Kohli : कोहली को पूरी तरह रोक नहीं सकते – काइल जैमीसन का बड़ा बयान

Atul Kumar
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Kohli – विराट कोहली के सामने खड़े होकर गेंद डालना कैसा लगता है—यह सवाल अगर किसी गेंदबाज़ से पूछा जाए, तो जवाब अक्सर एक जैसे होते हैं। दबाव। चुनौती। और ज़रा-सी चूक पर सज़ा। लेकिन जब यही बात काइल जैमीसन जैसे लंबे, तेज़ और अनुभवी गेंदबाज़ के मुंह से आती है, तो उसका वजन और बढ़ जाता है।

न्यूजीलैंड के ऑलराउंडर जैमीसन, जो आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ड्रेसिंग रूम में कोहली के साथ समय बिता चुके हैं, मानते हैं कि इस भारतीय दिग्गज को काबू में करना किसी भी गेंदबाज़ के लिए आसान नहीं—चाहे वह कितनी भी तैयारी क्यों न कर ले।

93 पर आउट, लेकिन दबदबा पूरा

रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में विराट कोहली एक बार फिर इतिहास रचने के बेहद करीब थे।
रिकॉर्ड 54वां वनडे शतक बस सात रन दूर था।

लेकिन इस बार बाज़ी काइल जैमीसन के नाम रही। उन्होंने कोहली को 93 रन पर आउट किया। विकेट जैमीसन के खाते में गया, लेकिन मैच?
भारत ने चार विकेट से जीत लिया।

“उनके खिलाफ खेलने के लिए भी बेस्ट देना पड़ता है”

मैच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जैमीसन ने कोहली को लेकर बड़ी ईमानदारी से बात रखी।

उन्होंने कहा,
“यह कहना मुश्किल है कि यह उनका सर्वश्रेष्ठ फॉर्म है या नहीं। वह लंबे समय से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। जब भी उनसे आमना-सामना होता है, तो आपको लगता है कि उनसे मुकाबला करने के लिए आपको भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।”

यह कोई औपचारिक बयान नहीं था।
यह उस गेंदबाज़ की स्वीकारोक्ति थी, जो जानता है कि कोहली से आधा-अधूरा प्लान लेकर नहीं निपटा जा सकता।

रणनीति बनाओ, फिर भी पूरी पकड़ नहीं

जैमीसन ने साफ कहा कि कोहली जैसे बल्लेबाज़ों के लिए खास रणनीति बनानी पड़ती है।
लेकिन उन्होंने एक बात और जोड़ दी—जो शायद सबसे अहम है।

“आप कोहली जैसे दिग्गज बल्लेबाज़ों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा सकते। वह थोड़ा बहुत अपना दबदबा बनाए ही रखते हैं।”

यही वह लाइन है, जो विराट कोहली को बाकी बल्लेबाज़ों से अलग करती है।
गेंदबाज़ चाहे विकेट ले ले, लेकिन मानसिक बढ़त अक्सर कोहली के पास ही रहती है।

ड्रेसिंग रूम का अनुभव: जैमीसन की खास नज़र

काइल जैमीसन सिर्फ प्रतिद्वंद्वी नहीं रहे हैं।
आईपीएल में आरसीबी के लिए खेलते हुए उन्होंने कोहली के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर किया है।

यही वजह है कि उनकी बातों में सिर्फ बाहर से देखा गया क्रिकेट नहीं, बल्कि अंदर का अनुभव भी झलकता है।

“वह एक अलग ही स्तर के खिलाड़ी हैं और अधिकतर समय अच्छी लय में नजर आते हैं। उन्हें खेलते हुए देखना हमेशा अच्छा लगता है।”

यह सम्मान उसी जगह से आता है, जहां असली क्रिकेटर क्रिकेटर को पहचानता है।

जैमीसन का सफर: ऊंचाई से ठहराव तक

जैमीसन का करियर भी सीधा नहीं रहा।
आईपीएल में बड़ी रकम।
फिर पीठ की गंभीर चोट।
और लंबा ब्रेक।

इन उतार-चढ़ावों ने उनका नजरिया बदल दिया है।

उन्होंने कहा,
“हर खिलाड़ी के करियर में उतार-चढ़ाव आते हैं। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे करियर की शुरुआत में ही आईपीएल खेलने का मौका मिला।”

“अब मैदान पर होना भी एक तोहफा लगता है”

जैमीसन की सबसे दिल छू लेने वाली बात शायद यही थी।

“मेरा नजरिया अब बदल गया है। अब मैं दौरे पर जाने, क्रिकेट खेलने और मैदान पर मौजूद रहने के लिए पहले से ज्यादा आभारी महसूस करता हूं।”

यह वही सोच है, जो अक्सर चोट के बाद लौटने वाले खिलाड़ियों में दिखती है—
जहां हर मैच, हर ओवर, एक बोनस जैसा लगता है।

कोहली क्यों अब भी गेंदबाज़ों के लिए पहेली हैं?

35+ की उम्र में भी विराट कोहली:

  • गेंद को देर तक देखते हैं
  • गलत गेंद का इंतज़ार करते हैं
  • और स्ट्राइक रोटेशन से दबाव तोड़ते हैं

यही वजह है कि जैमीसन जैसे गेंदबाज़ भी यह तय नहीं कर पाते कि यह कोहली का “बेस्ट फेज़” है या नहीं—क्योंकि उनका बेस्ट जैसे कभी खत्म ही नहीं होता।

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