ODI – राजकोट की गर्म दोपहर, भरा हुआ स्टेडियम और सामने न्यूज़ीलैंड। भारत–न्यूज़ीलैंड वनडे सीरीज़ का दूसरा मुकाबला सिर्फ 1-0 की बढ़त बढ़ाने की कहानी नहीं है। 14 जनवरी को दोपहर 1:30 बजे जब पहला गेंद फेंका जाएगा, तब मैदान के भीतर एक और जंग चल रही होगी—विराट कोहली बनाम श्रेयस अय्यर।
यह जंग टीम के भीतर है, लेकिन दांव बहुत बड़ा है: मौजूदा दौर का सबसे प्रभावी वनडे बल्लेबाज़ कौन?
20 पारियों की रेस: अय्यर आगे, कोहली सांस पर
आंकड़े कभी-कभी आंखें खोल देते हैं। पिछली 20 वनडे पारियों को देखें तो कहानी चौंकाने वाली है।
- श्रेयस अय्यर – 1030 रन
- विराट कोहली – 1024 रन
- रोहित शर्मा – 927 रन
सिर्फ 6 रन का अंतर। यानी राजकोट में एक अच्छी टाइमिंग वाली ड्राइव या एक मिस-फील्ड… और तस्वीर पलट सकती है। कोहली को हम सालों से रन मशीन कहते आए हैं, लेकिन इस रेस में फिलहाल अय्यर नाक आगे किए हुए हैं।
राजकोट: अय्यर के लिए रिकॉर्ड वाला मैदान?
श्रेयस अय्यर के लिए यह मैच सिर्फ फॉर्म का नहीं, इतिहास का भी है।
वनडे क्रिकेट में उनके 3000 रन पूरे होने में अब सिर्फ 34 रन बाकी हैं।
अगर अय्यर यह आंकड़ा बुधवार को छू लेते हैं, तो वह बन जाएंगे:
- भारत के लिए सबसे तेज 3000 वनडे रन बनाने वाले बल्लेबाज़
- पारियों के हिसाब से
रिकॉर्ड्स की स्थिति साफ है:
| खिलाड़ी | पारियां |
|---|---|
| श्रेयस अय्यर | 69 (संभावित) |
| शिखर धवन | 72 |
| विराट कोहली | 75 |
यानी अय्यर के पास मौका है कि वह धवन और कोहली—दोनों को पीछे छोड़ दें। राजकोट इससे बेहतर मंच शायद नहीं हो सकता।
कोहली शांत हैं, लेकिन खतरनाक
विराट कोहली की सबसे बड़ी खूबी यही है—जब लोग आंकड़ों से तुलना करने लगते हैं, वह बिना शोर किए जवाब देने की तैयारी कर रहे होते हैं।
पहले वनडे में 93 रन, फिर से बड़ा चेज़, फिर से मैच कंट्रोल। कोहली इस समय उस मोड में हैं जहां वह रन नहीं गिनते, मैच पढ़ते हैं।
राजकोट की पिच अगर फ्लैट रही—तो कोहली के लिए यह “लंबी इनिंग” वाला दिन हो सकता है।
‘न्यू बिग थ्री’ में अय्यर की एंट्री पक्की
कुछ साल पहले तक भारतीय वनडे क्रिकेट का मतलब था—रोहित और विराट।
अब तस्वीर बदल चुकी है।
पिछले दो ICC वनडे टूर्नामेंट्स के आंकड़े देखिए:
- विराट कोहली – 918 रन
- रोहित शर्मा – 777 रन
- श्रेयस अय्यर – 773 रन
यह कोई तुक्का नहीं है। नंबर 4 पर अय्यर अब सिर्फ स्लॉट फिल नहीं कर रहे, बल्कि टीम को संभाल रहे हैं—स्पिन के खिलाफ, प्रेशर में, बड़े मैचों में।
राजकोट की पिच: किसके पक्ष में?
राजकोट आमतौर पर:
- सही बाउंस
- तेज़ आउटफील्ड
- और बल्लेबाज़ों के लिए दोस्ताना
यहां सवाल तकनीक का नहीं, टेम्परामेंट का होगा।
- अगर शुरुआती ओवर संभल गए → कोहली भारी पड़ सकते हैं
- अगर मिडिल ओवर्स में स्पिन आई → अय्यर का गेम खुल सकता है
यानी मुकाबला स्किल का नहीं, मौके को पकड़ने का है।
आंतरिक प्रतिस्पर्धा, लेकिन टीम का फायदा
यह जंग अहंकार की नहीं है।
यह वही प्रतिस्पर्धा है जो टीम इंडिया को आगे ले जाती है।
कोहली जानते हैं कि अय्यर दबाव में मैच फिनिश कर सकते हैं।
अय्यर जानते हैं कि कोहली जब टिक जाते हैं, तो विपक्ष टूट जाता है।
और यही वजह है कि यह मुकाबला भारत के लिए डबल विन हो सकता है।
















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