Smith – ऑस्ट्रेलिया की टी20 वर्ल्ड कप 2026 टीम जैसे ही सामने आई, सबसे बड़ा सवाल उसी पल हवा में तैर गया—स्टीव स्मिथ कहां हैं? बिग बैश लीग में शतक, बीते दो सालों में टी20 में गजब की निरंतरता और 150 से ऊपर का स्ट्राइक रेट… फिर भी टीम से बाहर।
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में फैसले हमेशा ठंडे दिमाग से लिए जाते हैं, लेकिन इस बार यह फैसला थोड़ा ज्यादा चुभता है।
स्मिथ बाहर, हैरानी क्यों हो रही है?
स्टीव स्मिथ को लेकर चर्चा यूं ही नहीं हो रही। 2024 के टी20 वर्ल्ड कप के बाद से उन्होंने इस फॉर्मेट में खुद को पूरी तरह रीइन्वेंट किया है। टेस्ट और वनडे के धैर्य वाले स्मिथ अब टी20 में भी उसी आत्मविश्वास से खेलते दिखे हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि अब रन तेजी से निकल रहे हैं।
पिछले दो सालों के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि यह सिर्फ फॉर्म नहीं, बल्कि एक सस्टेन्ड परफॉर्मेंस है।
2024 वर्ल्ड कप के बाद स्टीव स्मिथ का टी20 रिकॉर्ड
| पारियां | रन | औसत | स्ट्राइक रेट | 50+ | 100 |
|---|---|---|---|---|---|
| 25 | — | 49.73 | 156.2 | 6 | 2 |
ये नंबर किसी फ्लोटिंग फिनिशर के नहीं, बल्कि एक ऐसे बल्लेबाज के हैं जो इन्निंग्स संभाल भी सकता है और खत्म भी। बिग बैश लीग में हालिया शतक ने इस दावे पर मुहर लगा दी थी।
फिर टीम से बाहर क्यों?
यही सबसे बड़ा सवाल है। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी 15 सदस्यीय टीम में भविष्य को प्राथमिकता दी है। टीम का झुकाव साफ तौर पर पावर हिटर्स, मल्टी-डायमेंशनल ऑलराउंडर्स और एथलेटिक फील्डर्स की तरफ है।
स्मिथ की उम्र, उनका टेस्ट बैकग्राउंड और शायद उनका पारंपरिक इमेज—ये तीनों बातें चयनकर्ताओं के दिमाग में जरूर रही होंगी। ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम को ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है जो हर मैच में 180+ स्कोर के गेम में सहज हों।
ऑस्ट्रेलिया की 15 सदस्यीय टीम: एक नजर
| खिलाड़ी |
|---|
| मिचेल मार्श (कप्तान) |
| जेवियर बार्टलेट |
| कूपर कॉनॉली |
| टिम डेविड |
| बेन ड्वार्शियस |
| कैमरून ग्रीन |
| नाथन एलिस |
| जोश हेज़लवुड |
| ट्रैविस हेड |
| जोश इंग्लिस |
| मैथ्यू कुहनेमैन |
| ग्लेन मैक्सवेल |
| मैथ्यू रेनशॉ |
| मार्कस स्टोइनिस |
| एडम ज़म्पा |
इस लिस्ट में एक बात तुरंत दिखती है—कोई पारंपरिक एंकर नहीं। टीम पूरी तरह से आक्रामक डीएनए पर बनी है।
पैट कमिंस और स्मिथ दोनों बाहर: दोहरा झटका
पैट कमिंस का बाहर होना चोट की वजह से समझ में आता है। लेकिन जब कमिंस और स्मिथ—दोनों सीनियर लीडर्स टीम में नहीं हैं—तो यह ऑस्ट्रेलिया की सोच में एक पीढ़ीगत बदलाव को दर्शाता है।
हेजलवुड लीड पेसर होंगे, लेकिन उनके साथ न तो स्टार्क हैं और न ही कमिंस। यानी वह डरावनी ऑस्ट्रेलियाई तिकड़ी अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है।
बल्लेबाजी: ताकत ही ताकत
इस टीम की बल्लेबाजी कागज़ पर बेहद मजबूत दिखती है।
- ट्रैविस हेड – पावरप्ले का एक्स फैक्टर
- मिचेल मार्श – कप्तान और मिडिल ऑर्डर का इंजन
- ग्लेन मैक्सवेल – शायद आखिरी “बिग शो”
- टिम डेविड – डेथ ओवर्स का हथौड़ा
- कैमरून ग्रीन – लंबाई, ताकत और संतुलन
मैक्सवेल को लेकर खास चर्चा है। उम्र और फिटनेस को देखते हुए यह उनका आखिरी टी20 वर्ल्ड कप हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया शायद एक बार फिर “ऑल-इन” जाना चाहता है।
गेंदबाजी में दिख रही है कमी
जहां बल्लेबाजी मजबूत है, वहीं गेंदबाजी में सवाल भी हैं। स्टार्क और कमिंस की गैरमौजूदगी भारतीय परिस्थितियों में भारी पड़ सकती है।
| पहलू | स्थिति |
|---|---|
| नई गेंद | हेजलवुड पर ज्यादा दबाव |
| डेथ ओवर्स | अनुभव की कमी |
| स्पिन | ज़म्पा पर निर्भरता |
भारतीय पिचों पर वैरायटी और रिवर्स स्विंग अहम होती है। स्टार्क जैसे लेफ्ट-आर्म पेसर की कमी यहां साफ महसूस हो सकती है।
स्मिथ बनाम टीम बैलेंस
यहीं पर स्मिथ की गैरमौजूदगी और ज्यादा खलती है। वह बल्लेबाजी को स्थिरता दे सकते थे, खासकर तब जब शुरुआती ओवरों में विकेट गिरें। बड़े टूर्नामेंट में हर मैच 200 रन का नहीं होता—कभी-कभी 160 का स्कोर भी डिफेंड करना पड़ता है।
और ऐसे मैचों में स्टीव स्मिथ जैसे बल्लेबाज की कीमत अलग होती है।
2021 की याद, 2022 और 2024 की सीख
ऑस्ट्रेलिया ने 2021 में टी20 वर्ल्ड कप जीता था। तब टीम का संतुलन अलग था—अनुभव और ताकत का सही मिश्रण। लेकिन 2022 और 2024 में वही टीम लड़खड़ा गई।
अब 2026 के लिए उन्होंने एक नई दिशा चुनी है। सवाल सिर्फ यह है कि क्या यह दिशा सही है?















