Ruturaj : गायकवाड़ को बाहर करने पर हैरान अश्विन – दिया बड़ा संदेश

Atul Kumar
Published On:
Ruturaj

Ruturaj – जब न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए भारतीय टीम का ऐलान हुआ, तो सबसे ज़्यादा चर्चा किसके आने पर नहीं, बल्कि किसके बाहर होने पर हुई। शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर की वापसी तय मानी जा रही थी, लेकिन उसी वापसी की कीमत ऋतुराज गायकवाड़ को चुकानी पड़ी—और यह फैसला सिर्फ फैंस को ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे तेज़ दिमागों में से एक रविचंद्रन अश्विन को भी हैरान कर गया।

यह वही ऋतुराज हैं जिन्होंने श्रेयस अय्यर की गैरमौजूदगी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ नंबर-4 की जिम्मेदारी संभाली थी। वही ऋतुराज जिन्होंने उस मौके को अपने वनडे करियर के पहले शतक में बदला था। और फिर भी… बाहर।

“यह आसान नहीं है, लेकिन यही भारतीय टीम की हकीकत है” – अश्विन

अश्विन ने गायकवाड़ के चयन से बाहर होने पर कोई लंबा वीडियो नहीं बनाया, न ही किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात की। उन्होंने बस एक छोटा-सा पोस्ट किया—जो अपने आप में बहुत कुछ कह गया।

अश्विन ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,
“कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कैसा महसूस करते हैं। उठो, तैयार हो जाओ, पैड पहनो, मैदान पर जाओ और कभी हार मत मानो। इसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन भारतीय टीम में जगह के लिए मुकाबला ऐसा ही है।”

यह एक सीनियर खिलाड़ी की तरफ से दिया गया रियलिटी चेक था—बिना भावुकता, बिना तंज़ के।

शतक के बाद भी बाहर – गायकवाड़ की कहानी

ऋतुराज गायकवाड़ ने 2022 में वनडे डेब्यू किया था। तब से लेकर अब तक उन्हें लगातार मौके नहीं मिले। कुल मिलाकर—

मैचरनऔसतशतकअर्धशतक
922828.5011

संख्या बहुत बड़ी नहीं दिखती, लेकिन संदर्भ ज़रूरी है।
जब-जब मौका मिला, रोल बदलता रहा।
ओपनिंग से लेकर नंबर-4 तक।
कभी स्थायी भरोसा नहीं।

और साउथ अफ्रीका के खिलाफ जो शतक आया, वह ऐसे समय पर आया जब टीम कॉम्बिनेशन के प्रयोग के दौर में थी।

चयन का गणित: गिल–अय्यर लौटे, गायकवाड़ बाहर

बीसीसीआई की चयन समिति का तर्क साफ है—

  • शुभमन गिल कप्तान हैं
  • श्रेयस अय्यर फिट होकर लौट रहे हैं
  • टॉप और मिडिल ऑर्डर पहले से भरा है

लेकिन यही गणित सवाल भी खड़ा करता है—
अगर शतक लगाने के बाद भी खिलाड़ी बाहर हो जाता है, तो संदेश क्या है?

आकाश चोपड़ा ने भी उठाए सवाल

पूर्व भारतीय ओपनर आकाश चोपड़ा ने भी इस चयन को लेकर सोशल मीडिया पर खुलकर सवाल पूछे। उन्होंने सिर्फ ऋतुराज ही नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की लॉजिक चेन पर उंगली रखी।

आकाश ने X पर लिखा,
“ऋतुराज बाहर हो गए क्योंकि अय्यर वापस आ गए हैं। तिलक भी बाहर हो गए क्योंकि गिल वापस आ गए हैं।”

लेकिन असली सवाल इसके बाद आया।

उन्होंने पूछा—

  • जब साउथ अफ्रीका के खिलाफ मौका था, तो ऋषभ पंत को नंबर-4 पर क्यों नहीं खिलाया गया?
  • अगर वह बैकअप विकेटकीपर हैं, तो अय्यर की गैरमौजूदगी में उन्हें आज़माना ज़्यादा सही नहीं होता?
  • और अगर नीतीश कुमार रेड्डी इतने ज़रूरी हैं, तो वह हर सीरीज़ में बेंच पर क्यों बैठे रहते हैं?

आकाश का सवाल सीधा था—
आप भविष्य के लिए टीम कैसे तैयार करेंगे, अगर खिलाड़ी हमेशा “बैकअप” बनकर ही रह जाएं?

भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती: जगह नहीं, भरोसा

यह मामला सिर्फ ऋतुराज गायकवाड़ का नहीं है।
यह उस भीड़भाड़ वाले भारतीय क्रिकेट सिस्टम का है, जहां—

  • टैलेंट बहुत है
  • मौके कम हैं
  • और भरोसा चुनिंदा नामों तक सीमित रहता है

लेकिन कंटिन्यूटी और मौके के बीच का बैलेंस ही सबसे मुश्किल है।

गायकवाड़ के लिए रास्ता क्या है?

अश्विन का संदेश साफ है—

  • निराशा को साइड में रखो
  • फिर से पैड पहनो
  • फिर से रन बनाओ

घरेलू क्रिकेट, आईपीएल, इंडिया-A—
यही रास्ता है।

और अगर भारतीय क्रिकेट में इतिहास देखें, तो यहां कई करियर इसी तरह की निराशा के बाद चमके हैं।

शतक भी गारंटी नहीं है

ऋतुराज गायकवाड़ का बाहर होना यह याद दिलाता है कि भारतीय टीम में—

  • फॉर्म ज़रूरी है
  • लेकिन रोल उससे भी ज़्यादा
  • और टाइमिंग सबसे अहम

अश्विन की सलाह कठोर लग सकती है, लेकिन वह ईमानदार है।
यह सिस्टम ऐसा ही है।

अब सवाल सिर्फ इतना है—
क्या भारतीय क्रिकेट ऐसे कई शतकवीरों को इंतज़ार में ही रख देगा, या कभी गणित बदलेगा?

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