Test – गुवाहाटी टेस्ट में साउथ अफ्रीका ने पहली पारी में 489 रन ठोककर जैसे मैच की लगाम अपने हाथ में ले ली है। भारत अब इस टेस्ट को जीतना चाहता है, तो उसे सिर्फ बल्लेबाज़ी नहीं—जोखिम भी उठाना पड़ेगा।
यही बात टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने जोर देकर कही है।
उनकी सलाह?
कुछ ऐसी कि परंपरागत टेस्ट रणनीति सुनने वालों को थोड़ी “अटपटी” जरूर लगे—लेकिन शास्त्री कहते हैं कि अगर आपको मैच जीतना है, तो सीमा लांघनी ही होगी।
शास्त्री की सलाह: “ज्यादा समय मत गंवाओ, तेजी से रन बनाओ—ज़रूरत पड़े तो पीछे रहते हुए डिक्लेयर करो”
शास्त्री स्टार स्पोर्ट्स पर बोल रहे थे, और उनका विश्लेषण साफ था—
“टैक्टिकली, इंडिया को कल फैसला करना होगा। पहले नई गेंद को संभालें, फिर गेम को आगे बढ़ाएं। जीत चाहिए तो फैसले लेने होंगे—यहां तक कि 80, 90, 100 रन पीछे रहते हुए भी डिक्लेयर करना पड़ सकता है।”
ये सलाह इसलिए चौंकाती है क्योंकि पारी घोषित करना (डिक्लेयर) आमतौर पर तभी होता है जब टीम बढ़त में हो।
लेकिन शास्त्री कहते हैं—भारत के पास समय कम है, इसलिए उन्हें मैच की गति अपने हाथ में लेनी होगी।
उनके मुताबिक—
“489 रन के बराबर जाने का इंतज़ार मत करो। ऐसा करने में बहुत समय लग जाएगा। भारत को जल्दी-जल्दी रन बनाकर विरोधी को दूसरी पारी में दबाव में लाना होगा।”
पीछे रहकर डिक्लेयर करना—इतिहास भारत के खिलाफ
शास्त्री की रणनीति चाहे कितनी साहसिक लगे, लेकिन इतिहास कुछ और बता रहा है।
भारत ने अपनी दूसरी पारी में चार बार ऐसा किया है जब वे विपक्ष से पीछे रहते हुए डिक्लेयर हुए—
और नतीजा?
| साल | विपक्ष | पीछे रहकर डिक्लेयर | नतीजा |
|---|---|---|---|
| 1948 | ऑस्ट्रेलिया | 103 रन पीछे | भारत हार गया |
| 1978 | पाकिस्तान (फ़ैसलाबाद) | 41 रन पीछे | ड्रॉ |
| 1982 | इंग्लैंड (कानपुर) | 1 रन पीछे | ड्रॉ |
| 2012 | इंग्लैंड (नागपुर) | 4 रन पीछे | ड्रॉ |
अर्थात भारत ने कभी भी पीछे रहकर डिक्लेयर करने के बाद टेस्ट नहीं जीता।
लेकिन यह भी सच है कि टेस्ट क्रिकेट में अभी तक 33 बार टीमों ने ऐसा किया है, और उनमे से 3 टीमों ने जीत दर्ज की है।
शास्त्री का मानना है कि भारत को वही रास्ता चुनना चाहिए—क्योंकि खेल की परिस्थितियाँ सुझाव दे रही हैं कि मैच को पकड़े रखने का यही एक तरीका बचेगा।
क्यों जरूरी है आक्रामकता?
गुवाहाटी की पिच वैसे भी बल्लेबाजों के लिए खुली किताब जैसी लग रही है।
स्पिनर कुलदीप यादव ने इसे “सड़क” कहा था—क्योंकि विकेट में ज्यादा टर्न नहीं।
ऐसे में अगर भारत समय गंवाता है, तो मैच स्वतः ड्रॉ की तरफ झुक जाएगा।
शास्त्री चाहते हैं कि:
- भारत पहले 40–50 ओवर में तेजी से रन बटोरे
- 350–400 के आसपास पहुंचकर गणित देखे
- फिर 70–100 रन पीछे रहते हुए डिक्लेयर कर दे
- साउथ अफ्रीका को दबाव में डालकर 4–5 सत्रों में ऑल-आउट करे
- फिर एक छोटे लक्ष्य का पीछा करे
यानी यह पूरी रणनीति “रन बनाओ + समय बचाओ + दोबारा हमला करो” पर आधारित है।
लेकिन क्या भारत ऐसा जोखिम उठाएगा?
टीम मैनेजमेंट आमतौर पर बहुत सुरक्षित दृष्टिकोण अपनाता है।
लेकिन आज की स्थिति में भारत 489 के नीचे फंसकर बैकफुट पर है।
मैच जीतना है, तो रिस्क-रिवार्ड वाला रास्ता ही बचता है—और शास्त्री उसे ही उजागर कर रहे हैं।
क्या रोहित शर्मा (कप्तान) और राहुल द्रविड़ (कोच) इस आक्रामक सलाह पर चलते हैं, या भारत पारंपरिक पद्धति अपनाता है—यह आने वाले सत्र तय करेंगे।
















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