Iyer – ऑस्ट्रेलिया दौरे की उस एक फील्डिंग मूवमेंट ने श्रेयस अय्यर की जिंदगी कुछ महीनों के लिए पूरी तरह रोक दी थी। मैदान पर गिरते ही दर्द हुआ, लेकिन उस वक्त किसी को—खुद अय्यर को भी—यह अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर है।
स्प्लीन इंजरी। एक ऐसा शब्द, जिसे अय्यर ने खुद माना कि उन्होंने पहले ठीक से सुना तक नहीं था। और फिर अचानक अस्पताल, निगरानी, आराम, और क्रिकेट से दूरी।
न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में उपकप्तान की भूमिका निभा रहे श्रेयस अय्यर ने अब पहली बार उस चोट और अपने संघर्ष पर खुलकर बात की है। जियोहॉटस्टार से बातचीत में उन्होंने जो कहा, वह सिर्फ एक क्रिकेटर की कहानी नहीं है—बल्कि यह उस मानसिक लड़ाई का बयान है, जो किसी भी एथलीट को जानलेवा चोट के बाद लड़नी पड़ती है।
मुझे समझ ही नहीं आया कि ये कितनी खतरनाक चोट है”
अय्यर ने साफ शब्दों में कबूल किया कि शुरुआत में उन्हें चोट की गंभीरता का बिल्कुल अंदाजा नहीं था।
फील्डिंग के दौरान चोट लगी, दर्द हुआ, लेकिन उन्हें लगा कि यह कोई सामान्य मामला होगा। असलियत तब सामने आई जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
उनके शब्दों में, “यह बहुत दर्दनाक था, बहुत ही पीड़ादायक। मुझे तब तक अंदाजा ही नहीं था कि चोट कैसी है, जब तक मुझे यह नहीं बताया गया कि स्प्लीन हमारे शरीर का एक बहुत ही अहम अंग है। सच कहूं तो मुझे तो इस शब्द के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं थी।”
स्प्लीन यानी तिल्ली—एक ऐसा अंग, जो शरीर की इम्यून सिस्टम और ब्लड फिल्टरिंग में अहम भूमिका निभाता है। इस अंग में चोट लगना सीधा-सीधा जान के लिए खतरा हो सकता है। यही वजह है कि अय्यर को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब एक हफ्ते तक उनका इलाज चला।
अस्पताल में एहसास हुआ: “ओह… ये सीरियस है”
अय्यर बताते हैं कि असली डर उन्हें अगले दिन लगा।
“जब मैं अस्पताल में भर्ती था, तब मुझे महसूस हुआ—ओह, ये एक गंभीर चोट थी। हां, तब जाकर समझ आया कि मामला साधारण नहीं है।”
यह वही पल था, जहां एक प्रोफेशनल क्रिकेटर को यह मानना पड़ा कि अब शरीर की सुननी होगी। मैदान पर लौटने की जल्दबाजी नहीं, बल्कि पूरी तरह ठीक होना जरूरी है।
एक एक्टिव इंसान के लिए सबसे मुश्किल चीज: आराम
श्रेयस अय्यर ने बातचीत में अपनी पर्सनैलिटी के बारे में भी खुलकर बताया।
वह उन खिलाड़ियों में से हैं जो खाली बैठना पसंद नहीं करते। ट्रेनिंग, प्रैक्टिस, कुछ न कुछ करते रहना—यह उनका नेचर है।
लेकिन इस चोट ने उन्हें जबरन रुकने पर मजबूर कर दिया।
“मैं ऐसा इंसान हूं जो एक जगह बैठ नहीं सकता। कुछ न कुछ करता रहता हूं। लेकिन इस चोट ने मुझे खुद के बारे में सोचने का वक्त दिया। मुझे समझ में आया कि अब आराम करना जरूरी है। यह ऐसा नहीं था कि आप उठो और सीधे काम शुरू कर दो।”
यहीं से अय्यर की असली जंग शुरू हुई—शरीर के साथ नहीं, बल्कि दिमाग के साथ।
अमिताभ बच्चन से तुलना, और उसकी वजह
इस पूरी कहानी में एक ऐसा संदर्भ भी है जिसने फैंस को चौंका दिया।
श्रेयस अय्यर की स्प्लीन इंजरी की तुलना उसी चोट से की जा रही है, जो अमिताभ बच्चन को 1982 में फिल्म ‘कूली’ की शूटिंग के दौरान लगी थी।
तब पुनीत इस्सर के एक पंच से बिग बी की स्प्लीन बुरी तरह डैमेज हो गई थी। देशभर में उनके लिए दुआएं हुईं, और वह मौत के मुंह से बाहर लौटे।
वापसी आसान नहीं थी, लेकिन जरूरी थी
करीब महीनों के रिहैब, मेडिकल क्लीयरेंस और फिटनेस टेस्ट के बाद अय्यर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की।
पहले वनडे में नाबाद 49 रन—वह पारी सिर्फ स्कोर नहीं थी, बल्कि एक बयान थी।
बुधवार को दूसरे वनडे में वह सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन उस पारी को भी बड़े संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
लंबी चोट के बाद, डर को पीछे छोड़कर फिर से मैदान पर उतरना—यही असली जीत थी।
स्प्लीन इंजरी क्यों होती है इतनी खतरनाक? (संक्षेप में)
| कारण | खतरा |
|---|---|
| इंटरनल ब्लीडिंग | जानलेवा |
| हल्की टक्कर भी | गंभीर नुकसान |
| जल्दी वापसी | दोबारा फटने का जोखिम |
| सर्जरी की नौबत | करियर पर असर |
टीम इंडिया के लिए अय्यर क्यों अहम हैं?
वनडे क्रिकेट में नंबर-4 पर भारत की सबसे बड़ी समस्या पिछले कुछ सालों से स्थिरता रही है।
श्रेयस अय्यर ने इस रोल को पिछले ICC टूर्नामेंट्स में मजबूती से संभाला है।
उनकी मौजूदगी का मतलब है:
- मिडिल ओवर्स में कंट्रोल
- स्पिन के खिलाफ भरोसेमंद बल्लेबाजी
- बड़े मैचों में शांत दिमाग
यही वजह है कि चोट के बावजूद टीम मैनेजमेंट ने उन्हें जल्दबाजी में नहीं उतारा।















