TEST : 35 की उम्र में जो रूट बनाम सचिन तेंदुलकर – क्या टूटेगा टेस्ट रनों का रिकॉर्ड

Atul Kumar
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TEST – 35वां जन्मदिन और साथ में एक ऐसी बहस, जो अपने आप शुरू हो जाती है। मंगलवार, 30 दिसंबर को जो रूट जैसे ही 35 साल के हुए, क्रिकेट की दुनिया में एक सवाल फिर हवा में तैरने लगा—क्या यह खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के टेस्ट रनों का रिकॉर्ड तोड़ सकता है? कुछ साल पहले तक यह सवाल कल्पना लगता था, लेकिन आज… आंकड़े खुद बात कर रहे हैं।

टेस्ट क्रिकेट में रूट जिस स्थिरता, भूख और फोकस के साथ खेल रहे हैं, उसने उन्हें सिर्फ इस पीढ़ी का नहीं, बल्कि ऑल-टाइम ग्रेट्स की बातचीत में ला खड़ा किया है। और जब तुलना सचिन तेंदुलकर से हो, तो मामला खुद-ब-खुद ऐतिहासिक हो जाता है।

35 की उम्र में रूट बनाम सचिन: आंकड़ों की सीधी टक्कर

अगर भावनाओं को एक पल के लिए अलग रख दें और सिर्फ नंबर देखें, तो तस्वीर दिलचस्प हो जाती है। 35 साल की उम्र तक दोनों खिलाड़ी अपने-अपने करियर के अलग-अलग मुकाम पर थे।

खिलाड़ीटेस्ट मैचरनऔसतशतकअर्धशतक
सचिन तेंदुलकर (35 वर्ष)14711,78255.313949
जो रूट (35 वर्ष)16213,77750.834066

यहां साफ दिखता है कि—

  • रूट ने ज्यादा टेस्ट खेले हैं
  • ज्यादा रन बनाए हैं
  • ज्यादा शतक और अर्धशतक लगाए हैं

बस एक चीज़ है, जहां सचिन आगे हैं—औसत। और यही फर्क दोनों के करियर के संदर्भ को थोड़ा अलग बनाता है।

सचिन का रिकॉर्ड: Everest जिसे छूना आसान नहीं

सचिन तेंदुलकर का टेस्ट रिकॉर्ड सिर्फ बड़ा नहीं, ऐतिहासिक है।

  • टेस्ट मैच: 200
  • कुल रन: 15,921
  • टेस्ट शतक: 51

यह रिकॉर्ड सिर्फ लंबी उम्र का नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग दशकों में रन बनाने की कहानी है। सचिन ने 90s, 2000s और 2010s—तीनों दौर में टेस्ट क्रिकेट को परिभाषित किया।

जो रूट कितने करीब हैं?

अब सीधे गणित पर आते हैं।

  • सचिन से पीछे: 2144 रन
  • रूट की मौजूदा उम्र: 35 साल
  • मौजूदा टेस्ट शतक: 40

अगर रूट अगले 4–5 साल तक टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं—यानी 39–40 की उम्र तक—तो उन्हें हर साल औसतन 450–500 रन की जरूरत होगी। मौजूदा फॉर्म देखें, तो यह असंभव नहीं लगता।

खासतौर पर इसलिए क्योंकि—

  • रूट ने टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता दी है
  • फ्रेंचाइजी शेड्यूल से खुद को काफी हद तक अलग रखा है
  • इंग्लैंड की टीम लगातार टेस्ट खेलती है

औसत बनाम निरंतरता: असली फर्क यहीं है

सचिन और रूट की तुलना में एक बड़ा फर्क है—करियर का ग्राफ।

  • सचिन का करियर लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा
  • रूट का करियर ज्यादा स्थिर और “प्लैटू” वाला दिखता है

रूट का औसत 50 से ऊपर है, जो किसी भी युग में एलिट माना जाता है। और दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने—

  • कप्तानी के दबाव में
  • अलग-अलग पोजिशन पर
  • और अलग-अलग महाद्वीपों में

लगातार रन बनाए हैं।

2025: रूट के करियर का एक और मजबूत साल

यह बहस यूं ही नहीं उठी है। 2025 जो रूट के लिए शानदार रहा है।

  • वनडे क्रिकेट में: दुनिया में सबसे ज्यादा रन
  • टेस्ट क्रिकेट में: इस साल तीसरे सबसे ज्यादा रन
    • शुभमन गिल और केएल राहुल के बाद

यानी तीनों फॉर्मेट नहीं, बल्कि चुने हुए फॉर्मेट में क्वालिटी ओवर क्वांटिटी। यही अप्रोच रूट को लंबी रेस का घोड़ा बनाती है।

क्या रूट सचिन जैसा “ऑरा” बना सकते हैं?

यह सवाल आंकड़ों से आगे जाता है। सचिन तेंदुलकर सिर्फ रन मशीन नहीं थे—वह एक युग थे। भारत में क्रिकेट का मतलब सचिन हुआ करता था।

रूट का प्रभाव अलग है—

  • शांत
  • तकनीकी
  • टीम-ओरिएंटेड

वह अकेले भी रन बनाते हैं, लेकिन सिस्टम का हिस्सा बनकर। शायद यही वजह है कि उनकी महानता थोड़ी शांत लगती है, लेकिन कम नहीं।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

कई क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि—

  • अगर रूट 40 की उम्र तक खेलते हैं
  • और फिटनेस बनी रहती है
  • तो सचिन का रिकॉर्ड खतरे में आ सकता है

लेकिन उतनी ही संख्या में लोग यह भी कहते हैं कि—

  • टेस्ट क्रिकेट का भविष्य अनिश्चित है
  • शेड्यूल बदल रहे हैं
  • और चोटें किसी को भी रोक सकती हैं

क्रिकेट, आखिरकार, अनिश्चितताओं का खेल है।

आंकड़े इजाजत देते हैं, वक्त फैसला करेगा

35 की उम्र में जो रूट आज वहां खड़े हैं, जहां बहुत कम बल्लेबाज पहुंच पाए हैं। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड अब भी पहाड़ जैसा है, लेकिन रूट उस पहाड़ की ढलान तक पहुंच चुके हैं—यह अपने आप में बड़ी बात है।

क्या वह चोटी तक पहुंचेंगे?
यह आने वाले साल बताएंगे।

लेकिन एक बात तय है—
जो रूट अब सिर्फ अपने दौर के महान नहीं,
टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का अहम अध्याय बन चुके हैं।

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