List A : 177 गेंदों में दोहरा शतक -शान मसूद ने तोड़ा 30 साल पुराना रिकॉर्ड

Atul Kumar
Published On:
List A

List A – 177 गेंदें। दोहरा शतक। और एक ऐसा रिकॉर्ड, जो पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट इतिहास में तीन दशक से जड़ा हुआ था—अब टूट चुका है। शान मसूद ने रविवार को वो कर दिखाया, जो सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं था, बल्कि इरादों और टाइमिंग का बयान था।

पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में किसी पाकिस्तानी बल्लेबाज़ का सबसे तेज़ दोहरा शतक जड़ दिया और सीधे-सीधे इंज़माम-उल-हक के 30 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

यह पारी सिर्फ रनों की नहीं थी। यह एक कप्तान का जवाब थी—मैदान पर, बल्ले से।

रिकॉर्ड जो टूटा, इतिहास जो बदला

यह कारनामा प्रेसिडेंट्स कप विभागीय टूर्नामेंट के पहले दिन हुआ। शान मसूद सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइंस लिमिटेड (SNGPL) की ओर से खेल रहे थे, सामने थी सहार एसोसिएट्स की टीम। दिन की शुरुआत से ही मसूद का इरादा साफ दिख रहा था—डिफेंस नहीं, डोमिनेशन।

  • 177 गेंदों में दोहरा शतक
  • दिन का खेल खत्म होने तक 185 गेंदों पर 212 रन नाबाद

यानी रिकॉर्ड टूट चुका था, लेकिन मसूद रुके नहीं।

इंज़माम का रिकॉर्ड—अब इतिहास

इससे पहले यह उपलब्धि पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज़ और पूर्व कप्तान इंज़माम-उल-हक के नाम थी।
साल था 1992, मौका था इंग्लैंड का दौरा। इंज़माम ने तब 188 गेंदों में दोहरा शतक जड़ा था।

तीन दशक तक वह रिकॉर्ड अडिग रहा। कई बड़े नाम आए, कई आक्रामक पारियां देखी गईं—लेकिन यह आंकड़ा नहीं टूटा।
अब शान मसूद ने उसे 11 गेंद पहले पीछे छोड़ दिया।

पाकिस्तान बनाम दुनिया: डबल सेंचुरी की रफ्तार

हालांकि पाकिस्तान की धरती पर सबसे तेज़ दोहरा शतक का ओवरऑल रिकॉर्ड अभी भी भारत के नाम है।

वीरेंद्र सहवाग,
लाहौर टेस्ट, 2006,
182 गेंदों में डबल सेंचुरी।

लेकिन यह रिकॉर्ड टेस्ट क्रिकेट का है। शान मसूद का कारनामा प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पाकिस्तान के संदर्भ में अलग ही अहमियत रखता है।

सबसे तेज़ दोहरे शतक – एक नज़र में

बल्लेबाज़गेंदेंफॉर्मेटसालस्थान
शान मसूद177FC (Pakistan)2025प्रेसिडेंट्स कप
इंज़माम-उल-हक188FC1992इंग्लैंड
वीरेंद्र सहवाग182टेस्ट2006लाहौर

पारी कैसी थी? आक्रामक, लेकिन बेतरतीब नहीं

यह कोई अंधाधुंध हिटिंग शो नहीं था। मसूद की पारी में क्लास भी थी और कंट्रोल भी।

  • स्ट्राइक रोटेशन लगातार
  • ढीली गेंदों पर सज़ा
  • स्पिन और पेस—दोनों के खिलाफ बराबर का आत्मविश्वास

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मसूद ने अपनी पारी में कोई अनावश्यक जोखिम नहीं लिया। तेज़ रन बने, लेकिन क्रिकेटिंग शॉट्स से। यही वजह है कि यह पारी “रिकॉर्ड पारी” से ज़्यादा “कप्तानी पारी” लगी।

36 की उम्र, लेकिन भूख अभी बाकी

शान मसूद की उम्र 36 साल है। इस उम्र में खिलाड़ी आमतौर पर करियर के आखिरी फेज़ की बातें करता है। लेकिन मसूद फिलहाल किसी और ही मोड में हैं।

यही वो खिलाड़ी हैं जिन्होंने हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की एक बड़ी पेशकश ठुकरा दी।

PCB का ऑफर और मसूद का फैसला

PCB ने मसूद को
इंटरनेशनल क्रिकेट एंड प्लेयर्स रिलेशंस का
फुल-टाइम डायरेक्टर बनने की पेशकश की थी।

मतलब साफ था—

  • क्रिकेट से संन्यास
  • फुल-टाइम प्रशासनिक भूमिका

लेकिन मसूद ने साफ “ना” कह दिया।

क्यों?

क्योंकि उनका फोकस अभी—

  • अपने करियर पर
  • और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप पर

PCB ने उन्हें इसी साल इस विभाग में कंसल्टेंट नियुक्त किया था, लेकिन बोर्ड चाहता था कि वह मैदान छोड़कर पूरी तरह डेस्क जॉब में आ जाएं। मसूद ने वो रास्ता नहीं चुना।

कप्तान का मैसेज—अब नहीं रुका जाएगा

यह दोहरा शतक उस फैसले को और मजबूत करता है।
यह पारी कहती है—

  • “मैं अभी खत्म नहीं हुआ हूं”
  • “मैं सिर्फ कप्तान नहीं, बल्लेबाज़ भी हूं”
  • “और जब मौका मिलेगा, मैं लीड करूंगा”

पाकिस्तान टेस्ट टीम इस वक्त ट्रांज़िशन से गुजर रही है। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में निरंतरता की तलाश है। ऐसे में कप्तान का इस तरह रन बनाना सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, ड्रेसिंग रूम के लिए संकेत है।

घरेलू क्रिकेट की अहमियत—एक बार फिर साबित

प्रेसिडेंट्स कप जैसे विभागीय टूर्नामेंट अक्सर सुर्खियों से बाहर रहते हैं। लेकिन यहीं से—

  • फॉर्म बनती है
  • कप्तान खुद को तैयार करता है
  • और इंटरनेशनल टीम को बेंच स्ट्रेंथ मिलती है

शान मसूद की यह पारी उसी सिस्टम की वैल्यू दिखाती है, जिसे अक्सर कम आंका जाता है।

रिकॉर्ड से ज़्यादा, यह बयान था

177 गेंदों का दोहरा शतक सिर्फ एक नंबर नहीं है।
यह—

  • एक कप्तान का आत्मविश्वास
  • एक बल्लेबाज़ की भूख
  • और एक करियर की दिशा

तीनों का मिलाजुला रूप है।

शान मसूद ने इंज़माम का रिकॉर्ड तोड़ा—यह हेडलाइन है।
लेकिन उससे बड़ी बात यह है कि उन्होंने साफ कर दिया—

वह अभी प्रशासनिक कुर्सी के लिए नहीं, क्रीज़ पर खड़े रहने के लिए बने हैं।

और जब तक बल्ला ऐसे बोलता रहेगा,
उनकी बात भी सुनी जाती रहेगी।

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