SA20 : 170 बनना चाहिए था – फाइनल हार के बाद केशव महाराज

Atul Kumar
Published On:
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SA20 – प्रिटोरिया की रात में ट्रॉफी बस एक साझेदारी दूर थी। जब डगआउट में बैठे खिलाड़ी आखिरी ओवरों की ओर देख रहे थे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि 18 ओवर में 155/5 से आगे स्कोरबोर्ड लगभग रुक जाएगा। लेकिन एसए20 लीग का फाइनल ऐसे ही बेरहम पल गढ़ता है। हार के बाद प्रिटोरिया कैपिटल्स के कप्तान केशव महाराज ने बिना किसी बहाने के स्वीकार किया—यहीं मैच हाथ से फिसल गया।

सनराइजर्स ईस्टर्न केप के खिलाफ छह विकेट की हार सिर्फ एक स्कोरलाइन नहीं थी, बल्कि उन छोटी-छोटी चूकों की कहानी थी, जो बड़े मुकाबलों में भारी पड़ जाती हैं।

“170 बनना चाहिए था”—महाराज की दो टूक स्वीकारोक्ति

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराज ने साफ कहा कि उनकी टीम ने पारी के आखिरी हिस्से में खुद पर दबाव बना लिया।

“हमने आखिरी 10–12 गेंदों में सिर्फ तीन रन बनाए। जिस शुरुआत के बाद हम खेल रहे थे, हमें कम से कम 170 या उसके आसपास पहुंचना चाहिए था।”

आंकड़े भी यही कहते हैं। 18 ओवर के बाद प्रिटोरिया पूरी तरह ड्राइविंग सीट पर थी, लेकिन अंतिम दो ओवरों में न तो बाउंड्री आई, न सिंगल-डबल की कोशिश दिखी। ऊपर से महत्वपूर्ण समय पर दो रन आउट—और मोमेंटम पूरी तरह पलट गया।

ब्रेविस की सेंचुरी, लेकिन अधूरा काम

इससे पहले डेवाल्ड ब्रेविस ने फाइनल जैसे दबाव वाले मैच में वह पारी खेली, जिसकी चर्चा सालों होगी।
56 गेंदों पर 101 रन, आठ चौके और सात छक्के—यह एक फाइनल-लेवल इनिंग थी।

उनकी बदौलत कैपिटल्स ने 158 रन तक पहुंचने की उम्मीद जगाई। लेकिन टी20 में “उम्मीद” काफी नहीं होती। आखिरी ओवरों में साथ न मिले, और स्कोर वहीं थम गया।

48/4 से 162/4: स्टब्स-ब्रीटज्के शो

159 रन का लक्ष्य आसान नहीं था, खासकर तब जब सनराइजर्स ने 48 रन पर चार विकेट गंवा दिए थे। यहीं लगा कि मैच प्रिटोरिया की पकड़ में है।

लेकिन फिर आए मैथ्यू ब्रीटज्के और कप्तान ट्रिस्टन स्टब्स।

ब्रीटज्के: नाबाद 68 (49 गेंद)
स्टब्स: नाबाद 63 (41 गेंद)

दोनों के बीच पांचवें विकेट की 114 रन की अटूट साझेदारी ने फाइनल का चेहरा ही बदल दिया। 19.2 ओवर में लक्ष्य हासिल—बिना घबराहट, बिना जल्दबाज़ी।

गेंदबाजी में भी फिसली पकड़

महाराज ने माना कि गेंदबाजी में भी उनकी टीम आखिरी लम्हों में नियंत्रण नहीं रख पाई।

“अंतिम पांच ओवरों में उन्हें 56 रन चाहिए थे। आमतौर पर आप उम्मीद करते हैं कि गेंदबाज वहां मैच जिता देंगे। शायद मुझे पार्ट-टाइम गेंदबाजों से कुछ ओवर कराने चाहिए थे।”

पांचवें गेंदबाज की कमी साफ दिखी।
गिडियोन पीटर्स और ब्राइस पार्सन्स—3.2 ओवर में 50 रन।
फाइनल जैसे मुकाबले में यह अंतर बहुत बड़ा साबित हुआ।

चौथी बार फाइनल, फिर वही अंत

सनराइजर्स ईस्टर्न केप के लिए यह लगातार चौथा फाइनल था—और अनुभव यहां साफ नजर आया। दबाव में कैसे खेलना है, कब रन रोकने हैं और कब एक्सेलेरेटर दबाना है—सब कुछ किताब की तरह।

महाराज ने भी विरोधी टीम की खुलकर तारीफ की।

“स्टब्स को हमने उनकी बेस्ट फॉर्म में देखा। मैथ्यू ने वही एंकर रोल निभाया, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। लक्ष्य का पीछा जिस तरह उन्होंने किया, उसकी तारीफ बनती है।”

इतने करीब आकर भी इतने दूर

हार के बावजूद महाराज ने अपने सीजन को पूरी तरह नकारा नहीं। उन्होंने माना कि टीम कई मुश्किल हालात से निकलकर यहां तक पहुंची।

“हम सात रन पर पांच विकेट गंवाने की स्थिति से उबरे, 140 रन का सफलतापूर्वक बचाव किया। सीजन की शुरुआत में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि हम यहां तक आएंगे।”

उनके शब्दों में दर्द भी था, और यथार्थ भी।

“यह दर्दनाक है, लेकिन ऐसा नहीं कि हमने वर्ल्ड कप हार दिया। हम पॉजिटिव्स लेंगे और अगले सीजन उन विभागों पर काम करेंगे, जहां हम बेहतर हो सकते हैं।”

फाइनल की बारीक लाइन

एसए20 फाइनल ने एक बार फिर याद दिलाया—टी20 क्रिकेट में जीत और हार के बीच की लाइन कितनी पतली होती है।

  • आखिरी दो ओवर
  • एक गलत रन
  • एक मिसिंग गेंदबाज

और कहानी बदल जाती है।

प्रिटोरिया कैपिटल्स ट्रॉफी के बेहद करीब पहुंचकर भी दूर रह गई। वहीं सनराइजर्स ईस्टर्न केप ने दिखा दिया कि फाइनल जीतने के लिए सिर्फ टैलेंट नहीं, टेम्परामेंट चाहिए।

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