Shastri – विराट कोहली इस वक्त करियर के उस मोड़ पर हैं, जहां ज्यादातर दिग्गज या तो ढलान की बात करते हैं या विदाई की तैयारी। लेकिन कोहली? वह अब भी ऐसे खेल रहे हैं जैसे अभी-अभी टीम इंडिया की जर्सी पहनी हो। वही भूख। वही बेचैनी। वही फिटनेस। और वही निरंतरता, जो सालों से उनकी पहचान रही है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार को जब भारत 300 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रहा था, तब कोहली की बल्लेबाज़ी के साथ-साथ उनकी वर्क एथिक्स भी चर्चा का विषय बन गई। कॉमेंट्री बॉक्स से यह आवाज़ आई—रवि शास्त्री की—और बात सिर्फ तारीफ तक सीमित नहीं रही। शास्त्री ने इस मौके को भविष्य के कप्तान शुभमन गिल के लिए एक सीख में बदल दिया।
शुरुआती झटका, फिर किंग की एंट्री
301 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को शुरुआती झटका जल्दी लग गया।
रोहित शर्मा 26 रन बनाकर आउट हो गए। हिटमैन लय में दिख रहे थे, दो छक्के भी जड़ चुके थे, लेकिन जेमिसन की गेंद पर ब्रेसवेल को कैच दे बैठे।
स्कोरबोर्ड पर 39 रन थे।
और तभी तीसरे नंबर पर उतरे विराट कोहली।
दूसरे छोर पर कप्तान शुभमन गिल मौजूद थे।
यहीं से मैच ने स्थिरता पकड़ी।
कोहली-गिल की साझेदारी और कॉमेंट्री बॉक्स से सवाल
कोहली और गिल के बीच शानदार शतकीय साझेदारी हुई। रन आते रहे, दबाव जाता रहा। इसी दौरान कॉमेंट्री कर रहे हर्षा भोगले ने एक सीधा लेकिन बड़ा सवाल उछाल दिया—
“इस आधुनिक महान क्रिकेटर से नई पीढ़ी क्या सीख सकती है?”
और यहीं से रवि शास्त्री का लंबा, दिल से निकला जवाब शुरू हुआ।
रवि शास्त्री: “यह कोहली का रूटीन है”
शास्त्री ने कहा,
“एक समय पर एक ही चीज पर ध्यान। भूख। शरीर को उसकी चरम सीमा पर ले जाने की ललक। और जब मैं टीम के साथ था, तो वर्क एथिक्स में शायद ही कोई उनसे ऊपर हो।”
यह कोई टीवी लाइन नहीं थी।
यह उस कोच की गवाही थी, जिसने कोहली को अंदर से काम करते देखा है।
सुबह की मेहनत, मैदान की कहानी
शास्त्री यहीं नहीं रुके। उन्होंने बताया कि कोहली का दिन कैसा शुरू होता है।
“मैंने देखा है कि वह सुबह कितने कैच पकड़ते हैं। आउटफील्ड में कैच, फिर विकेटकीपर के ग्लव में थ्रो। बैटिंग, फील्डिंग—यह सब उनके लिए रूटीन है।”
यानी जो हमें मैच में दिखता है, वह सिर्फ आइसबर्ग का सिरा है। असली काम कैमरों से दूर होता है।
“प्रोफेशनलिज़्म प्लान से नहीं आता”
शास्त्री की सबसे गहरी बात यहीं आई।
उन्होंने कहा,
“विराट कोहली जैसा प्रोफेशनलिज़्म किसी प्लान से नहीं आता। यह एक सिस्टम है। यह भीतर से क्रिकेट को जीने का तरीका है। तब बैटिंग इनविजिबल प्रोसेस का विज़िबल आउटपुट बन जाती है।”
यह लाइन सिर्फ कोहली के लिए नहीं थी।
यह हर युवा क्रिकेटर के लिए थी।
शुभमन गिल के लिए साफ संदेश
शास्त्री ने बातचीत का सिरा सीधे शुभमन गिल पर लाकर बांधा।
“अगर गिल अपने करियर को विराट की तरह बनाना चाहते हैं, तो ब्लूप्रिंट तैयार है। भूख बनाए रखो। शरीर को संभालो। और इस सबको रूटीन बना लो।”
कोई मोटिवेशनल भाषण नहीं।
कोई शॉर्टकट नहीं।
बस रोज़ का काम, वही काम, उसी जुनून के साथ।
कोहली क्यों अब भी अलग दिखते हैं?
35 की उम्र पार कर चुके विराट कोहली आज भी:
तेज़ दौड़ते हैं
ग्राउंड कवर करते हैं
और बड़े लक्ष्य का पीछा करते वक्त सबसे शांत दिखते हैं
न्यूजीलैंड के खिलाफ 93 रनों की पारी इसका सबूत थी। शतक नहीं आया, लेकिन मैच वहीं जीता गया।
यह वही मानसिकता है, जो शुरुआती करियर में थी। फर्क बस इतना है कि अब उसके साथ अनुभव की परत भी जुड़ चुकी है।
नई पीढ़ी के लिए सबक साफ है
शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, तिलक वर्मा—टैलेंट की कमी नहीं है।
लेकिन कोहली की कहानी बताती है कि:
टैलेंट शुरुआत देता है
वर्क एथिक्स करियर बनाता है
और भूख उसे लंबा चलाती है















