Ponting – रिकी पोंटिंग जब किसी खिलाड़ी का नाम लेकर भविष्यवाणी करते हैं, तो क्रिकेट जगत उसे हल्के में नहीं लेता। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और दो बार के वर्ल्ड कप विजेता पोंटिंग ने इस बार जो कहा है, उसने भारत के आगामी टी20 विश्व कप अभियान की धुरी एक युवा नाम पर टिकाने का संकेत दे दिया है—अभिषेक शर्मा।
पोंटिंग की नजर में अभिषेक सिर्फ एक सलामी बल्लेबाज नहीं, बल्कि वह एक्स-फैक्टर हैं, जिनके चलने पर भारत लगभग अजेय और जिनके न चलने पर बाकी टीमों की तरह असुरक्षित हो सकता है।
वह एक स्टार है — पोंटिंग का सीधा संदेश
रिकी पोंटिंग ने अभिषेक शर्मा को लेकर बिना घुमाए-फिराए साफ शब्दों में अपनी राय रखी। उनके मुताबिक, अभिषेक में जो सबसे बड़ी ताकत है, वह है अनुभव की कमी।
पोंटिंग ने कहा,
“वह एक स्टार है। मुझे लगता है कि अनुभव की कमी वास्तव में एक सकारात्मक बात है। वह सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी और संभावित रूप से प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन सकते हैं। अगर वह ऐसा करते हैं, तो भारत को हराना और भी कठिन हो जाता है।”
यह बयान अपने आप में बहुत कुछ कह देता है। आमतौर पर अनुभव को बड़ी पूंजी माना जाता है, लेकिन पोंटिंग का तर्क उलटा है—कम अनुभव मतलब कम मानसिक बोझ।
अनुभव की कमी क्यों बन सकती है ताकत?
टी20 क्रिकेट का सबसे बड़ा दुश्मन होता है—डर।
डर असफलता का, आलोचना का, और बड़ी स्टेज पर फेल हो जाने का।
अभिषेक शर्मा इस डर से लगभग मुक्त नजर आते हैं।
- कोई पुराना वर्ल्ड कप ट्रॉमा नहीं
- कोई लंबा इंटरनेशनल बैगेज नहीं
- कोई “संभलकर खेलो” वाला माइंडसेट नहीं
यही वजह है कि पोंटिंग मानते हैं कि अभिषेक बिना ब्रेक लगाए खेल सकते हैं—और टी20 में यही सबसे बड़ा हथियार है।
भारत की मजबूती और कमजोरी — दोनों का नाम एक?
पोंटिंग की बात का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है। उन्होंने भारत की पूरी टी20 वर्ल्ड कप कहानी को अभिषेक शर्मा के प्रदर्शन से जोड़ दिया।
उनके शब्दों में,
“अगर वह रन बनाते हैं, तो भारत को हराना लगभग असंभव हो जाता है। अगर वह नहीं बनाते, तो भारत भी किसी और टीम की तरह असुरक्षित हो जाता है।”
यह कोई साधारण टिप्पणी नहीं है। यह साफ इशारा है कि भारतीय टीम का टॉप ऑर्डर अब अभिषेक के टोन-सेटिंग रोल पर निर्भर करेगा।
अभिषेक शर्मा की भूमिका: सिर्फ रन नहीं, असर
अभिषेक शर्मा की अहमियत सिर्फ उनके रन से नहीं मापी जाती। वह जिस तरह से खेलते हैं, उसका असर पूरी टीम पर पड़ता है।
- पावरप्ले में फील्ड फैलने से पहले आक्रमण
- गेंदबाजों को बैकफुट पर धकेलना
- मिडिल ऑर्डर के लिए स्पेस बनाना
अगर अभिषेक 30 गेंदों में 45–50 रन भी बना देते हैं, तो वह मैच भारत के पक्ष में झुका देते हैं।
प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट? पोंटिंग क्यों आश्वस्त हैं
रिकी पोंटिंग ने अभिषेक को सिर्फ मैच विनर नहीं, बल्कि संभावित प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बताया है। यह भविष्यवाणी ऐसे ही नहीं आई।
पोंटिंग का मानना है कि—
- अभिषेक का स्ट्राइक रेट लगातार ऊंचा रहता है
- वह स्पिन और पेस दोनों के खिलाफ सहज हैं
- वह परिस्थितियों से डरते नहीं
टी20 वर्ल्ड कप में यही तीन चीजें किसी खिलाड़ी को बाकी से अलग करती हैं।
भारत का टॉप ऑर्डर: रिस्क और रिवॉर्ड
भारतीय टॉप ऑर्डर इस वर्ल्ड कप में हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड मॉडल पर चलता दिख रहा है।
| पहलू | प्रभाव |
|---|---|
| आक्रामक शुरुआत | बड़े स्कोर की संभावना |
| जल्दी विकेट | दबाव बढ़ता है |
| अभिषेक का रोल | मैच का टेम्पलेट तय करता है |
यहीं पर पोंटिंग की चेतावनी भी अहम हो जाती है। अगर अभिषेक जल्दी आउट होते हैं और बार-बार ऐसा होता है, तो भारत की बल्लेबाजी अचानक नाज़ुक दिख सकती है।
पोंटिंग का नजरिया क्यों मायने रखता है?
रिकी पोंटिंग सिर्फ एक पूर्व कप्तान नहीं हैं।
वह—
- वर्ल्ड कप जीत चुके कप्तान हैं
- युवा खिलाड़ियों को पहचानने की साख रखते हैं
- फ्रेंचाइज़ी और इंटरनेशनल दोनों लेवल पर कोचिंग अनुभव रखते हैं
जब ऐसा व्यक्ति कहता है कि किसी खिलाड़ी पर टूर्नामेंट का रुख निर्भर करता है, तो वह सिर्फ राय नहीं, विश्लेषण होता है।
भारतीय ड्रेसिंग रूम के लिए संदेश
पोंटिंग के बयान का एक अप्रत्यक्ष संदेश भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए भी है—
अभिषेक को खेलने की पूरी आज़ादी दीजिए।
टी20 में सबसे बड़ा नुकसान तब होता है, जब खिलाड़ी खुद को रोकने लगता है।
और अभिषेक शर्मा को रोकना, उनकी सबसे बड़ी ताकत छीनने जैसा होगा।
क्या भारत बहुत ज्यादा एक खिलाड़ी पर निर्भर हो रहा है?
यह सवाल भी उतना ही जरूरी है।
क्या भारत एक युवा बल्लेबाज पर जरूरत से ज्यादा उम्मीदें डाल रहा है?
शायद हां।
लेकिन टी20 वर्ल्ड कप अक्सर ऐसे ही खिलाड़ियों से जीते जाते हैं—
- 2007 में युवराज
- 2016 में सैमुअल्स
- 2021 में मिचेल मार्श
हर वर्ल्ड कप को एक चेहरा चाहिए।
पोंटिंग के मुताबिक, 2026 में वह चेहरा अभिषेक शर्मा हो सकता है।















