Jadeja : 15 जनवरी 2013 से 2026 तक जडेजा की कहानी

Atul Kumar
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Jadeja

Jadeja – 15 जनवरी 2013…
एक तारीख, जो पहली नज़र में बिल्कुल साधारण लगती है। उस वक्त न विराट कोहली कभी वनडे रैंकिंग में नंबर-1 बने थे, न नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री थे। लेकिन भारतीय क्रिकेट के संदर्भ में यह तारीख आज अचानक असहज सवाल बनकर खड़ी हो जाती है।

क्योंकि यही वो दिन था, जब रवींद्र जडेजा ने भारत में अपना आखिरी वनडे अर्धशतक जड़ा था।

जी हां—पूरे 13 साल पहले।

और यहीं से शुरू होती है वो बहस, जो अब धीरे-धीरे तेज़ होती जा रही है।

रोहित-कोहली की परीक्षा हुई, पास हो गए… अब बारी जडेजा की?

कुछ समय पहले तक भारतीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा सवाल रोहित शर्मा और विराट कोहली को लेकर उठ रहे थे।
डोमेस्टिक क्रिकेट खेलने का दबाव, फॉर्म पर सवाल, 2027 वर्ल्ड कप तक खेलने की क्षमता—सब कुछ खुलकर चर्चा में था।

लेकिन दोनों ने जवाब दिया।
रोहित ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर, विराट ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज़ में।
इतना ही नहीं, 2025 के अंत तक दोनों विजय हजारे ट्रॉफी में भी उतर आए।

नतीजा?
रोहित और विराट का भविष्य फिलहाल सुरक्षित है।

लेकिन इसी प्रक्रिया में एक नाम चुपचाप सवालों के घेरे में आ गया—
रवींद्र जडेजा।

आंकड़े जो बेचैन करते हैं

अगर जडेजा के पिछले 10 वनडे मैचों पर नज़र डालें, तो तस्वीर ज्यादा उत्साहजनक नहीं दिखती।

बल्लेबाज़ी

  • 10 मैच
  • 7 बार बल्लेबाज़ी का मौका
  • सिर्फ 1 बार 30+ स्कोर
  • कुल रन: 114
  • 3 बार नाबाद

इन 10 मैचों में चैंपियंस ट्रॉफी के मुकाबले भी शामिल हैं—जहां जडेजा ने फाइनल टच जरूर दिया था, लेकिन वो एक-दो गेंदों का योगदान था, कोई लंबी पारी नहीं।

गेंदबाज़ी

  • 10 मैच
  • सिर्फ 6 विकेट
  • 5 बार बिना विकेट

यानी न बल्ले से असर, न गेंद से वैसा कंट्रोल, जिसकी उम्मीद एक सीनियर ऑलराउंडर से की जाती है।

रोल का सवाल: ऑलराउंडर या सिर्फ नाम?

यह मानना होगा कि भारतीय टीम का टॉप ऑर्डर इतना मजबूत है कि जडेजा को अक्सर बल्लेबाज़ी का ज्यादा मौका नहीं मिलता।
लेकिन जब मौका मिलता है, तो वो पारी आगे क्यों नहीं बढ़ती?

और अगर बल्लेबाज़ी सीमित है, तो फिर गेंदबाज़ी से मैच पर असर दिखना चाहिए।
वो असर भी हालिया वनडे में नज़र नहीं आ रहा।

जडेजा अब टीम में उस ज़ोन में आ गए हैं, जहां उनसे सिर्फ “ठीक-ठाक” नहीं, मैच बदलने वाला योगदान चाहिए।

उम्र का फैक्टर अब नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता

रवींद्र जडेजा फिलहाल 37 साल के हैं।
2027 वर्ल्ड कप तक आते-आते वह लगभग 39 के हो जाएंगे।

वनडे क्रिकेट में:

  • तेज़ फील्डिंग
  • लंबे स्पेल
  • लगातार रन-आउट और कैच

यह सब उम्र के साथ कठिन होता जाता है।

यही वजह है कि अब चयनकर्ताओं के लिए सवाल यह नहीं है कि जडेजा कितने बड़े खिलाड़ी रहे हैं, बल्कि यह है कि
क्या वह 2027 के लिए सही विकल्प हैं?

विकल्प मौजूद हैं, और यही चिंता बढ़ाता है

अगर जडेजा का कोई विकल्प न होता, तो बहस भी सीमित रहती।
लेकिन हकीकत यह है कि भारत के पास ऑप्शन्स हैं।

अक्षर पटेल

  • लाइक-टू-लाइक रिप्लेसमेंट
  • बल्लेबाज़ी में ज्यादा स्थिर
  • गेंदबाज़ी में कंट्रोल

वॉशिंगटन सुंदर

  • नई गेंद और मिडिल ओवर्स में उपयोगी
  • निचले क्रम में भरोसेमंद बल्लेबाज़

उभरते नाम

  • रियान पराग
  • आयुष बदोनी

ये खिलाड़ी अभी पूरी तरह तैयार नहीं कहे जा सकते, लेकिन भविष्य की प्लानिंग के लिहाज़ से इन्हें नजरअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता।

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