यही बात जसप्रीत को बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
गुरुद्वारा, इंग्लैंड और Uber की ड्राइव
जसप्रीत की कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ स्थानीय गुरुद्वारे से आता है। वहीं उन्हें भारतीय प्रवासियों ने सलाह दी—अगर सही क्रिकेट खेलना है, तो इंग्लैंड जाओ।
और जसप्रीत चले गए बर्मिंघम।
वहां टर्फ विकेट थे, असली मुकाबले थे, लेकिन खर्च भी थे। इन्हें संभालने के लिए जसप्रीत ने Uber ड्राइवर के तौर पर काम किया। समय की आज़ादी थी, और क्रिकेट खेलने का मौका भी।
बर्मिंघम एंड डिस्ट्रिक्ट प्रीमियर लीग में खेलते हुए उन्होंने खुद को एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में स्थापित किया। क्रिकेट और रोज़गार—दोनों साथ चलते रहे।
इटली के लिए डेब्यू और पहचान
मेहनत रंग लाई। 2019 में जसप्रीत सिंह ने नॉर्वे के खिलाफ इटली के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि उस बच्चे की जीत थी जो फगवाड़ा की गलियों में टेनिस बॉल से खेला करता था।
वर्ल्ड कप का सपना: टूटा भी, फिर बना भी
इटली 2024 टी20 वर्ल्ड कप के बेहद करीब पहुंच गया था। लेकिन आयरलैंड के खिलाफ करीबी हार ने सपना तोड़ दिया। उस हार ने टीम को झकझोर दिया, लेकिन तोड़ा नहीं।
अगले तीन साल इटली की टीम ने लगातार मेहनत की। नतीजा—जून 2025 में यूरोपीय रीजनल क्वालीफायर में टॉप करते हुए टी20 वर्ल्ड कप 2026 का टिकट।
जसप्रीत के शब्दों में गर्व साफ झलकता है। यह सिर्फ क्वालीफिकेशन नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या का फल था।
हम सिर्फ खेलने नहीं, मुकाबला करने आए हैं
जसप्रीत की बातों में एक आत्मविश्वास है, जो अक्सर एसोसिएट टीमों में कम दिखता है। वह साफ कहते हैं—इटली सिर्फ भाग लेने नहीं आई है।
यह बयान दिखाता है कि एसोसिएट क्रिकेट की सोच बदल रही है। अब यह सिर्फ अनुभव नहीं, प्रतिस्पर्धा की बात है।
भारत आना: भावनाओं और सुविधाओं का संगम
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारत आना जसप्रीत के लिए दोहरी खुशी है। एक तरफ मातृभूमि, दूसरी तरफ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट सुविधाएं।
चेपॉक में अभ्यास, ईडन गार्डन्स, वानखेड़े—ये वो मैदान हैं जिन्हें जसप्रीत ने टीवी पर देखा था। कपिल देव से लेकर विराट कोहली तक, जिन दिग्गजों को देखकर उन्होंने क्रिकेट सीखा, उन्हीं मैदानों पर आज वह खुद खेलने जा रहे हैं।
प्रवासी क्रिकेटर की पहचान
जसप्रीत सिंह सिर्फ इटली के खिलाड़ी नहीं हैं। वह उस पीढ़ी का चेहरा हैं, जो विदेश में बसकर भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।
हिंदी में इंटरव्यू देना, पंजाब को याद करना, और भारतीय मैदानों में खेलने का गर्व—यह सब उनकी पहचान का हिस्सा है।















