Ganguly : मेस्सी टूर विवाद कोर्ट पहुंचा – गांगुली ने ठोका मुकदमा

Atul Kumar
Published On:
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Ganguly – कोलकाता में मेस्सी के नाम पर मचे बवाल ने अब क्रिकेट के सबसे बड़े नामों में से एक को सीधे कानूनी लड़ाई में खींच लिया है। सौरव गांगुली—भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान, बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष—ने अपने नाम को “झूठे और अपमानजनक” तरीके से घसीटे जाने पर 50 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा ठोक दिया है।

मामला जुड़ा है लियोनेल मेस्सी के कथित ‘GOAT इंडिया टूर’ विवाद से, और आरोपों के केंद्र में है कोलकाता का एक फुटबॉल फैन क्लब अधिकारी।

गांगुली का साफ कहना है—अब बहुत हो गया।

50 करोड़ की मानहानि याचिका, पुलिस शिकायत भी दर्ज

सौरव गांगुली ने कोलकाता स्थित अर्जेंटीना फुटबॉल फैन क्लब के अधिकारी उत्तम साहा के खिलाफ न सिर्फ 50 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा है, बल्कि कोलकाता पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है।

पीटीआई से बातचीत में गांगुली ने बिना लाग-लपेट के कहा,
“मैंने पुलिस में शिकायत की है और 50 करोड़ का कानूनी नोटिस भेजा है। वह व्यक्ति बिना किसी आधार के जो मन में आता है, बोलता रहता है।”

यह बयान अपने आप में बता देता है कि मामला गांगुली के लिए कितना गंभीर है।

आरोप क्या हैं? मेस्सी टूर के ‘मास्टरमाइंड’ होने का दावा

पूरा विवाद तब भड़का जब उत्तम साहा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि
लियोनेल मेस्सी के ‘GOAT इंडिया टूर’ के असली आयोजक सौरव गांगुली थे,
और इस मामले में गिरफ्तार किए गए सतद्रु दत्ता सिर्फ एक मोहरा हैं।

यहीं से बात गांगुली की प्रतिष्ठा पर सीधा हमला बन गई।

साइबर सेल तक पहुंचा मामला

गांगुली ने कोलकाता पुलिस के साइबर सेल को भेजी गई ईमेल शिकायत में साफ लिखा है कि
इन सार्वजनिक बयानों ने उनकी:

– व्यक्तिगत प्रतिष्ठा
– पेशेवर साख
– और मानसिक शांति

तीनों को नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि दशकों के अपने करियर में उन्होंने देश और दुनिया में एक खिलाड़ी और खेल प्रशासक के रूप में जो नाम कमाया है, ये आरोप बेबुनियाद हैं और जानबूझकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।

13 दिसंबर का कार्यक्रम और साल्ट लेक की हिंसा

विवाद की जड़ 13 दिसंबर का वही बहुचर्चित कार्यक्रम है।
उस दिन सौरव गांगुली को:

– मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
– अन्य गणमान्य अतिथियों

के साथ लियोनेल मेस्सी और उनके दल को सम्मानित करने के लिए मंच पर मौजूद रहना था।

लेकिन हालात बेकाबू हो गए।

मेस्सी के स्टेडियम से समय से पहले निकल जाने के बाद
साल्ट लेक स्टेडियम में दर्शकों ने तोड़फोड़ और हिंसा शुरू कर दी,
जिसके चलते पूरा कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

यहीं से अफवाहों और आरोपों का सिलसिला शुरू हुआ—और उसी का निशाना बने गांगुली।

“नाम घसीटना बर्दाश्त नहीं”—गांगुली का रुख सख्त

गांगुली के ईमेल में एक लाइन खास तौर पर उभरकर आती है—
उनके मुताबिक ये बयान तथ्यों पर नहीं, इरादों पर आधारित हैं।

क्रिकेट से प्रशासन तक का उनका सफर हमेशा सार्वजनिक जांच के दायरे में रहा है,
लेकिन इस मामले में उन्होंने साफ कर दिया है कि
बिना सबूत आरोप लगाने की कीमत चुकानी पड़ेगी।

खेल, स्टारडम और जिम्मेदारी की रेखा

मेस्सी जैसा नाम, करोड़ों की भीड़, सोशल मीडिया का शोर—
इन सबके बीच अफवाहें सबसे तेज़ दौड़ती हैं।

लेकिन गांगुली का यह कदम एक साफ संदेश देता है:
स्टारडम का मतलब यह नहीं कि कोई भी कुछ भी कह दे।

अब यह मामला सिर्फ फुटबॉल फैन क्लब या एक बयान तक सीमित नहीं रहा—
यह कानूनी लड़ाई बन चुका है।

आगे क्या?

– पुलिस जांच जारी
– कानूनी नोटिस का जवाब आना बाकी
– और मानहानि मुकदमे की सुनवाई आगे होगी

लेकिन इतना तय है कि यह विवाद अब
कोर्टरूम में तय होगा, सोशल मीडिया पर नहीं।

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