Rohit – जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में शुक्रवार की शाम का माहौल बिल्कुल अलग था। स्टैंड्स भरे हुए थे, कैमरे तैयार थे और हर किसी की नजर एक ही नाम पर टिकी थी—रोहित शर्मा। वजह साफ थी।
पिछले मैच में सिक्किम के खिलाफ 155 रनों की तूफानी पारी। फैंस को लगा था कि विजय हजारे ट्रॉफी में एक और बड़ा शो देखने को मिलेगा। लेकिन क्रिकेट की खूबसूरती भी यही है—यह आपको पल भर में जमीन पर ला पटकता है।
और यही हुआ। पहली गेंद। पहला शॉट। और रोहित शर्मा… गोल्डन डक।
पहली गेंद, पहला झटका: रोहित शर्मा आउट
मुंबई बनाम उत्तराखंड मुकाबले में टॉस जीतकर उत्तराखंड ने पहले गेंदबाजी का फैसला किया। नया गेंदबाज था—देवेंद्र सिंह बोरा। उम्र 25 साल, लिस्ट ए करियर का महज तीसरा मैच।
पहले ओवर की पहली गेंद।
रोहित शर्मा ने अपना फेवरेट पुल शॉट खेला।
लेकिन बल्ले पर गेंद पूरी तरह आई नहीं।
डीप स्क्वायर लेग पर फील्डिंग कर रहे जगमोहन नागरकोटी ने कैच लपका। पहली कोशिश में गेंद हाथ से छिटकी, स्टेडियम में सांसें अटक गईं, लेकिन दूसरी कोशिश में उन्होंने कैच पूरा कर लिया।
और सवाई मानसिंह स्टेडियम… एकदम सन्न।
देवेंद्र बोरा: एक गेंद, उम्र भर की याद
यह विकेट देवेंद्र बोरा के करियर का वो पल बन गया, जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूलेंगे। रोहित शर्मा को पहली गेंद पर आउट करना—वो भी घरेलू वनडे टूर्नामेंट में—किसी सपने से कम नहीं।
देवेंद्र बोरा का प्रोफाइल देखें तो कहानी और दिलचस्प हो जाती है।
- उम्र: 25 साल
- लिस्ट ए मैच: सिर्फ 3
- फर्स्ट क्लास मैच: 15
- विकेट: 30
उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अक्टूबर में रणजी ट्रॉफी में आया था, जब उन्होंने बंगाल के खिलाफ 6/79 झटके थे।
उत्तराखंड प्रीमियर लीग से विजय हजारे तक
देवेंद्र बोरा पहली बार चर्चा में आए थे उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) के दौरान। उन्होंने देहरादून वॉरियर्स के लिए खेलते हुए:
- 6 मैच
- 10 विकेट
लिए थे। वहीं से उन्हें घरेलू क्रिकेट में नियमित मौके मिलने शुरू हुए। और अब विजय हजारे ट्रॉफी में रोहित शर्मा का विकेट—यह किसी भी युवा गेंदबाज के लिए पहचान का टिकट होता है।
मुंबई की वापसी: रोहित गए, लेकिन स्कोर रुका नहीं
रोहित शर्मा भले ही खाता नहीं खोल पाए, लेकिन मुंबई की बल्लेबाजी वहां नहीं रुकी। इसके उलट, मिडिल ऑर्डर ने जिम्मेदारी उठाई और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।
मुंबई की बल्लेबाजी (50 ओवर)
| बल्लेबाज | रन |
|---|---|
| मुशीर खान | 55 |
| सरफराज खान | 55 |
| हार्दिक तामोरे | 93 |
| शम्स मुलानी | 48 (35 गेंद) |
मुंबई ने निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट पर 331 रन बनाए। यह स्कोर दिखाता है कि टीम सिर्फ एक स्टार पर निर्भर नहीं है।
हार्दिक तामोरे की अहम पारी
इस पारी की रीढ़ रहे विकेटकीपर-बल्लेबाज हार्दिक तामोरे। 93 रनों की उनकी पारी में संयम भी था और आक्रामकता भी। जब शुरुआती झटका लगा, तब उन्होंने पारी को संभाला और अंत तक टिके।
गेंदबाजी में भी बोरा सबसे आगे
उत्तराखंड की ओर से गेंदबाजी में भी सबसे प्रभावशाली नाम वही रहा—देवेंद्र सिंह बोरा।
उत्तराखंड की गेंदबाजी
| गेंदबाज | ओवर | रन | विकेट |
|---|---|---|---|
| देवेंद्र बोरा | 10 | 74 | 3 |
| जगमोहन नागरकोटी | — | — | 1 |
| मयंक मिश्रा | — | — | 1 |
| जे सुचित | — | — | 1 |
| युवराज चौधरी | — | — | 1 |
रोहित शर्मा का विकेट, फिर तीन कुल विकेट—यह पूरा मैच बोरा के लिए परफेक्ट पैकेज रहा।
गोल्डन डक भी खेल का हिस्सा
रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी के लिए गोल्डन डक कोई नई बात नहीं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में ऐसा होना हमेशा सुर्खियां बनाता है। खासकर तब, जब पिछले मैच में आपने 155 रन ठोके हों।
यह मैच याद दिलाता है कि:
- घरेलू क्रिकेट आसान नहीं होता
- युवा गेंदबाज भूखे होते हैं
- और नाम से ज्यादा गेंद की अहमियत होती है
क्रिकेट बराबरी का खेल है
विजय हजारे ट्रॉफी ने एक बार फिर दिखा दिया कि यहां हर गेंद मायने रखती है। एक तरफ रोहित शर्मा जैसे सुपरस्टार, दूसरी तरफ देवेंद्र बोरा जैसा उभरता हुआ गेंदबाज—और नतीजा वही, जो क्रिकेट तय करता है।
आज हेडलाइन भले रोहित के गोल्डन डक की हो, लेकिन असली कहानी है देवेंद्र बोरा की पहली गेंद—जो अब उसके करियर की पहचान बन चुकी है।















