ODI : शमी पर चयनकर्ताओं की खामोशी तेज, हरभजन ने उठाई आवाज़

Atul Kumar
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ODI – रायपुर की उमस भरी शाम जैसे अब भी हवा में अटकी है—स्टेडियम खाली हो चुका, लाइटें ठंडी पड़ गईं, लेकिन बहस गर्म है। भारत की हार के कुछ घंटे बाद ही हरभजन सिंह ने अपने यूट्यूब चैनल पर सवाल दाग दिया: आखिर मोहम्मद शमी कहां हैं? और टीम इंडिया बुमराह के बिना जीतना कब सीखेगी?

शमी, जिनकी रिवर्स स्विंग कभी आखिरी सत्र में मैच पलट देती थी, अब घरेलू टूर्नामेंटों में चुपचाप ओवर पूरे कर रहे हैं। बंगाल के लिए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने अच्छी गेंदबाज़ी की, जैसा कि कई राज्य संघ रिपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नज़र अभी उन पर नहीं गई—या शायद गई, पर रुककर नहीं देखी।

35 साल की उम्र और 64 टेस्ट, 108 वनडे, 25 टी20 इंटरनेशनल… ऐसे करियर को यूँ ही हवा में नहीं उड़ा दिया जाता। फिर भी शमी मार्च 2025 की ICC Champions Trophy के बाद से नीली जर्सी में मैदान पर नहीं दिखे।

हरभजन का सीधा सवाल: शमी क्यों बाहर?

रायपुर में वनडे हार ने केवल स्कोरलाइन नहीं बदली, चर्चा की दिशा भी बदल दी। हरभजन ने साफ कहा—“शमी कहां हैं? मुझे नहीं पता कि शमी क्यों नहीं खेल रहे?” उनकी आवाज़ में वो पहचान वाली बेचैनी थी, जैसे कोई अनुभवी खिलाड़ी अपनी बिरादरी की अनदेखी को महसूस कर रहा हो।

उन्होंने प्रसिद्ध कृष्णा का उदाहरण दिया—काबिल गेंदबाज़, ताकतवर एक्शन, लेकिन अभी बहुत कुछ सीखना बाकी। रायपुर में 8.2 ओवर में 85 रन देना सिर्फ एक खराब दिन नहीं था, वह एक संकेत था कि अनुभवी विकल्पों की कमी टीम को महंगी पड़ रही है।

हां, रांची वनडे में प्रसिद्ध ने अच्छा बाउंस और नियंत्रण दिखाया, लेकिन छोटे फॉर्मेट में लगातार बेहतर होना ही टिकने की शर्त है।

बुमराह ब्रेक पर हैं, लेकिन ‘बुमराह-लेस इंडिया’ सवाल बना हुआ है

यह कोई रहस्य नहीं कि भारतीय गेंदबाज़ी जसप्रीत बुमराह के इर्द-गिर्द घूमती है—यॉर्कर, वेरिएशन, पॉवरप्ले नियंत्रण, डेथ ओवर का दबदबा। लेकिन हर सीरीज बुमराह को खेलाना भी संभव नहीं, और टीम प्रबंधन ने दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज में उन्हें ब्रेक दिया है।

हरभजन का तर्क दिलचस्प था: “बुमराह का साथ और बगैर बॉलिंग अटैक बिलकुल अलग है। हमें बुमराह के बिना भी मैच जीतने की कला सीखनी होगी।”
उनका संदर्भ इंग्लैंड टेस्ट सीरीज था, जहाँ बुमराह बिना खेले भारत ने कई मैच जीते और सिराज असाधारण थे। पर वनडे में यह संतुलन अभी नहीं दिख रहा।

शमी का केस: फॉर्म? फिटनेस? या चयन की नई दिशा?

शमी का मामला इतना सरल भी नहीं। चयनकर्ता पिछले कुछ महीनों में तेज गेंदबाज़ों को रोटेट कर रहे हैं—वर्कलोड मैनेजमेंट, T20 विश्व कप की तैयारी, और युवा गेंदबाज़ों को मौका देना।
लेकिन एक तथ्य चुभता है: शमी ने घरेलू क्रिकेट में लौटकर अच्छा प्रदर्शन किया है। बंगाल के लिए नई गेंद से वह अब भी धारदार दिखे हैं, और टीम के अंदरूनी रिपोर्ट बताती हैं कि फिटनेस भी स्थिर है।

भारत के आधिकारिक खिलाड़ी डेटा के अनुसार (BCCI Player Stats), पिछले दो वर्षों में शमी की टेस्ट और वनडे औसत गिरी नहीं, उलट भरोसेमंद रही है। ऐसे में लगातार बाहर रहने से सवाल और गहरे हो जाते हैं।

शमी का इंटरनेशनल रिकॉर्ड जल्दी से एक नजर

फॉर्मेटमैचविकेटऔसतइकॉनमी
टेस्ट64229~273.3
ODI108204~255.6
T20I2524~298.9

साफ है—यह आँकड़े किसी ढलान पर गए गेंदबाज़ के नहीं लगते।

भारत की गेंदबाज़ी—कहां अटक रही है?

हरभजन ने एक और कड़ा तीर छोड़ा—“कुलदीप हैं, लेकिन बाकी का क्या?”
भारत के पास विश्वस्तरीय स्पिन विकल्प तो हैं, पर फॉर्म और स्थिरता दोनों में उतार–चढ़ाव है।
पेस डिपार्टमेंट में बुमराह-सिराज के बाद की कतार उतनी गहरी नहीं जितनी पहले हुआ करती थी।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज से यह साफ भी हो गया:

भारतीय गेंदबाज़ों का प्रदर्शन—SA वनडे सीरीज (पहले दो मैच)

गेंदबाज़मैचविकेटइकोनॉमीउल्लेख
प्रसिद्ध कृष्णा237.8रायपुर में महंगे
सिराज125.2नियंत्रित
कुलदीप यादव235.4बीच ओवर्स में असरदार

रायपुर में भारत 359 का पीछा नहीं रोक सका—ODI इतिहास में भारत के खिलाफ चेज करते हुए संयुक्त रूप से सबसे बड़ी जीत। इस तरह के आंकड़े किसी भी टीम मैनेजमेंट को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या अनुभवी गेंदबाज़ों की वापसी जरूरी है।

सीरीज अब 1-1, और विशाखापट्टनम में दबाव दोगुना

तीसरा वनडे शनिवार को विशाखापट्टनम में होगा—और यह सिर्फ सीरीज डिसाइडर नहीं, सिलेक्शन की दिशा तय करने वाला मैच भी बन सकता है।
भारत का टॉप-ऑर्डर लय में है, लेकिन गेंदबाज़ी पर बहुत कुछ टिक गया है।
अगर फिर वही हाल हुआ, तो हरभजन के सवालों की गूंज और तेज होगी:
क्या शमी की जरूरत है?
क्या भारत बुमराह के बिना जीत सकता है?
क्या नए तेज गेंदबाज़ों की ग्रूमिंग सही दिशा में जा रही है?

टीम मैनेजमेंट के जवाब मैदान ही देगा।

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