Test – कोलकाता में उस टेस्ट के खत्म होते ही एक सवाल हर जगह गूंजने लगा था—क्या ईडन गार्डंस की पिच ने मैच को “मार” दिया?
तीन दिन में खेल खत्म, भारत की हार, स्पिनरों का कहर और बल्लेबाज़ों की बेबसी।
आलोचनाएं इतनी तेज़ थीं कि लगा जैसे ईडन की प्रतिष्ठा पर ही सवाल खड़ा हो गया हो। लेकिन अब, एक महीने बाद, ICC ने अपना फैसला सुना दिया है—और वो फैसला कई लोगों को चौंका सकता है।
ICC का फैसला: पिच “संतोषजनक”
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के मैच रेफरी रिची रिचर्डसन ने कोलकाता टेस्ट की पिच को “सैटिस्फैक्टरी” (Satisfactory) यानी संतोषजनक करार दिया है।
यानी तमाम शोर, बहस और आलोचनाओं के बावजूद ICC की नजर में ईडन गार्डंस की पिच ने नियमों का उल्लंघन नहीं किया।
यह फैसला अपने आप में बड़ा है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में ICC पिचों को लेकर काफी सख्त रुख अपनाता रहा है।
तीन दिन, 30 विकेट और स्पिन का राज
कोलकाता टेस्ट में जो हुआ, वो आंकड़ों में भी अजीब लगता है।
- पहले दो दिनों में 26 विकेट गिरे
- स्पिनरों को असाधारण मदद मिली
- तेज़ गेंदबाज़ भी कंट्रोल में दिखे, लेकिन असली खेल टर्न ने बिगाड़ा
दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा इस मैच की चारों पारियों में अकेले ऐसे बल्लेबाज़ रहे, जिन्होंने अर्धशतक लगाया। बाकी बल्लेबाज़—चाहे भारतीय हों या अफ्रीकी—लंबी पारी के लिए जूझते रहे।
भारत को मिला 124 का लक्ष्य… और फिर पतन
मैच की सबसे चौंकाने वाली कहानी चौथी पारी में लिखी गई।
दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी 153 रन पर सिमटी।
भारत को जीत के लिए चाहिए थे सिर्फ 124 रन।
एक समय स्कोर था—
- भारत: 72/5
- जीत के लिए रन: 52
मैच पूरी तरह भारत के हाथ में दिख रहा था।
लेकिन तभी—
- वॉशिंगटन सुंदर आउट हुए
- विकेटों की लाइन लग गई
- कप्तान शुभमन गिल गर्दन में खिंचाव के कारण बल्लेबाज़ी नहीं कर सके
नतीजा—भारत की पूरी टीम 92 रन पर ऑल आउट।
दक्षिण अफ्रीका ने मैच 30 रन से जीत लिया।
पूरा स्कोरकार्ड: कैसे पलटा मैच
| पारी | टीम | स्कोर |
|---|---|---|
| पहली पारी | दक्षिण अफ्रीका | 159 |
| पहली पारी | भारत | 189 |
| दूसरी पारी | दक्षिण अफ्रीका | 153 |
| चौथी पारी | भारत | 92 |
भारत को पहली पारी में 30 रन की बढ़त मिली थी, लेकिन वही बढ़त चौथी पारी में दबाव बन गई।
आलोचना क्यों हुई इतनी ज़्यादा?
मैच के तुरंत बाद—
- पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
- पिच क्यूरेटर
- टीवी एक्सपर्ट
सबने एक सुर में कहा कि पिच “जरूरत से ज्यादा टर्न” दे रही थी। कुछ ने तो इसे टेस्ट क्रिकेट के लिए “अनुचित” तक कह दिया।
सोशल मीडिया पर ईडन गार्डंस को लेकर सवाल उठे—
क्या भारत घर पर जरूरत से ज्यादा एक्सपेरिमेंट कर रहा है?
फिर ICC ने हरी झंडी क्यों दी?
यहीं पर ICC का नजरिया अहम हो जाता है।
ICC पिच का आकलन इस आधार पर करता है कि—
- क्या दोनों टीमों को बराबर मौका मिला?
- क्या खेल स्किल से तय हुआ या सिर्फ पिच से?
- क्या असामान्य बाउंस या खतरनाक हालात थे?
ICC के मुताबिक, कोलकाता टेस्ट में—
- दोनों टीमों के बल्लेबाज़ संघर्ष करते दिखे
- दोनों टीमों के गेंदबाज़ों को मदद मिली
- कोई खतरनाक उछाल या असमान बर्ताव नहीं था
इसलिए पिच को “संतोषजनक” माना गया।
ICC की पिच गाइडलाइंस इसका स्पष्ट उल्लेख करती हैं।
हार पिच की वजह से या बल्लेबाज़ी की?
यह सवाल अब भी खुला है।
भारत के पास—
- लक्ष्य छोटा था
- सेट बल्लेबाज़ मौजूद थे
- घरेलू हालात का फायदा था
लेकिन दबाव में शॉट सिलेक्शन, स्पिन को पढ़ने की गलती और लगातार विकेट—इन सबने हार की कहानी लिखी।
कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह मैच पिच से ज्यादा मानसिक लड़ाई में हारा गया।
ईडन गार्डंस की साख पर असर?
ICC के फैसले के बाद एक बात साफ है—
ईडन गार्डंस की पिच को लेकर कोई आधिकारिक चेतावनी या डिमेरिट पॉइंट नहीं दिया गया है।
यानी भविष्य में—
- ईडन पर टेस्ट मैच होते रहेंगे
- BCCI पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा
- और पिच क्यूरेटर की जवाबदेही पर भी फिलहाल सवाल नहीं
यह भारतीय क्रिकेट के लिए राहत की खबर है।
बहस खत्म, सवाल बाकी
कोलकाता टेस्ट इतिहास में दर्ज हो चुका है—
एक ऐसी हार के रूप में, जो भारत के हाथ में थी, लेकिन फिसल गई।
ICC का फैसला साफ कहता है—
पिच नियमों के भीतर थी।
लेकिन भारतीय टीम के लिए यह मैच एक चेतावनी भी था—
घर में भी जीत “गारंटी” नहीं होती, खासकर जब दबाव बढ़ जाए।
ईडन गार्डंस बच गया।
अब सवाल टीम इंडिया से है।
















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