Shami – लंबे समय तक चुप रहने के बाद मोहम्मद शमी ने आखिरकार वह बात कह दी, जो शायद हर भारतीय क्रिकेट फैन सुन रहा था—और साथ ही वह भी, जो चयनकर्ताओं को सुननी चाहिए। टीम इंडिया से दूर चल रहे शमी ने साफ कर दिया है कि वापसी उनके हाथ में नहीं है, लेकिन मेहनत अब भी पूरी तरह उनके कंट्रोल में है।
2025 की चैंपियंस ट्रॉफी के बाद से शमी ने कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला। चोट, फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन—हर वजह गिनाई गई, लेकिन एक नाम जो हर स्क्वॉड ऐलान के साथ चर्चा में रहा, वह था मोहम्मद शमी। अब, महीनों बाद, उन्होंने खुद अपनी स्थिति पर खुलकर बात की है।
“आई डोंट नो”—शमी का सीधा जवाब
एक निजी न्यूज़ चैनल से बातचीत में जब शमी से सीधे पूछा गया कि टीम इंडिया में उनकी वापसी कब होगी, तो जवाब बेहद सादा था।
“आई डोंट नो… नहीं पता मुझे। मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता।”
इस एक लाइन में शमी की ईमानदारी भी थी और वह बेबसी भी, जिसे कई सीनियर खिलाड़ी अपने करियर के इस मोड़ पर महसूस करते हैं। कोई शिकायत नहीं, कोई बहाना नहीं—बस सच्चाई।
एक ही चीज़ हाथ में है: प्रदर्शन
हालांकि बातचीत यहीं नहीं रुकी। शमी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी चीज़ पर उनका पूरा कंट्रोल है, तो वह है परफॉर्मेंस।
“मैं हमेशा यही कहता आया हूं—एक ही चीज़ आपके हाथ में होती है, वो है 100 प्रतिशत एफर्ट देना। फिटनेस, स्किल और फोकस पर काम करना। वही मैं करता रहूंगा।”
यह बयान सिर्फ वापसी की उम्मीद नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल क्रिकेटर की सोच को भी दिखाता है। चयन होगा या नहीं—वह बाद की बात है। पहले मैदान पर जवाब देना ज़रूरी है।
रणजी ट्रॉफी ही फिलहाल लक्ष्य
शमी इस समय रणजी ट्रॉफी में बंगाल टीम का हिस्सा हैं और उनका पूरा फोकस वहीं है।
“अभी रणजी ट्रॉफी का टारगेट है। कोशिश है कि नॉकआउट में अच्छा करें और जो टीम कॉम्बिनेशन चल रहा है, उसी को आगे बढ़ाते हुए बंगाल को चैंपियन बनाएं।”
यह बयान बताता है कि शमी फिलहाल भविष्य की चिंता में उलझने के बजाय वर्तमान पर टिके हुए हैं। घरेलू क्रिकेट—जहां से उन्होंने कभी अपनी पहचान बनाई थी—अब फिर वही रास्ता है।
घरेलू क्रिकेट में सक्रिय, लेकिन सवाल बरकरार
बीते महीनों में शमी सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी में लगातार खेलते नजर आए हैं। फिटनेस को लेकर जो सवाल थे, उनका जवाब उन्होंने मैदान पर देने की कोशिश की है।
हालांकि, IPL 2025 उनके लिए खास नहीं रहा। न लय बनी, न ही वह असर दिखा, जिसकी उनसे उम्मीद रहती है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज, और दक्षिण अफ्रीका व न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भी उन्हें नहीं चुना गया।
क्या वाकई कम हो रही हैं वापसी की उम्मीदें?
कई क्रिकेट पंडितों का मानना है कि लंबे समय से टीम से बाहर रहने के बाद शमी की राह अब आसान नहीं रही। उम्र, चोट का इतिहास और बढ़ती प्रतिस्पर्धा—तीनों उनके खिलाफ जा रहे हैं।















