IPL : पिच विवाद पर भुवनेश्वर ने तोड़ी चुप्पी – गिल की इंजरी पर जवाब देने से बचते दिखे

Atul Kumar
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IPL – कोलकाता की पतली धूप और भरे हुए ईडन गार्डन्स की खामोशी—दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार ने भारतीय क्रिकेट फैंस को थोड़ा हैरान किया ही था, लेकिन उसके बाद पिच को लेकर उठी बहस ने माहौल और गर्मा दिया।

फिर भी, पूरी कहानी में सबसे शांत आवाज आई भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार की, जिन्होंने साफ कहा—स्पिनिंग पिच पर सवाल उठाना बेकार है, भारत सालों से ऐसा ही करता आया है।

तीन दिन के भीतर खत्म हुए पहले टेस्ट में भारत 124 के मामूली लक्ष्य का पीछा करते हुए 30 रन से हार गया। मैच के खत्म होते ही चर्चाएँ उसी पुरानी दिशा में मुड़ गईं—पिच, चयन और रणनीति—but Bhuvi didn’t buy any of that noise.

भुवनेश्वर ने कहा—भारत में स्पिन पिच नई बात नहीं

35 वर्षीय तेज गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार ‘क्रिकगिरी’ ऐप लॉन्च कार्यक्रम में मीडिया के सवालों से घिरे हुए थे, लेकिन उनका जवाब बिल्कुल सीधा था—“यह पहली बार नहीं है जब स्पिनरों के लिए मददगार पिच तैयार हुई है। इससे पहले किसी ने यह सवाल नहीं उठाया क्योंकि भारत जीत रहा था।”

भारत ने पिछले साल न्यूजीलैंड से 0-3 की हार भी झेली थी, जहाँ मेजबानों के स्पिनरों ने भारतीय बैटिंग को बुरी तरह परेशान किया था। कोलकाता की यह हार भी उसी याद को ताजा कर गई। फिर भी, भुवनेश्वर ने इसे बड़े संकट की तरह नहीं देखा।

उन्होंने कहा—“हार-जीत खेल का हिस्सा है। ऐसा नहीं है कि टीम पहले नहीं हारी। मुझे नहीं लगता कि यह कोई बड़ी चिंता है।”

चार स्पिनरों का चयन—क्या ज़रूरी था?

जब उनसे पूछा गया कि ईडन पर भारत ने चार स्पिनरों को क्यों खिलाया, तो उनका जवाब चयन की सामान्य प्रक्रिया जैसा ही था—“पिच जैसी होती है, प्लेइंग इलेवन उसी हिसाब से बनती है।”

मतलब साफ है—यह फैसला अचानक या किसी खास रणनीति के दबाव में नहीं लिया गया था। भारतीय टीम लंबे समय से घरेलू पिचों पर ऐसा कॉम्बिनेशन आज़माती रही है।

कप्तान शुभमन गिल की इंजरी—भुवनेश्वर बोले, ये उनका सवाल

भारत के युवा कप्तान शुभमन गिल को मैच के बीच गर्दन में ऐंठन होने के कारण बाहर होना पड़ा—एक ऐसा मोड़ जिसने टीम को मानसिक झटका जरूर दिया। पर भुवनेश्वर ने कप्तान के वर्कलोड मैनेजमेंट पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

उन्होंने कहा—“गिल हाल ही में कप्तान बने हैं। अगर उन्हें आराम चाहिए होगा, तो वो खुद कहेंगे। वो थिंक-टैंक का हिस्सा हैं, फैसला वही करेंगे।”

भुवी का जवाब कूटनीतिक था, लेकिन साफ भी—कप्तानी और वर्कलोड का मुद्दा उसी खिलाड़ी और टीम मैनेजमेंट के बीच की बात है।

आरसीबी और चिन्नास्वामी हादसा—क्या खिलाड़ी मानसिक रूप से तैयार रह पाएंगे?

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (RCB) के तेज गेंदबाज़ होने के नाते उनसे पूछा गया कि चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुए हादसे—जिसमें 11 लोगों की जान गई—का असर खिलाड़ियों पर पड़ेगा या नहीं?

भुवी का जवाब संवेदनशील भी था और व्यावहारिक भी।

उन्होंने कहा—“आईपीएल से पहले कई टूर्नामेंट हैं। जब कैंप शुरू होगा, तब टीम की मानसिक स्थिति पर बात होगी। बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि खिलाड़ी इससे पहले कैसा प्रदर्शन करते हैं।”

यह बात साफ झलकाती है कि खिलाड़ी मानसिक रूप से खुद को अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से तैयार करते हैं और लीग में आने से पहले की फॉर्म भी बहुत मायने रखती है।

पिच विवाद—क्या सच में ज़रूरी?

भारतीय क्रिकेट में हर हार के बाद पिच को लेकर बहस कोई नई चीज़ नहीं है। लेकिन भुवनेश्वर कुमार का एक वाक्य शायद सबसे तर्कसंगत है—जब भारत जीतता है, पिच की बात नहीं होती।

कभी-कभी हार एक खराब सेशन, एक टॉप-ऑर्डर की गलती, या विपक्ष के किसी एक शानदार स्पेल की वजह से भी हो जाती है। लेकिन भारत की घरेलू स्पिन-फ्रेंडली पिचों की संस्कृति दशकों पुरानी है—अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, अश्विन, जडेजा—ये सब उसी परंपरा का केंद्र रहे हैं।

ईडन की पिच इस बार भले ही उम्मीद से ज्यादा घूमी हो, लेकिन भारत इससे पहले भी ऐसे विकेटों पर बड़े-बड़े मैच जीता है।

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