Rohit : रोहित शर्मा की वापसी – लेकिन जयपुर में चेतावनी भरा सीन

Atul Kumar
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Rohit – जयपुर की सर्द शाम, सवाई मानसिंह स्टेडियम का प्रैक्टिस सेशन और अचानक उफनता हुआ क्राउड—विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 शुरू होने से ठीक एक दिन पहले माहौल कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गया। वजह साफ थी।

सात साल बाद डोमेस्टिक क्रिकेट में लौट रहे रोहित शर्मा। फर्क बस इतना कि यह किसी मैच का शोर नहीं था, बल्कि एक ऐसी हलचल थी, जिसने सिक्योरिटी सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए।

प्रैक्टिस खत्म कर रोहित जैसे ही ड्रेसिंग रूम की ओर बढ़े, सेल्फी और ऑटोग्राफ के लिए बेकाबू फैंस ने सुरक्षा घेरा तोड़ दिया। कुछ पल के लिए हालात ऐसे लगे मानो कंट्रोल हाथ से फिसल गया हो।

वीडियो में साफ दिखता है—एक फैन रोहित के बेहद करीब पहुंच जाता है। रोहित झुंझलाए ज़रूर दिखे, लेकिन उन्होंने न कोई रिएक्शन दिया, न किसी फैन से कुछ कहा। बस चलते रहे। बाकी काम सिक्योरिटी ने संभाला।

सवाई मानसिंह स्टेडियम में क्या हुआ?

मंगलवार को मुंबई टीम का प्रैक्टिस सेशन था। रोहित शर्मा, जो 24 दिसंबर से शुरू हो रहे विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई के लिए खेलने वाले हैं, लंबे वक्त बाद किसी घरेलू टूर्नामेंट में दिख रहे थे।

जैसे ही प्रैक्टिस खत्म हुई:

  • सैकड़ों फैंस स्टैंड्स और गैलरी से नीचे की ओर बढ़े
  • सिक्योरिटी कॉरिडोर में भीड़ घुस आई
  • एक फैन रोहित के बेहद करीब पहुंच गया

यहीं से मामला गंभीर हो गया। सिक्योरिटी को फौरन हरकत में आना पड़ा। फैंस को पीछे हटाया गया, हॉलवे के दरवाज़े बंद किए गए ताकि कोई और अंदर न आ सके। पूरी घटना का वीडियो मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

रोहित शर्मा का रिएक्शन: गुस्सा या संयम?

वीडियो देखने वालों को एक पल के लिए ऐसा लगा कि रोहित शर्मा चिढ़ गए हैं। चेहरा सख्त था, कदम तेज़ थे। लेकिन गौर करने वाली बात यह रही कि:

  • उन्होंने किसी फैन को कुछ नहीं कहा
  • किसी से उलझे नहीं
  • सिक्योरिटी को काम करने दिया

यह वही रोहित है, जो मैदान पर शांत कप्तान के तौर पर जाने जाते हैं। शायद अनुभव बोल रहा था। शायद यह समझ कि एक शब्द भी मामला बिगाड़ सकता है।

सात साल बाद विजय हजारे में वापसी

रोहित शर्मा आखिरी बार 2017-18 सीज़न में विजय हजारे ट्रॉफी खेले थे। अब 2025-26 में उनकी वापसी सिर्फ एक क्रिकेटिंग इवेंट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पल है।

मुंबई का पहला मुकाबला:

  • मुंबई vs सिक्किम
  • वेन्यू: सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर

यह लिस्ट-ए टूर्नामेंट रोहित के लिए खास इसलिए भी है क्योंकि:

  • वे अब सिर्फ एक ही फॉर्मेट (टेस्ट) में टीम इंडिया के लिए खेल रहे हैं
  • लिमिटेड ओवर्स में भविष्य को लेकर सवाल हैं
  • हर मैच को फैंस “शायद आखिरी बार” की तरह देख रहे हैं

फैंस की दीवानगी: हक या हद?

