Sri Lanka – पल्लेकेले की उमस भरी दोपहर में जब वानिंदु हसरंगा ने आयरलैंड के खिलाफ अपना पहला ओवर फेंका, तब स्टैंड्स में बैठे दर्शकों को अंदाज़ा भी नहीं था कि यह उनका इस टूर्नामेंट में आखिरी स्पेल साबित हो सकता है।
कुछ गेंदें, एक हल्की सी असहजता, और फिर फिजियो का मैदान पर आना। शुरुआत में लगा—साधारण ऐंठन होगी। लेकिन रिपोर्ट साफ थी: बाईं मांसपेशियों में खिंचाव। और देखते ही देखते श्रीलंका का सबसे बड़ा टी20 मैच-विजेता टूर्नामेंट से बाहर।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच आई यह खबर सिर्फ एक मेडिकल अपडेट नहीं थी, बल्कि श्रीलंका की रणनीति पर सीधा वार था। टीम मैनेजमेंट को फौरन बैकअप प्लान पर जाना पड़ा। अब हसरंगा की जगह दुशान हेमंथा को स्क्वॉड में शामिल किया गया है।
यह बदलाव आईसीसी की प्रतियोगिता तकनीकी समिति की मंजूरी के बाद आधिकारिक हुआ, जिसकी पुष्टि आईसीसी ने अपनी वेबसाइट पर जारी विज्ञप्ति में की।
हसरंगा का बाहर होना: आंकड़ों से कहीं बड़ा नुकसान
हसरंगा को सिर्फ एक लेग स्पिनर कह देना गलत होगा। वह मिडिल ओवर्स के स्ट्राइक बॉलर हैं। जब खेल फिसल रहा होता है, तब वह विकेट निकालते हैं। और अगर बल्ला हाथ में आ जाए तो 15 गेंदों में मैच का रुख पलट देना उनके लिए नया नहीं।
पिछले तीन वर्षों में टी20I में उनका प्रभाव देखें:
| पैरामीटर | आंकड़ा |
|---|---|
| टी20I मैच | 60+ |
| विकेट | 90+ |
| इकोनॉमी | लगभग 7 रन प्रति ओवर |
| स्ट्राइक रेट | 15-17 गेंद प्रति विकेट |
मिडिल ओवर्स (7–15) में विकेट लेने की उनकी क्षमता श्रीलंका की रणनीति का केंद्र रही है। कप्तान अक्सर पावरप्ले के बाद सीधे उन्हें अटैक पर लाते हैं, ताकि विपक्षी टीम की रफ्तार टूटे।
आयरलैंड के खिलाफ मैच के दौरान चोट लगना समय की दृष्टि से भी खराब रहा। टूर्नामेंट छोटा है, रिकवरी की गुंजाइश कम। मेडिकल टीम ने जोखिम न लेने का फैसला किया और उन्हें बाहर करना पड़ा।
श्रीलंका का अगला मुकाबला ओमान से है। कागज पर आसान। लेकिन टी20 में “आसान” शब्द अक्सर भ्रम पैदा करता है।
दुशान हेमंथा: प्रोफाइल और संभावनाएं
अब बात उस खिलाड़ी की, जिन पर अचानक बड़ी जिम्मेदारी आ गिरी है।
31 वर्षीय दुशान हेमंथा घरेलू सर्किट में जाना-पहचाना नाम हैं। वह भी स्पिन ऑलराउंडर हैं, लेकिन शैली अलग है। हसरंगा जहां आक्रामक लेग स्पिनर हैं, वहीं हेमंथा अधिक कंट्रोल और वैरिएशन पर निर्भर रहते हैं।
उनका अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड फिलहाल सीमित है:
| प्रारूप | मैच | विकेट | भूमिका |
|---|---|---|---|
| वनडे | 5 | 6 | स्पिन ऑलराउंडर |
| टी20I | 3 | 3 | मिडिल ओवर विकल्प |
घरेलू क्रिकेट में उन्होंने लगातार प्रदर्शन किया है, खासकर डेथ ओवर्स से पहले रन रोकने की कला में। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच अलग होता है। यहां हर गलती बाउंड्री बन सकती है।
सवाल अब भी वही है—क्या वह हसरंगा की आक्रामकता की बराबरी कर पाएंगे? शायद नहीं। लेकिन क्या वह नियंत्रण और अनुशासन से टीम को स्थिरता दे सकते हैं? संभव है।
आईसीसी तकनीकी समिति की भूमिका
टूर्नामेंट नियमों के अनुसार किसी भी खिलाड़ी को चोट के कारण बदलने के लिए आईसीसी की तकनीकी समिति की स्वीकृति अनिवार्य होती है। इस समिति में आईसीसी के महाप्रबंधक वसीम खान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
श्रीलंका का अनुरोध मंजूर होते ही हेमंथा आधिकारिक रूप से स्क्वॉड का हिस्सा बन गए।
न्यूजीलैंड भी संकट में
चोट का सिलसिला सिर्फ श्रीलंका तक सीमित नहीं है। न्यूजीलैंड को भी बड़ा झटका लगा है। माइकल ब्रेसवेल पिंडली की चोट के कारण बाहर हो गए हैं। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अपने बयान में कहा कि उन्हें पूरी तरह फिट होने में लगभग तीन सप्ताह लग सकते हैं।
ब्रेसवेल हाल ही में भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में लौटे थे। अभ्यास सत्र के दौरान यह नई चोट उभरी। फिलहाल रिप्लेसमेंट की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रिजर्व खिलाड़ी टीम के साथ हैं।
यह स्थिति दिखाती है कि आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस कितनी निर्णायक हो चुकी है। टूर्नामेंट की तीव्रता, यात्रा, अलग-अलग परिस्थितियां—सब मिलकर शरीर पर दबाव डालती हैं।
चोटों का व्यापक असर
अब तक टूर्नामेंट में प्रमुख चोटें इस प्रकार हैं:
| टीम | खिलाड़ी | चोट | स्थिति |
|---|---|---|---|
| श्रीलंका | वानिंदु हसरंगा | मांसपेशी खिंचाव | बाहर |
| न्यूजीलैंड | माइकल ब्रेसवेल | पिंडली | बाहर |
टी20 क्रिकेट में हर ओवर हाई-इंटेंसिटी होता है। स्पिनर भी फील्डिंग में डाइव लगाते हैं, बल्लेबाज हर गेंद पर पावर हिट की कोशिश करते हैं। शरीर पर लोड बढ़ता ही जाता है।
टीमों के लिए अब सिर्फ रणनीति नहीं, वर्कलोड मैनेजमेंट भी उतना ही अहम हो गया है।
ओमान मैच पहली असली परीक्षा
ओमान के खिलाफ मैच श्रीलंका के लिए सिर्फ दो अंक हासिल करने का मौका नहीं, बल्कि आत्मविश्वास वापस पाने की परीक्षा है। अगर हेमंथा प्लेइंग इलेवन में शामिल होते हैं, तो यह उनके करियर का सबसे बड़ा मंच होगा।
मिडिल ओवर्स में विकेट लेने का दारोमदार अब किस पर होगा? क्या कप्तान अतिरिक्त स्पिन विकल्प जोड़ेंगे? या तेज गेंदबाजों को ज्यादा ओवर देंगे?
हसरंगा की कमी महसूस होगी। इसमें दो राय नहीं। लेकिन क्रिकेट का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा है, जहां अचानक मिले मौके ने खिलाड़ी का करियर बदल दिया।
शायद यही वह क्षण है—जहां दुशान हेमंथा खुद को साबित कर सकते हैं।















