Gill : शुभमन गिल पर पनेसर की चेतावनी ऑल-फॉर्मेट कप्तानी पर सवाल

Atul Kumar
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Gill – शुभमन गिल को लेकर चल रही कप्तानी की बहस में अब एक तीखा, और थोड़ा असहज कर देने वाला, विदेशी सुर जुड़ गया है। इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने बिना लाग-लपेट के कह दिया है कि गिल अभी ऑल-फॉर्मेट कप्तानी के लिए तैयार नहीं हैं।

वजह सिर्फ अनुभव की कमी नहीं, बल्कि उनका क्रिकेटिंग टेम्परामेंट—या पनेसर के शब्दों में कहें तो, “बेपरवाह और सुस्त शॉट्स।”

यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व को लेकर भविष्य की प्लानिंग पर लगातार चर्चा हो रही है।

“बहुत टैलेंट है, लेकिन इंटेंसिटी नहीं”

न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में पनेसर ने शुभमन गिल की बल्लेबाज़ी पर सीधा सवाल खड़ा किया। उनके मुताबिक, गिल के पास हुनर की कमी नहीं है, लेकिन मैच के दौरान उनका रवैया कप्तानी के दबाव के अनुकूल नहीं दिखता।

“वह एक बेपरवाह क्रिकेटर हैं। उनके पास बहुत सारा टैलेंट है, लेकिन वह सुस्त शॉट खेलने लगे हैं। विराट कोहली की आक्रामकता और तीव्रता हर फॉर्मेट में दिखती थी। शुभमन गिल वैसा नहीं कर सकते।”

पनेसर की बात का सार यही है—कप्तानी सिर्फ स्किल नहीं, इंटेंसिटी का खेल भी है।

ऑल-फॉर्मेट कप्तानी? “यह बहुत ज़्यादा है”

पनेसर ने साफ कहा कि तीनों फॉर्मेट की कप्तानी एक साथ संभालना गिल के लिए फिलहाल ओवरलोड बन सकता है।

“उनके ऊपर बहुत सारा बोझ है। वह हर फॉर्मेट के कप्तान नहीं हो सकते। यह उनके लिए बहुत ज्यादा है।”

यह बयान भारतीय क्रिकेट के उस ट्रांज़िशन फेज़ की ओर इशारा करता है, जहां टीम सीनियर लीडर्स के बाद नए चेहरे तलाश रही है—लेकिन सवाल यह है कि क्या जल्दबाज़ी सही होगी?

टेस्ट क्रिकेट में विराट की कमी: “इंटेंसिटी गिर गई है”

पनेसर की सबसे कड़ी टिप्पणी टेस्ट क्रिकेट को लेकर आई। उनका मानना है कि विराट कोहली की गैरमौजूदगी का असर सबसे ज़्यादा रेड-बॉल क्रिकेट में दिख रहा है।

“वाइट-बॉल क्रिकेट में आप विराट कोहली को बहुत ज़्यादा मिस नहीं करेंगे। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी कमी साफ खलती है। विराट नहीं हैं तो टीम की इंटेंसिटी कम हो गई है।”

यह सिर्फ कप्तानी की बात नहीं है—यह ड्रेसिंग रूम की ऊर्जा, मैदान पर बॉडी लैंग्वेज और लंबे स्पेल में लड़ने की मानसिकता की बात है।

“भारतीय खिलाड़ी टेस्ट के लिए तैयार नहीं”

पनेसर यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक बड़ा सिस्टम लेवल का आरोप भी लगाया—कि भारतीय खिलाड़ी अब टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार ही नहीं किए जा रहे।

“भारत में जो खिलाड़ी टी20 और वनडे में अच्छा करते हैं, वे टेस्ट क्रिकेट में अच्छा नहीं कर पाते। खिलाड़ी टेस्ट के लिए तैयार नहीं हैं।”

यह बयान सीधे-सीधे चयन नीति और घरेलू ढांचे पर सवाल उठाता है।

रणजी बनाम आईपीएल: पैसा बनाम धैर्य

पनेसर की सबसे संवेदनशील टिप्पणी आईपीएल और रणजी ट्रॉफी की तुलना पर आई। उनके मुताबिक, मौजूदा पीढ़ी का झुकाव साफ है।

“खिलाड़ी आईपीएल खेलना चाहते हैं। वे बड़े कॉन्ट्रैक्ट चाहते हैं। उन्हें चार दिन तक क्रिकेट खेलना मुश्किल लगता है। टी20 से ज़्यादा पैसा मिलता है, टेस्ट क्रिकेट से कम।”

यह कोई नई बहस नहीं है, लेकिन जब कोई विदेशी पूर्व खिलाड़ी इसे खुले शब्दों में कहता है, तो बात चुभती ज़रूर है।

गिल और कप्तानी की असली चुनौती

शुभमन गिल आज भारत के सबसे अहम बल्लेबाज़ों में गिने जाते हैं। तकनीक, टाइमिंग और क्लास—सब है। लेकिन कप्तानी उससे आगे की चीज़ मांगती है।

  • दबाव में निर्णय
  • खराब सेशन के बाद रिएक्शन
  • और टीम को खींचकर आगे ले जाने की आग

पनेसर का तर्क यही है कि यह आग गिल में अभी हर फॉर्मेट में एक साथ नहीं दिखती।

क्या यह आलोचना ज़्यादा कठोर है?

यह भी सच है कि—

  • गिल अभी अपने करियर के प्राइम में हैं
  • कप्तानी सीखने की प्रक्रिया होती है
  • और हर लीडर विराट कोहली जैसा नहीं हो सकता

लेकिन पनेसर की बात इसलिए अहम है क्योंकि वह टेस्ट क्रिकेट के नज़रिये से चेतावनी दे रहे हैं, न कि सिर्फ स्टार पावर से प्रभावित होकर।

निष्कर्ष: जल्दबाज़ी बनाम तैयारी

मोंटी पनेसर का बयान किसी एक खिलाड़ी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक सोच के खिलाफ है—कि टैलेंट दिखते ही उसे हर जिम्मेदारी सौंप दी जाए।

शुभमन गिल कप्तान बन सकते हैं।
शायद बहुत अच्छे कप्तान भी।

लेकिन सवाल यही है—कब?

क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में,
और खासकर भारतीय टेस्ट क्रिकेट में,
लीडरशिप सिर्फ रन नहीं, लौह-इच्छाशक्ति मांगती है।

और वह चीज़—
समय के साथ आती है।

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