Rinku – नागपुर की रात में जब स्कोरबोर्ड तेजी से बदल रहा था, तब असली कहानी आख़िरी ओवरों में लिखी जा रही थी। सामने था बड़ा स्कोर, दबाव था और क्रीज़ पर खड़े थे रिंकू सिंह—एक ऐसा बल्लेबाज़, जिसने पिछले कुछ महीनों में टीम में आने-जाने का दर्द भी झेला है और अब उसी दबाव को ताकत में बदल दिया।
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल में रिंकू सिंह ने ठीक वही किया, जिसके लिए उन्हें जाना जाता है। फिनिश किया। बेखौफ। ठंडे दिमाग से। आख़िरी ओवर में डेरिल मिचेल को निशाना बनाया और 20 गेंदों में 44 रनों की पारी खेलकर यह याद दिला दिया कि जब बैलेंस सही बैठता है, तो रिंकू सिंह क्यों ज़रूरी हो जाते हैं।
अंदर–बाहर होने का दबाव, लेकिन इरादा साफ
मैच के बाद रिंकू सिंह ने अपनी पारी से ज़्यादा ईमानदारी से उस मानसिक दबाव पर बात की, जिससे वह गुजर रहे थे।
उन्होंने कहा,
“मुझ पर प्रेशर था, क्योंकि मैं टीम से अंदर-बाहर हो रहा था।”
टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले की सीरीज़ में रिंकू कई बार ड्रॉप किए गए। वजह साफ थी—कॉम्बिनेशन फिट नहीं बैठ रहा था। लेकिन जैसे ही शुभमन गिल टीम से बाहर हुए, टीम का बैलेंस बदला और फिनिशर के लिए जगह बनी। उसी जगह पर रिंकू सिंह लौटे—और पहले ही मैच में अपनी अहमियत जता दी।
प्लान साधारण था, लेकिन अमल सटीक
रिंकू की बल्लेबाज़ी में कभी दिखावा नहीं होता। प्लान हमेशा सीधा रहता है।
उन्होंने कहा,
“प्लान था कि सिंगल्स, डबल्स लूं और बीच में बाउंड्री मारूं। साथ ही आखिर तक टिककर मैच खत्म करूं।”
यही टी20 फिनिशर की पहचान होती है—हर गेंद पर छक्का नहीं, लेकिन हर गेंद पर सोच।
रिंकू ने यह भी बताया कि हेड कोच गौतम गंभीर का मैसेज बिल्कुल साफ था।
“जीजी सर ने मुझे इंटेंट बनाए रखने को कहा।”
और वही इंटेंट आख़िरी ओवर में पूरी तरह दिखा।
आख़िरी ओवर: जहां मैच पक्का हुआ
अर्शदीप सिंह दूसरे छोर पर थे। स्ट्राइक रोटेट करना आसान नहीं था। कुछ डॉट बॉल्स आईं, दबाव बढ़ा—लेकिन घबराहट नहीं।
रिंकू ने बताया कि उस दौरान बातचीत बेहद साधारण रही।
“मैंने उनसे कहा कि शांत रहें, सिंगल लेने की कोशिश करें और मुझे स्ट्राइक दें।”
कोई झुंझलाहट नहीं, कोई गुस्सा नहीं। बस भरोसा।
फिर आख़िरी दो गेंदों पर स्ट्राइक रिंकू के पास आई—और कहानी वहीं खत्म हो गई। एक चौका, बड़े शॉट्स और भारत का स्कोर 238 तक पहुंच गया।
5, 6, 7 नंबर की बल्लेबाज़ी का माइंडसेट
रिंकू ने साफ कहा कि मिडिल और लोअर मिडिल ऑर्डर में खेलने वालों की सोच अलग होती है।
“5, 6 और 7 नंबर पर बल्लेबाज़ी करते समय माइंडसेट ऐसा ही होता है।”
यह रोल ग्लैमर वाला नहीं होता।
लेकिन मैच यहीं जीते जाते हैं।
और शायद यही वजह है कि टीम इंडिया को रिंकू जैसे बल्लेबाज़ की ज़रूरत है—जो स्पॉटलाइट से ज़्यादा रिज़ल्ट पर ध्यान देता है।
कैच छूटा, लेकिन बहाना नहीं
मैच के दौरान रिंकू से एक कैच भी छूटा। बड़े मैचों में अक्सर खिलाड़ी लाइट्स या ओस का बहाना बना लेते हैं। लेकिन रिंकू ने ऐसा कुछ नहीं किया।
उन्होंने साफ कहा,
“यहां लाइट्स से कोई दिक्कत नहीं थी। मैंने बस एक कैच छोड़ा। चिंता की कोई बात नहीं है।”
यह बयान भी उसी परिपक्वता को दिखाता है, जो उनकी बल्लेबाज़ी में दिखती है।
वर्ल्ड कप 2026 की तैयारी और बड़ी सोच
रिंकू सिंह ने इस सीरीज़ को सिर्फ एक द्विपक्षीय मुकाबला मानने से इनकार किया। उनके लिए यह आगे की तैयारी का हिस्सा है।
उन्होंने कहा,
“यह सीरीज़ बहुत जरूरी है। हम इसे जीतना चाहते हैं। इस कॉन्फिडेंस और मोमेंटम को वर्ल्ड कप में ले जाना चाहते हैं।”
यह बयान बताता है कि खिलाड़ी अब सिर्फ मैच नहीं, प्रोसेस देख रहे हैं।
क्यों खास है रिंकू की यह पारी?
- टीम में अंदर–बाहर होने के बाद सीधा असर
- दबाव में शांत दिमाग
- आख़िरी ओवर में जिम्मेदारी
- रोल की पूरी समझ
टी20 क्रिकेट में ऐसे फिनिशर कम मिलते हैं, जो खुद से पहले टीम को रखें।















