Gill : टी20 वर्ल्ड कप से बाहर – लेकिन शांत शुभमन गिल का मजबूत संदेश

Atul Kumar
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Gill – कभी-कभी सबसे मुश्किल शॉट मैदान पर नहीं, माइक्रोफोन के सामने खेला जाता है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 की भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद जब शुभमन गिल मीडिया के सामने आए, तो उनके चेहरे पर न नाराज़गी थी, न शिकवा। बस एक ठहराव था—और वही ठहराव उनके बयान को खास बनाता है।

26 साल का यह खिलाड़ी, जो इस वक्त भारत का वनडे और टेस्ट कप्तान है, जानता है कि क्रिकेट में फैसले स्थायी नहीं होते, लेकिन रवैया ज़रूर पहचाना जाता है। और गिल ने वही दिखाया—परिपक्वता।

“मैं वहीं हूं, जहां मुझे होना है”

न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे से पहले गिल ने बेहद साफ लहजे में कहा,
“मैं वहीं हूं, जहां मुझे होना है। मेरी तक़दीर में जो लिखा है, उसे कोई मुझसे छीन नहीं सकता।”

यह बयान किसी हार की सफाई नहीं था। यह उस खिलाड़ी की सोच थी, जो समझता है कि करियर एक फॉर्मेट से नहीं बनता। चयनकर्ताओं का फैसला उन्हें मंज़ूर है, और मौका मिला तो वह पूरी क्षमता के साथ योगदान देंगे—बस इतना ही।

टी20 टीम से बाहर, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं

गिल को अगले महीने शुरू होने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए नहीं चुना गया। आंकड़े देखें तो उन्होंने भारत के लिए
36 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 869 रन,
औसत 28.03 और
स्ट्राइक रेट 138.59 के साथ बनाए हैं।

ये आंकड़े बुरे नहीं हैं, लेकिन भारतीय टी20 टीम की गहराई ऐसी है कि चयन हर बार कठिन हो जाता है। यही भारतीय क्रिकेट की सच्चाई है—यहां फॉर्मेट बदलते ही मुकाबला दोगुना हो जाता है।

न्यूजीलैंड से जुड़ी एक खास याद

गिल की बातों में जब भावनाएं आईं, तो वह न्यूजीलैंड के ज़िक्र पर आईं।

उन्होंने कहा,
“जब हमने पिछली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे खेले थे, तब मेरा डेब्यू हुआ था। मैं हमेशा उस दिन को संजोकर रखता हूं।”

हर खिलाड़ी के करियर में कुछ मैच ऐसे होते हैं, जो स्कोरकार्ड से बाहर रह जाते हैं—लेकिन यादों में हमेशा रहते हैं। गिल के लिए वह दिन वही था।

“कोई भी प्रारूप आसान नहीं होता”

टी20 को अक्सर “फटाफट क्रिकेट” कहकर हल्का कर दिया जाता है, लेकिन गिल इस सोच से सहमत नहीं हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 2011 के बाद कोई वनडे वर्ल्ड कप नहीं जीता।

उनके शब्दों में,
“कोई भी प्रारूप आसान नहीं होता। इसके लिए मेहनत और दृढ़ संकल्प चाहिए।”

यह बयान सिर्फ़ वनडे क्रिकेट की अहमियत नहीं बताता, बल्कि यह भी दिखाता है कि गिल खुद को लंबे रेस का खिलाड़ी मानते हैं—सिर्फ़ टी20 स्पेशलिस्ट नहीं।

चोट, अस्पताल और मुश्किल दौर

पिछला साल गिल के लिए आसान नहीं रहा।
नवंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ के दौरान कोलकाता टेस्ट में लगी गर्दन की चोट ने उन्हें दो दिन अस्पताल में रहने पर मजबूर कर दिया। इसके चलते उन्हें दूसरा टेस्ट और बाद की वनडे सीरीज़ छोड़नी पड़ी।

उन्होंने माना,
“किसी मैच को छोड़कर टीम को खेलते हुए देखना कभी आसान नहीं होता।”

कप्तान के तौर पर यह और भी मुश्किल होता है—क्योंकि मैदान के बाहर बैठकर भी जिम्मेदारी पीछा नहीं छोड़ती।

कप्तानी और तैयारी पर गिल का फोकस

गिल ने साफ कहा कि तैयारी उनके लिए सबसे अहम चीज़ है—खासतौर पर जब प्रारूप बदलता है।

उन्होंने माना कि पिछली दो टेस्ट सीरीज़ में भारत को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिला। सफेद गेंद से लाल गेंद में स्विच करना तभी आसान होता है, जब समय मिले।

आगे क्या? गिल की राह साफ है

भारत टी20 वर्ल्ड कप से पहले

  • 3 वनडे
  • 5 टी20 मुकाबले खेलेगा।

टी20 टीम में नाम नहीं है, लेकिन वनडे और टेस्ट में कप्तानी—यह अपने आप में बड़ा भरोसा है। और गिल उसी भरोसे को अपनी ताकत मान रहे हैं, न कि दबाव।

चुप्पी में छुपा आत्मविश्वास

शुभमन गिल ने कोई लंबा भाषण नहीं दिया।
कोई भावुक बयान नहीं।
कोई चयनकर्ताओं पर सवाल नहीं।

बस एक बात साफ थी—
वह खुद को साबित करने की जल्दी में नहीं हैं।

क्रिकेट में कभी-कभी सबसे मजबूत जवाब वही होता है, जो शांत लहजे में दिया जाए।
और गिल ने वही किया।

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