Khan – सरफराज खान का नाम अब सिर्फ रन मशीन के तौर पर नहीं लिया जा रहा, बल्कि वह भारतीय चयन प्रक्रिया पर उठते सवालों का चेहरा बन चुका है। घरेलू क्रिकेट में लगातार पहाड़ जैसे स्कोर, इंडिया ए में रन और जब-जब मौका मिला, वहां प्रदर्शन—इसके बावजूद टीम इंडिया के दरवाज़े जैसे उनके लिए बंद ही रहे। अब इस मुद्दे पर पूर्व चयनकर्ता और दिग्गज बल्लेबाज़ दिलीप वेंगसरकर खुलकर सामने आ गए हैं।
अजीत अगरकर की अगुआई वाली मौजूदा चयन समिति पर वेंगसरकर का हमला सीधा और तीखा है। उन्होंने सरफराज को लगातार नजरअंदाज किए जाने को सिर्फ गलत नहीं, बल्कि “शर्मनाक” करार दिया है।
वेंगसरकर का सवाल: परफॉर्म करो, फिर भी मौका नहीं?
अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में दिलीप वेंगसरकर ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें समझ ही नहीं आता कि सरफराज खान को आखिर किस वजह से हर फॉर्मेट में नजरअंदाज किया जा रहा है।
उनके शब्दों में,
“यह मेरे लिए पूरी तरह समझ से बाहर है कि सरफराज को भारत के लिए किसी भी फॉर्मेट में क्यों नहीं चुना जा रहा, जबकि वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।”
यह बयान ऐसे समय आया है, जब सरफराज ने एक बार फिर बल्ले से चयनकर्ताओं को चुनौती दे दी है।
विजय हजारे में धमाका: 75 गेंदों में 157 रन
28 साल के सरफराज खान ने बुधवार को विजय हजारे ट्रॉफी में गोवा के खिलाफ 75 गेंदों पर 157 रन ठोक दिए। यह कोई साधारण पारी नहीं थी—यह एक स्टेटमेंट इनिंग थी।
- स्ट्राइक रेट 200 से ऊपर
- चौके-छक्कों की बारिश
- दबाव में टीम को संभालती पारी
और यह सब ऐसे खिलाड़ी से आ रहा है, जिसे लगातार “लाइन में” बताया जाता रहा, लेकिन प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली।
धर्मशाला टेस्ट की याद दिलाई वेंगसरकर ने
वेंगसरकर ने चयनकर्ताओं को याद दिलाया कि सरफराज जब-जब खेले, उन्होंने टीम को नुकसान नहीं, फायदा ही पहुंचाया।
उन्होंने 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ धर्मशाला टेस्ट का ज़िक्र किया, जहां सरफराज और देवदत्त पड्डीकल ने एक अहम साझेदारी की थी।
“मैंने उसे और देवदत्त पड्डीकल को धर्मशाला में इंग्लैंड के खिलाफ साथ बल्लेबाज़ी करते देखा था। वह बहुत महत्वपूर्ण सत्र था। उन्होंने खूबसूरत बल्लेबाज़ी की और आखिरकार भारत को टेस्ट मैच जिताने में मदद की।”
यानी यह तर्क कि सरफराज को “मौका मिलने पर खुद को साबित करना है”—वेंगसरकर के मुताबिक पहले ही गलत साबित हो चुका है।
ऑस्ट्रेलिया दौरा: जहां सब्र टूट गया
वेंगसरकर की सबसे बड़ी नाराज़गी 2024–25 के ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर है। उस टूर पर सरफराज को टीम में तो शामिल किया गया, लेकिन—
- एक भी टेस्ट नहीं
- एक भी प्लेइंग इलेवन मौका नहीं
वेंगसरकर ने इसे शब्दों में नहीं तौला।
“वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गया था, लेकिन उसे एक भी टेस्ट खेलने का मौका नहीं दिया गया। यह असली शर्म है।”
ऑस्ट्रेलिया जैसे मुश्किल दौरे पर, जहां तकनीकी बल्लेबाज़ों की जरूरत होती है, वहां एक घरेलू दिग्गज को बेंच पर बैठाना—इस फैसले ने कई पूर्व खिलाड़ियों को हैरान किया है।
सरफराज खान का टेस्ट रिकॉर्ड क्या कहता है?
यह बहस सिर्फ भावनाओं पर नहीं, बल्कि आंकड़ों पर भी टिकी है।
सरफराज खान का टेस्ट करियर (अब तक):
| मैच | पारियां | रन | औसत | शतक | अर्धशतक |
|---|---|---|---|---|---|
| 6 | 11 | 371 | 37.10 | 1 | 3 |
उन्होंने 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था और सीमित मौकों में भी खुद को साबित किया। औसत 37 से ऊपर—वह भी टेस्ट क्रिकेट में—किसी भी बल्लेबाज़ के लिए खराब नहीं माना जा सकता।
चयन नीति पर बड़ा सवाल
वेंगसरकर की टिप्पणी सिर्फ एक खिलाड़ी के समर्थन में नहीं है। यह मौजूदा चयन नीति पर एक सिस्टमेटिक सवाल है।
- क्या घरेलू क्रिकेट अब भी मायने रखता है?
- क्या “फिट प्रोफाइल” और “फ्यूचर प्लान” के नाम पर परफॉर्मेंस पीछे छूट रही है?
- क्या एक खिलाड़ी को सालों तक इंतज़ार कराना सही है?
जब पूर्व चयनकर्ता ही “शर्मनाक” शब्द का इस्तेमाल करे, तो साफ है कि मामला गंभीर है।
टीम इंडिया में मिडिल ऑर्डर की तस्वीर
वर्तमान भारतीय टेस्ट टीम में मिडिल ऑर्डर को लेकर अस्थिरता रही है।
- बार-बार बदलाव
- फॉर्म बनाम संभावनाएं
- अनुभव बनाम प्रयोग
ऐसे में सरफराज जैसा बल्लेबाज़, जो स्पिन और तेज गेंदबाज़ी दोनों के खिलाफ रन बना सकता है, बाहर बैठा है—यह सवाल उठना लाज़मी है।
रन कब तक नजरअंदाज होंगे?
सरफराज खान के पास शिकायतों की लंबी सूची नहीं है। उनके पास सिर्फ एक जवाब है—रन।
लेकिन जब रन भी काफी न हों, तो सवाल चयनकर्ताओं से ही पूछा जाएगा। दिलीप वेंगसरकर ने वही किया है—खुलकर, बिना लाग-लपेट।
अब देखना यह है कि यह आवाज़ चयन समिति तक पहुंचती है या नहीं।
क्योंकि घरेलू क्रिकेट का सबसे बड़ा डर यही होता है—
अगर यहां रन भी गारंटी नहीं, तो फिर क्या है?















