MCA : MCA चुनाव पर बंबई हाईकोर्ट की रोक – 400 नए सदस्यों पर सवाल

Atul Kumar
Published On:
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MCA – मुंबई के क्रिकेट गलियारों में मंगलवार सुबह अचानक सन्नाटा छा गया। जिस चुनाव को महज़ औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा था, उस पर बंबई हाईकोर्ट ने सीधे ब्रेक लगा दिया।

महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (MCA) की शीर्ष परिषद के चुनाव पर रोक लगाते हुए अदालत ने न सिर्फ प्रक्रिया पर सवाल उठाए, बल्कि 400 नए सदस्यों को जोड़ने के तरीके को भी संदिग्ध करार दिया।

और इस फैसले ने MCA की राजनीति को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।

“सब कुछ आनन-फानन में हुआ” – हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि जिस तरह से नए सदस्यों को जोड़ा गया, उससे प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि पूरी प्रक्रिया जल्दबाज़ी में और किसी खास मकसद से की गई।

पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड देखकर यह नहीं लगता कि
यह एक सामान्य प्रशासनिक कदम था।

यानी अदालत को शक है कि चुनाव से ठीक पहले किए गए ये बदलाव संयोग नहीं हैं।

चुनाव पर रोक, याचिका में गंभीर आरोप

यह पूरा मामला एक याचिका के जरिए कोर्ट पहुंचा, जिसमें आरोप लगाया गया कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया है। खासतौर पर 20 दिसंबर 2025 को जारी की गई मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए गए।

याचिका में कहा गया कि—

  • नए सदस्यों को जोड़ने में भारी पक्षपात हुआ
  • चुनावी संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की गई
  • MCA को “निजी संगठन” की तरह चलाने का प्रयास हुआ

यही नहीं, अदालत ने इन आरोपों को हल्के में लेने से इनकार कर दिया।

रोहित पवार के रिश्तेदारों के नाम आने से बढ़ा विवाद

मामला तब और संवेदनशील हो गया जब नए जोड़े गए सदस्यों की सूची सामने आई।

इन 400 नए सदस्यों में शामिल हैं—

  • कुंती पवार – निवर्तमान अध्यक्ष और NCP विधायक रोहित पवार की पत्नी
  • सतीश मागर – उनके ससुर
  • रेवती सुले – NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले की बेटी

राजनीति और क्रिकेट का यह घालमेल MCA में नया नहीं है, लेकिन इस बार नाम इतने खुले तौर पर सामने आ गए कि अदालत को दखल देना पड़ा।

केदार जाधव भी याचिकाकर्ताओं में शामिल

इस मामले को और वजन तब मिला जब याचिकाकर्ताओं की सूची में पूर्व भारतीय क्रिकेटर केदार जाधव का नाम सामने आया।

केदार जाधव ने आरोप लगाया कि—

“ज्यादातर नए सदस्यों का क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें सिर्फ इसलिए जोड़ा गया ताकि कुछ लोग MCA को अपने निजी संगठन की तरह चला सकें।”

यह बयान सीधे MCA की साख पर चोट करता है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला

याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्रिकेट संघों के चुनाव और प्रशासन को लेकर जो दिशा-निर्देश तय किए गए हैं, उनका पालन नहीं किया गया।

अदालत का रुख: फिलहाल सब रुकेगा

हाईकोर्ट ने फिलहाल—

  • चुनाव प्रक्रिया पर रोक
  • नए सदस्यों को जोड़ने की वैधता पर सवाल
  • पूरे मामले की विस्तृत सुनवाई तय

कर दी है।

अगली सुनवाई की तारीख 4 फरवरी तय की गई है। तब तक MCA में चुनावी गतिविधियों पर ब्रेक लगा रहेगा।

MCA की साख पर फिर सवाल

महाराष्ट्र क्रिकेट संघ लंबे समय से विवादों से घिरा रहा है—
कभी स्टेडियम प्रोजेक्ट, कभी टिकटिंग, कभी राजनीति।

लेकिन चुनाव से ठीक पहले 400 नए सदस्य जोड़ना और उनमें नेताओं के रिश्तेदारों का होना—इसने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे क्या?

अब सबकी नजरें 4 फरवरी पर टिकी हैं।

  • क्या नए सदस्य हटाए जाएंगे?
  • क्या चुनाव दोबारा तय होंगे?
  • क्या MCA की कार्यप्रणाली पर कोई बड़ा निर्देश आएगा?

इन सवालों के जवाब आने वाले हफ्तों में मिलेंगे।

क्रिकेट से ज्यादा सत्ता की लड़ाई?

यह मामला सिर्फ एक चुनावी विवाद नहीं है।
यह उस पुराने सवाल को फिर सामने लाता है—

क्या भारतीय क्रिकेट प्रशासन में क्रिकेट वाकई प्राथमिकता है, या सत्ता?

बंबई हाईकोर्ट का यह फैसला फिलहाल एक साफ संदेश देता है—
अगर प्रक्रिया गड़बड़ है, तो चुनाव भी नहीं होंगे।

और MCA के लिए यह सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं, विश्वसनीयता की परीक्षा भी है।

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