New Zealand – नागपुर की उस रात न्यूजीलैंड के ड्रेसिंग रूम में सन्नाटा था। स्कोरबोर्ड सब कुछ कह चुका था—238 का पहाड़, और उसके सामने 190 पर सिमटी एक टीम। हार बड़ी थी, लेकिन उससे भी बड़ी बात थी कप्तान मिचेल सैंटनर की ईमानदार स्वीकारोक्ति। उन्होंने बिना घुमा-फिराकर मान लिया कि भारतीय बल्लेबाज़ों को रोकना इस वक्त बेहद मुश्किल काम है।
पहले टी20 इंटरनेशनल में भारत से 48 रनों की हार के बाद सैंटनर ने साफ कहा—अगर इन बल्लेबाज़ों को स्लो करना है, तो सिर्फ एक ही तरीका है: विकेट लेना। वरना वे पहली गेंद से ही मैच हाथ से निकाल देते हैं।
“भारत के खिलाफ घर पर खेलना हमेशा बड़ी चुनौती होती है”
पोस्ट-मैच प्रेज़ेंटेशन में मिचेल सैंटनर ने हार को स्वीकार करते हुए भारत की ताकत को खुलकर सराहा।
उन्होंने कहा,
“आप हमेशा आगे देखना चाहते हैं, गेम जीतना चाहते हैं। यह हमारे लिए एक अच्छा मौका था—घर पर एक बहुत अच्छी टीम के खिलाफ खेलने का। हम जानते थे कि पिछले दो सालों में उनका रिकॉर्ड कितना शानदार रहा है। यह हमारे लिए अच्छा गेम था, लेकिन भारत ने वाकई बहुत अच्छा खेला।”
यह बयान सिर्फ औपचारिक नहीं था। यह उस दबाव की झलक भी थी, जिसमें न्यूजीलैंड की टीम पूरे मैच खेलती रही।
“इन बल्लेबाज़ों को स्लो करने का एक ही तरीका—विकेट”
सैंटनर का सबसे सीधा और अहम बयान भारतीय बल्लेबाज़ों को लेकर आया। उन्होंने कहा,
“इन बल्लेबाज़ों को धीमा करने का एकमात्र तरीका विकेट लेना है।”
टी20 क्रिकेट में जहां डॉट बॉल्स से दबाव बनाया जाता है, वहां भारत की बल्लेबाज़ी उस सोच को ही चुनौती दे रही है। पहली गेंद से अटैक, फील्ड सेट होने से पहले रन—और यही न्यूजीलैंड के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी।
238 रन: जहां मैच लगभग खत्म हो गया
भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 238 रन बनाए—जो टी20 इंटरनेशनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का सबसे बड़ा स्कोर है। पावरप्ले में भारत पर दबाव था, लेकिन मिडिल ओवर्स में मैच पूरी तरह फिसल गया।
इस स्कोर के सामने न्यूजीलैंड का चेज़ शुरू से ही कठिन था। 190 तक पहुंचना सम्मानजनक लग सकता है, लेकिन मैच असल में बहुत पहले निकल चुका था।
अभिषेक शर्मा और रिंकू सिंह: असली फर्क यहीं पड़ा
इस मैच में भारत के लिए दो पारियां न्यूजीलैंड के लिए सिरदर्द बनीं।
अभिषेक शर्मा
35 गेंद
84 रन
पहली गेंद से आक्रमण
और फिर अंत में
रिंकू सिंह
20 गेंद
44 रन
डेथ ओवर्स में बेरहमी
सैंटनर ने भले नाम लेकर किसी की तारीफ न की हो, लेकिन उनका बयान साफ तौर पर इसी तरह की बल्लेबाज़ी की तरफ इशारा कर रहा था—जहां गेंदबाज़ को सोचने का वक्त ही नहीं मिलता।
हार में भी पॉजिटिव्स: फिलिप्स और चैपमैन
इतनी बड़ी हार के बावजूद सैंटनर ने अपनी टीम के लिए कुछ पॉजिटिव पॉइंट्स जरूर गिनाए।
उन्होंने कहा,
“ग्लेन फिलिप्स की पारी, मार्क चैपमैन की पारी—खासकर तब जब आप दो विकेट जल्दी खो देते हैं—ये हमारे लिए पॉजिटिव रहीं।”
ग्लेन फिलिप्स ने 78 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि मार्क चैपमैन ने 39 रन जोड़कर कुछ देर उम्मीद जगाई। लेकिन दबाव इतना ज्यादा था कि ये पारियां भी मैच को मोड़ नहीं सकीं।
“डॉट बॉल्स लेने का मौका ही नहीं मिलता”
सैंटनर ने भारतीय बल्लेबाज़ी की सबसे बड़ी खासियत पर भी बात की—डॉट बॉल्स की कमी।
उन्होंने कहा,
“इस टीम के खिलाफ डॉट मोमेंट्स लेने की कोई असली कोशिश नहीं होती। अगर आप मैच जीतना चाहते हैं, तो आपको पहली गेंद से ही खेलना होगा।”
यह बयान बताता है कि भारत अब टी20 क्रिकेट में सिर्फ रन नहीं बना रहा, बल्कि गेंदबाज़ों की रणनीति तोड़ रहा है।















