BCCI – विराट कोहली और स्टीव स्मिथ।
एक दौर के दो सबसे बड़े नाम। दो अलग व्यक्तित्व, दो अलग क्रिकेटिंग संस्कृतियां—और 2025 में खड़े होकर जब पीछे देखते हैं, तो फर्क चौंकाता है। एक को सिस्टम ने संभाला, दूसरा सिस्टम से छूट गया। और यही फर्क इस कहानी को साधारण नहीं रहने देता।
क्रिकेट के आधुनिक युग की पहचान बने Fab 4—कोहली, स्मिथ, जो रूट और केन विलियमसन। चारों महान। चारों ने अपने-अपने देश के लिए युग रचा। लेकिन जब करियर ढलान पर आया, तब सिस्टम ने किसे कैसे ट्रीट किया—यहीं असली परीक्षा थी।
स्मिथ पर दाग, फिर भी भरोसा
स्टीव स्मिथ पर लगा था क्रिकेट का सबसे बदनाम दाग—सैंडपेपरगेट।
कप्तानी छीनी गई।
बैन झेला।
इमेज बिखरी।
लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एक बात नहीं भूली—
यह खिलाड़ी खास है।
सज़ा दी गई, लेकिन दरवाज़ा बंद नहीं किया गया। स्मिथ को सिस्टम के भीतर रखा गया। भरोसा टूटने नहीं दिया गया।
और 2025 में वही क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया:
- एशेज के अहम मुकाबले
- बॉक्सिंग डे टेस्ट
- पैट कमिंस की गैरमौजूदगी
और कप्तानी फिर स्टीव स्मिथ के हाथ।
याद रखिए—
यह वही स्मिथ हैं, जिनसे एक वक्त कप्तानी हमेशा के लिए छिन गई थी।
21 टेस्ट, बिना रेगुलर कैप्टन टैग के
रेगुलर कप्तानी से हटाए जाने के बाद भी स्मिथ:
- अलग-अलग दौर में
- 21 टेस्ट मैचों में
- ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी कर चुके हैं
कोई शोर नहीं।
कोई Ego clash नहीं।
बस एक साफ सोच—जब टीम को ज़रूरत हो, अनुभव आगे आएगा।
यही सिस्टम की ताकत होती है।
दूसरी तरफ विराट कोहली
अब भारत की कहानी।
विराट कोहली—
भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान।
विदेशों में जीत।
घर में दबदबा।
टीम को फिजिकली और मेंटली बदलने वाला कप्तान।
और फिर अचानक—
- कप्तानी छोड़ी
- फिर 2025 में
- टेस्ट क्रिकेट से संन्यास
बिना फेयरवेल सीरीज़।
बिना आखिरी लीडरशिप चैप्टर।
सवाल जो आज भी चुभते हैं
कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास क्यों लिया?
- क्या उम्र वजह थी?
- क्या फॉर्म?
- या फिर सिस्टम के साथ मतभेद?
ये जवाब सिर्फ दो जगह हैं—
बीसीसीआई के फाइल्स में
और विराट कोहली के दिल में।
लेकिन घटनाओं का क्रम सवाल खड़े करता है।
रोहित का संन्यास, फिर विराट का फैसला
मई 2025।
पहले रोहित शर्मा टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेते हैं।
कुछ ही दिन बाद—
विराट कोहली भी टेस्ट को अलविदा कह देते हैं।
इतना बड़ा फैसला, इतना अचानक?
क्या विराट कप्तानी में लौटना चाहते थे?
क्रिकेट गलियारों में यही चर्चा रही:
- क्या रोहित के बाद विराट टेस्ट कप्तानी में वापसी चाहते थे?
- क्या बीसीसीआई से इस पर बातचीत हुई थी?
- क्या भरोसा मिला, फिर वापस ले लिया गया?
इन सवालों का कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया।
लेकिन इतना तय है—
विराट उस समय फॉर्म में थे।
- ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शतक
- इंग्लैंड दौरे के लिए तैयारियां
- खुद कह चुके थे—“2–3 शतक का भरोसा है”
फिर ऐसा क्या बदला?
बीसीसीआई से चूक?
यहीं तुलना खड़ी होती है।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने स्मिथ को संभाला।
बीसीसीआई विराट को संभाल नहीं पाई—या संभालना नहीं चाहा?
जब किसी खिलाड़ी का करियर ढलान पर होता है,
तब मैनेजमेंट का रोल सबसे बड़ा होता है।
- संवाद
- सम्मान
- और भरोसा
क्या ये तीनों विराट को मिले?
भारतीय क्रिकेट को क्या नुकसान हुआ?
विराट कोहली का टेस्ट से जाना सिर्फ एक खिलाड़ी का जाना नहीं था।
- एक लीडर गया
- एक मेंटर गया
- ड्रेसिंग रूम की आवाज़ गई
और सबसे बड़ी बात—
एक ट्रांज़िशन बिना ब्रिज के हो गया।
स्मिथ बनाम कोहली: फर्क सिर्फ क्रिकेट का नहीं
यह तुलना रन या औसत की नहीं है।
यह तुलना है सिस्टम की।
| मुद्दा | ऑस्ट्रेलिया | भारत |
|---|---|---|
| सीनियर स्टार | स्मिथ | कोहली |
| विवाद/प्रेशर | बहुत ज्यादा | लगातार |
| सिस्टम का रुख | सपोर्ट | साइलेंस |
| नतीजा | कप्तानी की वापसी | संन्यास |
2025 को कैसे याद किया जाएगा?
जब भी क्रिकेट फैंस 2025 की ओर पीछे मुड़कर देखेंगे—
- रोहित का अचानक जाना
- विराट का चुपचाप संन्यास
- और सवालों से भरा सन्नाटा
यह साल सिर्फ रिकॉर्ड्स के लिए नहीं,
अधूरी कहानियों के लिए याद किया जाएगा।
क्या यह सब टाला जा सकता था?
शायद।
अगर:
- विराट से खुलकर बात होती
- रोल स्पष्ट किया जाता
- अनुभव को बोझ नहीं, ताकत माना जाता
तो शायद टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहना इतना जल्द नहीं होता।
खिलाड़ी नहीं, सिस्टम हारता है
स्टीव स्मिथ और विराट कोहली—
दोनों महान हैं।
दोनों ने अपने देश को शिखर पर पहुंचाया।
लेकिन 2025 ने एक फर्क साफ कर दिया:
- ऑस्ट्रेलिया अपने दिग्गजों को सहेजना जानता है
- भारत अपने दिग्गजों से आगे बढ़ जाना सीख चुका है—भले कीमत चुकानी पड़े
यह कहानी किसी एक खिलाड़ी की नहीं है।
यह कहानी है—सिस्टम के फैसलों की।
और क्रिकेट में, अक्सर वही फैसले सबसे लंबे समय तक याद रहते हैं।















