Manjrekar : क्रिकेट वर्ल्ड कप सिर्फ वनडे का है – संजय माजरेकर का बड़ा बयान

Atul Kumar
Published On:
Manjrekar

Manjrekar – टी20 विश्व कप के 10वें संस्करण की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। आठ दिन बाद स्टेडियम भरेंगे, ब्रॉडकास्ट ग्राफिक्स चमकेंगे और क्रिकेट की सबसे तेज़ रफ्तार वाली कहानी एक बार फिर शुरू होगी। लेकिन इस शोर-शराबे के बीच एक आवाज़ ऐसी है, जो सीधे परंपरा की जड़ पर हाथ रख रही है—संजय माजरेकर।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और लंबे समय से कमेंट्री बॉक्स की पहचान बन चुके माजरेकर का मानना है कि टी20 विश्व कप को वह दर्जा नहीं मिलना चाहिए, जो 50 ओवर के वनडे विश्व कप को मिलता है। उनके शब्दों में, “क्रिकेट वर्ल्ड कप” कहलाने का असली हक आज भी सिर्फ वनडे प्रारूप के पास है।

क्रिकेट वर्ल्ड कप सिर्फ 50 ओवर का ही है

संजय माजरेकर खुद उस पीढ़ी से आते हैं, जिसने वनडे विश्व कप को क्रिकेट का सबसे बड़ा मंच माना।
वह 1992 और 1996 के वनडे वर्ल्ड कप में भारत का हिस्सा रहे—यानी यह राय सिर्फ एक कमेंटेटर की नहीं, बल्कि एक ऐसे खिलाड़ी की है जिसने उस दौर को जिया है।

माजरेकर का तर्क सीधा है—
टी20 विश्व कप हर दो साल में होता है, जबकि वनडे विश्व कप चार साल के लंबे इंतज़ार के बाद आता है।
यही इंतज़ार, यही दुर्लभता उसे खास बनाती है।

उनके मुताबिक,
“जो चीज़ बार-बार होती है, उसकी गरिमा अपने आप कम हो जाती है।”

X पर खुलकर रखी अपनी बात

माजरेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार बिना किसी घुमाव के रखे।
उन्होंने न सिर्फ टी20 विश्व कप के महत्व पर सवाल उठाया, बल्कि उसके नाम पर भी।

उन्होंने लिखा,
“मेरे लिए ‘क्रिकेट वर्ल्ड कप’ हमेशा 50 ओवरों का वर्ल्ड कप ही रहेगा। हर दो साल में होने वाले टी20 टूर्नामेंट को वह दर्जा नहीं मिलना चाहिए, जो चार साल में एक बार होने वाले वर्ल्ड कप को मिलता है। मैं इसे पुराने नाम—The World T20—से ही देखना पसंद करता हूं।”

यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि 2007 से 2016 तक यह टूर्नामेंट आधिकारिक तौर पर वर्ल्ड टी20 ही कहलाता था।
2021 के बाद आईसीसी ने इसे स्थायी रूप से टी20 वर्ल्ड कप का नाम दिया।

नाम बदला, बहस शुरू हुई

नाम बदलना सिर्फ ब्रांडिंग नहीं होता—यह हैरिटेज से जुड़ा फैसला होता है।
माजरेकर की आपत्ति यहीं से शुरू होती है।

उनका मानना है कि

  • वनडे वर्ल्ड कप = क्रिकेट का सर्वोच्च मंच
  • टी20 = एंटरटेनमेंट, लेकिन परंपरा नहीं

और जब दोनों को एक ही “वर्ल्ड कप” की श्रेणी में रखा जाता है, तो 50 ओवर का टूर्नामेंट अपनी विशिष्टता खो देता है।

ODI क्रिकेट संकट में, इसलिए यह बहस और गहरी

माजरेकर का बयान ऐसे समय में आया है, जब वनडे क्रिकेट खुद अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है।
द्विपक्षीय ODI सीरीज़ कम होती जा रही हैं, कैलेंडर पर टी20 लीग्स का कब्ज़ा बढ़ता जा रहा है।

यहां तक कि क्रिकेट जगत में यह चर्चा भी तेज़ है कि 2027 का वनडे विश्व कप शायद आख़िरी हो—हालांकि आईसीसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

लेकिन डर असली है।

और शायद इसी डर ने माजरेकर की बातों को और तीखा बना दिया है।

रोहित शर्मा की सोच से मेल खाती है यह भावना

दिलचस्प बात यह है कि माजरेकर की यह सोच रोहित शर्मा की भावनाओं से भी मेल खाती है।
भारतीय कप्तान कई बार कह चुके हैं कि उनके लिए 50 ओवर का विश्व कप ही अल्टीमेट प्राइज़ है।

रोहित का तर्क बेहद भावनात्मक है—
वह उसी विश्व कप को देखते हुए बड़े हुए, उसी सपने के लिए उन्होंने सालों मेहनत की।

यही वजह है कि 2023 वनडे विश्व कप फाइनल की हार आज भी उनके लिए सबसे बड़ा ज़ख्म है।
वह उस ट्रॉफी के सबसे करीब थे, जिसे उन्होंने बचपन से दिल में बसाया था।

टी20 की लोकप्रियता बनाम वनडे की विरासत

इस बहस का एक पहलू साफ है—
टी20 क्रिकेट आज ज़्यादा लोकप्रिय है, तेज़ है, टीवी और डिजिटल के लिए परफेक्ट है।

लेकिन लोकप्रियता और महत्व एक जैसी चीज़ नहीं होती।

वनडे वर्ल्ड कप ने

  • 1983 का इतिहास
  • 1999 का रोमांच
  • 2011 की भावना
  • 2019 का क्लासिक
  • और 2023 की टीस

सब कुछ दिया है।

टी20 वर्ल्ड कप अब भी अपनी पहचान बना रहा है।

क्या नाम बदलने से कुछ बदलेगा?

शायद नहीं।
लेकिन माजरेकर का कहना यह नहीं है कि टी20 वर्ल्ड कप बेकार है।

उनका कहना बस इतना है कि—
दो अलग फॉर्मेट्स को एक ही तराज़ू पर मत तोलिये।

वनडे विश्व कप एक पर्व है।
टी20 विश्व कप एक फेस्टिवल।

दोनों की जगह अलग है।

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