BBL : बीबीएल में फेल हुए शाहीन अफरीदी चोट ने बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता

Atul Kumar
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BBL – ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन, तेज़ पिचें, और बड़ी उम्मीदें। लेकिन शाहीन शाह अफरीदी के लिए बिग बैश लीग 2025–26 की शुरुआत सपने जैसी नहीं, बल्कि चेतावनी जैसी रही। पहली बार बीबीएल खेलने उतरे पाकिस्तान के इस स्टार लेफ्ट-आर्म पेसर का प्रदर्शन शुरुआती चार मैचों में ऐसा रहा कि फॉर्म से ज़्यादा फिटनेस पर सवाल उठने लगे। अब उस पर चोट की खबर—और तस्वीर और धुंधली हो गई है।

चार मैच, सिर्फ 2 विकेट, और बीच मैच मैदान छोड़ते हुए लंगड़ाते कदम। इशारा घुटने की चोट की ओर था। आधिकारिक पुष्टि भले न आई हो, लेकिन संकेत साफ हैं—शाहीन के लिए यह दौरा मुश्किल होता जा रहा है। और पाकिस्तान के लिए? टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले यह खबर किसी झटके से कम नहीं।

बीबीएल डेब्यू, लेकिन लय गायब

शाहीन अफरीदी ब्रिसबेन हीट के लिए खेल रहे हैं। उम्मीद थी कि नई लीग, नई चुनौती, और वही पुरानी आग—लेकिन शुरुआत ने निराश किया।

चार मैचों में उनके आंकड़े कुछ यूं रहे:

  • मैच 1: 43 रन, 0 विकेट
  • मैच 2: 49 रन, 1 विकेट
  • मैच 3: 35 रन, 1 विकेट
  • मैच 4: 3 ओवर, 26 रन, 0 विकेट (मैदान से बाहर)

बीबीएल जैसे टूर्नामेंट में जहां इम्पैक्ट गेंदबाज़ों की मांग रहती है, वहां ये नंबर शाहीन के स्तर के बिल्कुल उलट हैं। रन रोकने में दिक्कत, डेथ ओवर्स में धार कम—और फिर चोट।

घुटने की चोट: सिर्फ बीबीएल नहीं, बड़ा सवाल

चौथे मैच के दौरान शाहीन अचानक मैदान छोड़ते दिखे। कैमरे ने पकड़ा—चलने में परेशानी, चेहरे पर चिंता। उन्होंने खुद घुटने की चोट का इशारा किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे बीबीएल से बाहर भी हो सकते हैं। हालांकि फ्रेंचाइज़ी या बोर्ड की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट के नज़रिए से यह खबर भारी है। क्योंकि आगे का कैलेंडर हल्का नहीं है।

टी20 वर्ल्ड कप 2026: टाइमिंग सबसे खराब

फरवरी–मार्च 2026 में भारत और श्रीलंका में होने वाला टी20 वर्ल्ड कप—और शाहीन अफरीदी पाकिस्तान के मुख्य हथियार। नई गेंद से स्विंग, पावरप्ले में विकेट, और डेथ में यॉर्कर—योजना का हर पन्ना शाहीन के नाम से शुरू होता है।

ऐसे में:

  • फॉर्म का गिरना
  • और फिर फिटनेस की चिंता

यह डबल अलार्म है। उपमहाद्वीप की पिचों पर फिट और लय में शाहीन पाकिस्तान की रीढ़ हैं। लेकिन चोट अगर खिंचती है, तो न सिर्फ बीबीएल—पूरी तैयारी प्रभावित हो सकती है।

हालिया फॉर्म: आंकड़े भी साथ नहीं दे रहे

शाहीन का अनुभव सवालों से परे है—96 टी20I, 126 विकेट। लेकिन मौजूदा फॉर्म चिंता बढ़ा रहा है।

पिछले 10 वनडे और टी20 मैचों में:

  • कुल विकेट: 9
  • 4 मैच: 0 विकेट
  • 4 मैच: 1-1 विकेट
  • 2 मैच: 3 और 2 विकेट

यह गिरावट सिर्फ विकेट की नहीं, इम्पैक्ट की है। बल्लेबाज़ अब उन्हें संभाल रहे हैं—लाइन पढ़ रहे हैं, लेंथ पर टिककर खेल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसी जगह पर यह और उजागर हो गया।

बीबीएल की पिचें और शाहीन की चुनौती

ऑस्ट्रेलिया की पिचें आमतौर पर तेज़ गेंदबाज़ों के लिए मददगार मानी जाती हैं। उछाल मिलता है, कैरी रहती है। फिर सवाल उठता है—शाहीन क्यों नहीं चमके?

कुछ संभावित वजहें:

  • लेंथ एडजस्टमेंट: ऑस्ट्रेलियाई बैटर्स बैक-ऑफ-लेंथ पर आराम से खेलते हैं
  • डेथ ओवर्स का दबाव: यॉर्कर की सटीकता में कमी
  • वर्कलोड: लगातार क्रिकेट और रिकवरी गैप कम
  • फिटनेस: घुटने की समस्या ने रफ्तार और फॉलो-थ्रू प्रभावित किया

यह सब मिलकर एक ऐसे पैकेज में बदल जाता है, जहां नाम बड़ा है, लेकिन असर छोटा।

पाकिस्तान के लिए क्यों है यह बड़ी चिंता?

क्योंकि विकल्प सीमित हैं। पाकिस्तान के पास तेज़ गेंदबाज़ तो हैं, लेकिन शाहीन जैसा लेफ्ट-आर्म, पावरप्ले स्पेशलिस्ट नहीं।

टी20 वर्ल्ड कप में:

  • नई गेंद से शुरुआती विकेट
  • दाएं-बाएं कॉम्बिनेशन
  • दबाव में ब्रेकथ्रू

इन तीनों में शाहीन की भूमिका अहम है। अगर वह 100% फिट नहीं होते, तो पूरी बॉलिंग रणनीति बदलनी पड़ेगी।

आगे का रास्ता: ब्रेक, रिकवरी, या रिस्क?

अभी सबसे ज़रूरी फैसला यही है—क्या शाहीन को पूरा आराम दिया जाए?
बीबीएल से बाहर होना बुरा लगेगा, लेकिन वर्ल्ड कप से पहले रिकवरी प्राथमिकता होनी चाहिए।

पाकिस्तान क्रिकेट को यहां संतुलन बनाना होगा:

  • शॉर्ट-टर्म लीग बनाम लॉन्ग-टर्म लक्ष्य
  • मैच फिटनेस बनाम चोट का जोखिम

इतिहास बताता है कि शाहीन जब पूरी तरह फिट होते हैं, तो बड़े मैचों में फर्क पैदा करते हैं। लेकिन अधूरी फिटनेस उन्हें और टीम—दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।

नाम बड़ा है, लेकिन वक्त सख्त

शाहीन शाह अफरीदी के लिए बीबीएल 2025–26 अब तक सीख और चेतावनी दोनों रहा है। फॉर्म डगमगाया, फिटनेस ने डराया—और वर्ल्ड कप की घड़ी तेज़ हो गई है।

पाकिस्तान के लिए यह पल सोचने का है।
जोखिम लेने का नहीं, समझदारी दिखाने का।

क्योंकि टूर्नामेंट बड़े नामों से नहीं, फिट और फॉर्म में खिलाड़ियों से जीते जाते हैं।

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