Asia Cup 2025 – रियान पराग का नाम सुनते ही दिमाग में वो निडर बल्लेबाज़ और पार्ट-टाइम ऑफ-स्पिनर आता है, जिसने आईपीएल में कई बार टीम को बचाने की कोशिश की है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनकी कहानी कुछ अलग रही है—चोट, ब्रेक और वापसी की जद्दोजहद। अब दलीप ट्रॉफी ने उन्हें फिर से मैदान पर लौटने का मौका दिया, और पराग मानते हैं कि यह उनके लिए सिर्फ “कुछ मैच खेलने” का निजी लक्ष्य पूरा करने जैसा था।
चोट के बाद वापसी की मुश्किलें
पिछले साल के आखिर में लगी कंधे की चोट ने पराग को लय से बाहर कर दिया। नतीजा ये हुआ कि आईपीएल 2025 में उनकी बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी दोनों पर असर दिखा। टूर्नामेंट खत्म होने के बाद उन्होंने पूरा ब्रेक लिया और सीधे दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में मैदान पर उतरे, जहां उन्होंने पूर्व क्षेत्र की अगुवाई की।
दलीप ट्रॉफी में प्रदर्शन
मैच में पराग ने बल्ले से 47 गेंदों पर 39 रन बनाए और गेंदबाज़ी में 22 ओवर डालकर एक विकेट झटका। स्कोरकार्ड भले ही बहुत बड़ा न लगे, लेकिन उनके लिए यह आत्मविश्वास वापसी जैसा था। उन्होंने साफ कहा—“मैं प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा था, बस खेल का मज़ा लेना चाहता था।”
आंकड़ा | प्रदर्शन |
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बल्लेबाज़ी | 39 रन (47 गेंद) |
गेंदबाज़ी | 22 ओवर, 1 विकेट |
कप्तानी | पूर्व क्षेत्र की अगुवाई |
आगे की राह
अब पराग की निगाहें अक्टूबर पर हैं। या तो वह रणजी ट्रॉफी से वापसी करेंगे या फिर चयन मिलने पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज में दिखेंगे। उनका फोकस साफ है—“बुनियादी बातों पर लौटना और हर मैच में शीर्ष स्कोरर बनने की कोशिश करना।”
निराशा भी, सीख भी
पराग मानते हैं कि पूर्व क्षेत्र की टीम उत्तर क्षेत्र के खिलाफ पहले पारी में बेहतर कर सकती थी। 230/5 के स्कोर के बाद उत्तर की साझेदारियों ने मैच पर कब्ज़ा जमा लिया। “अगर हम उन्हें 300-350 तक रोक पाते तो वापसी आसान हो सकती थी, लेकिन 200 रन की बढ़त ने मैच छीन लिया,” पराग ने स्वीकारा।
बड़ी तस्वीर
इस पूरी कहानी में सबसे अहम बात है—एक युवा क्रिकेटर का धैर्य। पराग की उम्र अभी 23 ही है, लेकिन चोट से जूझने और वापसी की मानसिक लड़ाई उन्होंने झेल ली। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में वो सिर्फ घरेलू क्रिकेट के हीरो बनते हैं या टीम इंडिया की ब्लू जर्सी में भी दोबारा दिखाई देते हैं।