Jitesh Sharma – टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका होता, लेकिन भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा के लिए यह निराशा जल्द ही एक बड़ी निजी त्रासदी के सामने छोटी लगने लगी।
टीम चयन से बाहर होने के कुछ ही समय बाद उनके पिता मोहन शर्मा का 1 फरवरी को संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। जितेश ने कहा कि उस मुश्किल समय में अपने पिता के साथ बिताए आखिरी सात दिन उनके लिए किसी भी क्रिकेट टूर्नामेंट से ज्यादा अहम थे।
वर्ल्ड कप टीम से बाहर होने पर हुई थी निराशा
जितेश शर्मा ने स्वीकार किया कि जब उन्हें टी20 वर्ल्ड कप 2026 की भारतीय टीम में जगह नहीं मिलने की खबर मिली तो वह निराश हुए थे।
उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा:
“जब मुझे पता चला कि मेरा चयन नहीं हुआ है तो मुझे थोड़ा दुख हुआ। मैं भी इंसान हूं, मुझे बुरा लग सकता है।”
लेकिन समय के साथ यह निराशा कम होती चली गई, क्योंकि उनके जीवन में उससे भी बड़ी चुनौती सामने आ गई।
पिता की बीमारी ने बदल दी प्राथमिकताएं
टीम से बाहर होने के कुछ ही समय बाद जितेश के पिता बीमार पड़ गए। 1 फरवरी को उनका निधन हो गया। जितेश ने बताया कि वह अपने पिता के साथ आखिरी सात दिन तक रहे।
परिवार से जुड़ा अहम पल
| घटना | तारीख |
|---|---|
| पिता बीमार पड़े | जनवरी अंत |
| निधन | 1 फरवरी |
| साथ बिताया समय | 7 दिन |
जितेश ने कहा:
“मेरे पिता को वर्ल्ड कप से ज्यादा मेरी जरूरत थी। इसलिए मुझे कोई अफसोस नहीं है कि मैं टीम में नहीं था।”
घर पर बैठकर देखा वर्ल्ड कप
हालांकि वह टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन उन्होंने घर से ही टूर्नामेंट देखा और भारतीय टीम की सफलता पर खुशी जताई।
उन्होंने कहा कि टीवी पर बैठकर वर्ल्ड कप देखना एक अलग अनुभव था और वह टीम के खिलाड़ियों के लिए बेहद खुश थे।
सबसे बड़े बेटे की जिम्मेदारी
पिता के निधन के बाद जितेश शर्मा पर परिवार की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अब एक बड़े बेटे के रूप में उन्हें कई फैसले लेने पड़ते हैं।
परिवार की जिम्मेदारियां
| भूमिका | जिम्मेदारी |
|---|---|
| मां | देखभाल |
| भाई | मार्गदर्शन |
| परिवार | फैसले लेना |
उन्होंने कहा:
“जब आप अपने पिता को खो देते हैं तो कुछ समय बाद आपको एहसास होता है कि अब परिवार में फैसले लेने की जिम्मेदारी आपकी है।”
दुख के साथ जीना सीखा
जितेश ने कहा कि उन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाते हुए इस दुख के साथ जीना सीख लिया है। अभ्यास के दौरान भी उन्हें अपने पिता की याद आती है, लेकिन वही याद उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा:
“मेरे पिता मेरी जिंदगी के हीरो थे। अगर वह आज होते तो कहते कि जाओ और अभ्यास करो, मेरी चिंता मत करो।”
रिंकू सिंह से भी जोड़ा उदाहरण
जितेश ने टीम के साथी रिंकू सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि निजी मुश्किलों के बाद मैदान पर लौटना आसान नहीं होता।
उनका मानना है कि ऐसे अनुभव खिलाड़ी को मानसिक रूप से और मजबूत बनाते हैं।
विकेटकीपर की जगह पर दिलचस्प राय
टीम में संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे विकेटकीपर बल्लेबाजों की मौजूदगी पर जितेश ने अलग नजरिया रखा।
उन्होंने कहा:
“क्यों नहीं ऐसा हो सकता कि प्लेइंग इलेवन में दो विकेटकीपर हों और तीसरा खिलाड़ी फिनिशर की भूमिका निभाए?”
विराट कोहली से मिली प्रेरणा
जितेश ने यह भी बताया कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु में खेलने के दौरान विराट कोहली को करीब से देखकर उन्हें काफी प्रेरणा मिली।
उन्होंने कहा कि कोहली का जुनून और समर्पण अद्भुत है और उस स्तर की ऊर्जा बनाए रखना आसान नहीं होता।
जितेश शर्मा की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं बल्कि जीवन के संघर्ष की भी कहानी है। वर्ल्ड कप टीम से बाहर होने की निराशा के बीच उन्होंने अपने पिता को खो दिया, लेकिन उसी दुख ने उन्हें जिम्मेदार और मजबूत इंसान बनने की प्रेरणा दी। उनके लिए अब क्रिकेट सिर्फ करियर नहीं बल्कि अपने पिता के सपनों को आगे बढ़ाने का जरिया बन चुका है।















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