यह घटना सिर्फ एक सिक्योरिटी लैप्स नहीं है। यह उस बदलते ट्रेंड की झलक है, जहां:

  • घरेलू क्रिकेट में अचानक इंटरनेशनल स्टार्स आ गए हैं
  • फैंस के लिए यह मौका “लाइफटाइम मोमेंट” बन गया है
  • और सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं

रोहित शर्मा को लेकर दीवानगी अलग लेवल की है। करियर का आखिरी पड़ाव, कम मैच, कम मौके—फैंस चाहते हैं बस एक फोटो, एक पल।

लेकिन सवाल वही पुराना है:
क्या किसी खिलाड़ी की पर्सनल सेफ्टी से बड़ा कोई मोमेंट हो सकता है?

घरेलू क्रिकेट में स्टार पावर का साइड इफेक्ट

इस बार विजय हजारे ट्रॉफी कोई साधारण डोमेस्टिक टूर्नामेंट नहीं है।

बड़े नाम मैदान में

  • रोहित शर्मा – मुंबई
  • विराट कोहली – दिल्ली (बेंगलुरु में)
  • शुभमन गिल – पंजाब
  • सूर्यकुमार यादव – मुंबई
  • यशस्वी जायसवाल – मुंबई

इतने बड़े नाम एक साथ डोमेस्टिक में—यह नज़ारा सालों बाद देखने को मिला है। लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी आई है: क्राउड मैनेजमेंट।

घरेलू स्टेडियम्स आमतौर पर:

  • इंटरनेशनल लेवल सिक्योरिटी के लिए डिजाइन नहीं होते
  • VIP मूवमेंट लिमिटेड होता है
  • और फैन एक्सेस ज़्यादा ओपन रहता है

रोहित वाला मामला इसी गैप को उजागर करता है।

बीसीसीआई और स्टेट एसोसिएशन के लिए चेतावनी

यह घटना सिर्फ राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन तक सीमित नहीं है। यह एक वेक-अप कॉल है:

  • बीसीसीआई के लिए
  • सभी स्टेट यूनिट्स के लिए

जब आपने स्टार खिलाड़ियों को डोमेस्टिक खेलने के लिए कहा है, तो:

  • सिक्योरिटी अपग्रेड करनी होगी
  • प्रैक्टिस सेशंस भी हाई-रिस्क माने जाएंगे
  • फैन एंट्री पर सख्ती करनी होगी

बीसीसीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर पहले ही डोमेस्टिक टूर्नामेंट्स के लिए गाइडलाइंस मौजूद हैं, लेकिन ग्राउंड लेवल पर उनका पालन कितना हो रहा है—यह सवाल अब खुलकर सामने है।

सोशल मीडिया पर बहस तेज

वीडियो वायरल होते ही दो तरह की राय सामने आई:

एक तरफ
“फैंस को भी लिमिट समझनी चाहिए”
“यह सेफ्टी का मामला है”

दूसरी तरफ
“रोहित आखिरी फेज में हैं”
“एक फोटो मांगने में क्या गलत है?”

लेकिन क्रिकेट इतिहास गवाह है—छोटी सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती है। ESPNcricinfo और Cricbuzz जैसे प्लेटफॉर्म्स ने भी इस घटना को सिक्योरिटी कंसर्न के तौर पर रिपोर्ट किया है।थ भी हो सकता है।

घरेलू क्रिकेट का नया दौर, नई जिम्मेदारी

विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 एक तरह से भारतीय क्रिकेट के ट्रांजिशन फेज का प्रतीक है। जहां:

  • स्टार्स वापस रूट्स में जा रहे हैं
  • सिस्टम सख्त हो रहा है
  • और फैंस की उम्मीदें कई गुना बढ़ गई हैं

लेकिन इस नए दौर में एक चीज़ साफ होनी चाहिए—
क्रिकेट का जश्न, खिलाड़ियों की सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकता।

रोहित शर्मा ने संयम दिखाया। अब सिस्टम की बारी है।

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