Sri Lanka – इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती हमले के बाद श्रीलंकाई कप्तान चरित असलांका का पाकिस्तान दौरा बीच में छोड़ना अब एक बड़ा क्रिकेट–सियासी तूफान बन चुका है।
श्रीलंका क्रिकेट (SLC) इस फैसले से खासा नाराज़ है, और इसके चलते असलांका की कप्तानी सीधे खतरे में पड़ गई है—ऐसे वक्त में, जब टी20 वर्ल्ड कप बस कुछ महीनों की दूरी पर है।
क्रिकेट बोर्ड ने बयान में तो “बीमारी” का जिक्र किया, लेकिन अंदरूनी सूत्रों और स्थानीय रिपोर्टों ने साफ कर दिया है—असल मुद्दा स्वास्थ्य नहीं, बल्कि सुरक्षा को लेकर टीम के भीतर पैदा हुआ तनाव था।
और इसी तनाव ने पूरी कप्तानी का समीकरण ही बदल दिया।
पाकिस्तान दौरा बीच में छोड़ना—SL बोर्ड को नागवार
असलांका पाकिस्तान में वनडे सीरीज की कप्तानी कर रहे थे।
इस्लामाबाद में आत्मघाती बम हमले के बाद वे दौरा पूरी तरह रद्द करना चाहते थे और कथित तौर पर अपने साथियों को भी वापसी के लिए प्रेरित कर रहे थे।
यह बात SLC को बिल्कुल पसंद नहीं आई।
बोर्ड पहले ही PCB से सुरक्षा आश्वासन ले चुका था, और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड प्रमुख मोहसिन नक़वी ने “कड़ी सुरक्षा” का वादा किया था।
इसके बावजूद असलांका का लौटने का निर्णय उनके और बोर्ड के बीच टकराव का केंद्र बन गया।
कप्तानी दासुन शनाका के हाथ—लेकिन बोर्ड का बयान गोलमोल
SL बोर्ड ने आधिकारिक बयान में कहा कि:
- असलांका वायरल बुखार के कारण वापस बुलाए गए
- उनकी जगह दासुन शनाका कप्तान होंगे
हालांकि, कोलंबो में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब चयन समिति प्रमुख उपुल थरंगा से पूछा गया कि:
- क्या असलांका को कप्तानी से हटा दिया गया है?
- क्या शनाका टी20 वर्ल्ड कप में भी कप्तान बनेंगे?
तो उनका जवाब था—“नो कमेंट।”
यह “नो कमेंट” ही बताता है कि अंदर कुछ खदबदा रहा है।
क्या यह सिर्फ बीमारी का मामला है? घटनाक्रम कुछ और कहानी कह रहा है
SLC ने 17 नवंबर को जानकारी दी थी कि:
- असलांका और तेज गेंदबाज असिथ फर्नांडो बीमारी के कारण पाकिस्तान छोड़ रहे हैं
- उन्हें “बेहतर मेडिकल सुविधा” के लिए स्वदेश बुलाया गया
लेकिन उसी समय कई खिलाड़ियों की ओर से सुरक्षा चिंताएं उभर रही थीं।
टीम का एक हिस्सा देश छोड़ना चाहता था, जबकि बोर्ड और PCB चाह रहे थे कि श्रृंखला बिना रुकावट जारी रहे।
असलांका—कप्तान होने के नाते—इस दबाव के बीच सबसे पहली राजनीतिक लाइन पर खड़े थे।
दबी आवाज में बड़ा सवाल—क्या असलांका ने टीम की “इच्छा” का समर्थन किया?
रिपोर्ट्स का दावा है कि कई खिलाड़ी पाकिस्तान छोड़ना चाहते थे।
ऐसे माहौल में:
- कप्तान अगर टीम का पक्ष ले
- और बोर्ड उसके उलट निर्णय दे
- तो टकराव होना लगभग तय है
यही शायद वजह है कि SLC असलांका के रवैये से असहज है।
कप्तानी एक “इंस्टिट्यूशनल रोल” है—और बोर्ड चाहता है कि कप्तान आधिकारिक फैसले की लाइन में चले।
T20 वर्ल्ड कप से पहले कप्तानी संकट—श्रीलंका के लिए खतरनाक संकेत
वर्ल्ड कप फरवरी–मार्च में है।
ऐसे वक्त में कप्तान बदलना किसी भी टीम में अस्थिरता ला देता है।
दासुन शनाका अनुभवी हैं, लेकिन पिछले एक साल में T20 फॉर्म ने उन्हें चुनौती दी है।
अगर उन्हें स्थायी कप्तान बनाया जाता है—तो यह बदलाव खिलाड़ियों के मन में भी सवाल खड़े कर सकता है।
SLC के सामने अब तीन विकल्प हैं:
- शनाका को वर्ल्ड कप तक कप्तान बनाए रखना
- कप्तानी असलांका को वापस देना (जो अभी मुश्किल लग रहा)
- पूरी तरह नया कप्तान तैयार करना (जैसे कुसल मेंडिस या धनंजय डी सिल्वा)
अगले कुछ हफ्ते श्रीलंकाई क्रिकेट की दिशा तय कर देंगे।
सुरक्षा बनाम बोर्ड—2009 की यादें अभी भी ज़िंदा
श्रीलंका की टीम लगातार यह कहती आई है कि सुरक्षा मुद्दे उसे गंभीरता से प्रभावित करते हैं।
2009 में लाहौर में श्रीलंकाई टीम पर हुआ हमला क्रिकेट इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक है।
इसलिए जब कोई घटना—जैसे इस्लामाबाद बम धमाका—करीब हो, तो श्रीलंकाई खिलाड़ियों का असहज होना समझ में आता है।
लेकिन बोर्ड अपने राजनीतिक–कूटनीतिक रिश्तों, आर्थिक हितों और द्विपक्षीय दौरे की मजबूरियों को भी देखता है।
यहीं दोनों पक्षों की प्राथमिकताएं टकराती हैं।















