World Cup – क्रिकेट में समय बहुत तेजी से बदलता है—कल के हीरो आज सवालों के घेरे में होते हैं। और इस वक्त वही सवाल दो सबसे बड़े नामों पर है: रोहित शर्मा और विराट कोहली।
क्या ये दोनों दिग्गज 2027 वर्ल्ड कप तक खेल पाएंगे? या अब नई पीढ़ी को पूरी तरह जिम्मेदारी सौंपने का वक्त आ गया है?
सिर्फ ODI पर फोकस—एक सोची-समझी रणनीति
2024 में T20I से और 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, रोहित और कोहली अब सिर्फ वनडे फॉर्मेट में एक्टिव हैं।
ये कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था।
• workload management
• लंबी उम्र तक खेलना
• और 2027 वर्ल्ड कप पर clear focus
आज के क्रिकेट कैलेंडर में तीनों फॉर्मेट खेलना आसान नहीं है—खासतौर पर जब उम्र 35+ हो।
तो ODI specialization—ये strategy समझ में आती है।
2027 वर्ल्ड कप—realistic या emotional target?
अब सीधा सवाल—क्या ये possible है?
2027 तक:
• रोहित शर्मा — लगभग 40 साल
• विराट कोहली — 38+
ODI क्रिकेट में ये uncommon जरूर है… लेकिन impossible नहीं।
History देखें:
• सचिन तेंदुलकर — 2011 वर्ल्ड कप (38 साल)
• कुमार संगकारा — 2015 तक peak पर
मतलब—अगर fitness और form साथ दें, तो age barrier टूट सकता है।
हरभजन सिंह का साफ message—“उम्र सिर्फ नंबर है”
इस पूरे debate के बीच हरभजन सिंह का बयान काफी सीधा और strong है।
उन्होंने कहा:
“जब तक खिलाड़ी फिट है और perform कर रहा है, उसे सिर्फ उम्र के आधार पर बाहर करना गलत है।”
ये बात surface पर simple लगती है—
लेकिन team selection में यही सबसे बड़ा conflict होता है:
• experience vs youth
• present performance vs future planning
हरभजन का झुकाव साफ है—
“perform करो, team में रहो।”
experience—जो replace नहीं होता
कोहली और रोहित की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ runs नहीं हैं—experience है।
Imagine करो:
• knockout match
• pressure situation
• 80,000 crowd
उस वक्त:
→ technique से ज्यादा temperament काम आता है
और ये चीज़:
• IPL finals
• World Cups
• big tours
से ही आती है।
यही reason है कि selectors ऐसे players को जल्दी drop नहीं करते।
लेकिन ground reality भी उतनी ही tough है
अब थोड़ा uncomfortable truth।
Age के साथ:
• recovery slow होती है
• injuries का risk बढ़ता है
• reflexes थोड़े कम होते हैं
और ODI format:
• 50 overs fielding
• running between wickets
• लगातार travel
ये सब demand करता है high fitness level।
यानि सिर्फ “नाम” से काम नहीं चलेगा—
daily grind maintain करना होगा।
selectors का dilemma—transition कब?
Indian team इस वक्त transition phase में है।
Young players ready हैं:
• शुभमन गिल
• यशस्वी जायसवाल
• श्रेयस अय्यर
अब सवाल ये है:
→ क्या seniors को end तक carry किया जाए?
या
→ धीरे-धीरे transition किया जाए?
गौतम गंभीर—नई सोच, नए results
हरभजन ने इसी बातचीत में गौतम गंभीर की भी तारीफ की।
और ये interesting है क्योंकि:
• गंभीर का approach aggressive है
• results-driven mindset है
• और tough decisions लेने से नहीं डरते
मतलब अगर performance drop हुआ—
तो बड़ा नाम भी safe नहीं रहेगा।
तो final answer क्या है?
Straight answer—
हाँ, खेल सकते हैं… लेकिन conditions के साथ।
| फैक्टर | जरूरी शर्त |
|---|---|
| फिटनेस | top level maintain करना |
| फॉर्म | consistent runs |
| रोल | clear defined (anchor/finisher) |
| टीम balance | youngsters के साथ fit होना |
अगर ये चार चीज़ें tick हो जाती हैं—
तो 2027 में रोहित और कोहली दोनों दिख सकते हैं।















