Nuwan : NOC विवाद में फंसे नुवान तुषारा – IPL खेलने के लिए पहुंचे कोर्ट

Atul Kumar
Published On:
Nuwan

Nuwan – आईपीएल 2026 के बीच अचानक एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो मैदान से ज्यादा कोर्टरूम में खेली जा रही है। नुवान तुषारा—RCB के लिए एक backup fast bowler नहीं, बल्कि death overs का potential weapon—अब टीम से ज्यादा सिस्टम के खिलाफ लड़ते दिख रहे हैं।

और मामला सीधा है, लेकिन उतना simple नहीं।

NOC पर टकराव—कहानी की शुरुआत यहीं से

तुषारा को RCB ने 1.6 करोड़ रुपये में खरीदा था और 2026 के लिए retain भी किया।

लेकिन problem यहां आई:

श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने NOC देने से मना कर दिया
वजह—fitness test fail

अब IPL खेलने के लिए हर विदेशी खिलाड़ी को अपने बोर्ड से NOC चाहिए होता है।

बिना NOC—आप contract के बावजूद नहीं खेल सकते।

तुषारा का जवाब—सीधा कोर्ट का दरवाज़ा

तुषारा ने इस फैसले को accept नहीं किया।

उन्होंने:

कोलंबो जिला अदालत में याचिका दायर की
SLC को NOC जारी करने का आदेश देने की मांग की

सुनवाई—9 अप्रैल

ये step दिखाता है कि मामला सिर्फ selection या form का नहीं—principle का बन चुका है।

खिलाड़ी vs बोर्ड—असल विवाद क्या है?

तुषारा की दलील interesting है।

उनका कहना:

SLC के साथ contract 31 मार्च को खत्म हो चुका
वह इसे renew नहीं करना चाहते
international career खत्म करने की इच्छा भी जता चुके हैं

तो सवाल उठता है—

अगर वो national duty में available नहीं हैं,
तो SLC उन्हें IPL खेलने से क्यों रोक रहा है?

फिटनेस—real issue या control?

SLC का stance clear है:

national selection के लिए fitness mandatory है

लेकिन तुषारा का counter भी strong है:

“मेरा fitness level पहले भी ऐसा ही था, तब खेलने दिया गया”

यानी:

ये सिर्फ fitness issue है
या policy का selective use?

यहीं से controversy गहराती है।

आंकड़े—क्या तुषारा worth the fight हैं?

थोड़ा performance पर नजर डालें:

फॉर्मेटमैचविकेटऔसत
T20 (कुल)13717421.25
T20I30

ये numbers बताते हैं—

वो proven T20 bowler हैं
खासकर death overs में effective

RCB जैसे टीम के लिए—ये valuable asset हो सकते हैं।

RCB के लिए headache—replacement या इंतज़ार?

RCB फिलहाल tricky situation में है।

तुषारा available नहीं
court decision pending
replacement announce नहीं किया गया

नाम सामने आ रहा है:

नवीन-उल-हक

लेकिन जब तक clarity नहीं आती—team planning अधूरी रहेगी।

बड़ा सवाल—क्या बोर्ड इतना control रख सकता है?

ये मामला सिर्फ तुषारा का नहीं है।

ये broader debate है:

क्या national board किसी player को franchise cricket खेलने से रोक सकता है
खासकर जब contract खत्म हो चुका हो?

ICC rules generally boards को authority देते हैं—
लेकिन ऐसे cases grey area में आते हैं।

PSL vs IPL vs Boards—नई reality

आज का cricket landscape बदल चुका है।

players:

multiple leagues खेलते हैं
national commitments balance करते हैं

boards:

control बनाए रखना चाहते हैं

और इसी tension से ऐसे disputes पैदा होते हैं।

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