Gavaskar : उम्मीदों का बोझ – गावस्कर ने बताया क्यों फेल हो रहे हैं अभिषेक शर्मा

Atul Kumar
Published On:
Gavaskar

Gavaskar – तीन मैच। तीन बार शून्य। और अब सुपर-8 से पहले सबसे बड़ा सवाल—क्या अभिषेक शर्मा दबाव में आ गए हैं? टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जहां दूसरे बल्लेबाज 150-200 रन के आंकड़े पार कर चुके हैं, वहीं दुनिया के नंबर-1 टी20 बल्लेबाज का खाता तक नहीं खुला। यही वजह है कि अब चर्चा सिर्फ फॉर्म की नहीं, मानसिकता की भी हो रही है।

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने इस मुद्दे पर सीधी बात की है—“उम्मीदों का बोझ।”

“पहली गेंद पर सिक्स” की उम्मीद

स्टार स्पोर्ट्स पर बातचीत में गावस्कर ने कहा, “शायद उम्मीदें उस पर थोड़ी ज़्यादा भारी पड़ रही हैं… बड़ा खिलाड़ी, छक्के मारने वाला, टीम का नंबर 1 बैटर—ये टैग कभी-कभी खिलाड़ी को जल्दी शॉट खेलने के लिए मजबूर कर देते हैं।”

गावस्कर का इशारा साफ था—अभिषेक शुरुआत में ही बड़ा शॉट खेलने की कोशिश कर रहे हैं। और टी20 में, खासकर नई गेंद के खिलाफ, यह जोखिम भरा फैसला है।

पहले मैच में अगर उन्हें एक ठोस शुरुआत मिल जाती, तो शायद कहानी अलग होती। लेकिन अब हर पारी एक परीक्षा बन गई है।

आंकड़ों की सच्चाई

अब तक टी20 वर्ल्ड कप 2026 में:

मैचरनगेंदेंआउट होने का तरीका
बनाम USA0बड़ा शॉट, कैच
बनाम पाकिस्तान0आक्रामक प्रयास
बनाम नीदरलैंड0शॉट की जल्दबाजी

तीन पारियां, तीन बार शून्य।
यह सिर्फ खराब फॉर्म नहीं—एक पैटर्न है।

गावस्कर की सलाह: “डॉट बॉल से मत डरो”

गावस्कर का सुझाव दिलचस्प है—और व्यावहारिक भी।

“अगर चार डॉट बॉल भी हो जाएं, तो कोई बात नहीं। अगली चार से आठ गेंदों में वह इसकी भरपाई कर सकता है।”

यह आधुनिक टी20 का बड़ा सबक है। हर गेंद पर रन बनाने की मजबूरी नहीं होती। खासकर तब जब आपके पास पावर-गेम है।

अभिषेक के पास शॉट्स की कमी नहीं है—कवर ड्राइव, पुल, लॉन्ग-ऑन के ऊपर से छक्का। सवाल सिर्फ चयन का है।

क्या नंबर-1 रैंकिंग भी दबाव है?

हर कोई उम्मीद करता है—पहली गेंद पर चौका।
पहले ओवर में छक्का।
पावरप्ले में धमाका।

लेकिन हर पिच एक जैसी नहीं होती। पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ पिचें धीमी थीं। वहां टिककर खेलना ज्यादा जरूरी था।

तकनीकी या मानसिक?

तकनीकी खामी कम दिखती है। उनका बैट-स्विंग साफ है, हेड पोजिशन स्थिर। समस्या अधिकतर शॉट चयन की लगती है।

नई गेंद स्विंग कर रही हो और आप लाइन के पार खेलने जाएं—रिस्क बढ़ जाता है।

गावस्कर का कहना है कि उन्हें “खुद को थोड़ा समय देना होगा।”

यह वही सलाह है जो कभी वीरेंद्र सहवाग को भी दी जाती थी—और उन्होंने अपने तरीके से संतुलन खोज लिया था।

सुपर-8: नई शुरुआत?

अब अभिषेक का खाता सीधे सुपर-8 में खुलेगा।
और शायद यह उनके लिए अच्छा भी हो।

ग्रुप स्टेज का दबाव खत्म।
नया चरण।
नया मानसिक रीसेट।

टी20 क्रिकेट में फॉर्म एक पारी दूर होती है। एक 40 रन की तेज पारी पूरी कहानी बदल सकती है।

भारत सुपर-8 में पहुंच चुका है। टीम संतुलित दिख रही है। लेकिन टॉप-ऑर्डर से स्थिरता मिलना जरूरी है।

अगर अभिषेक अपनी स्वाभाविक आक्रामकता को थोड़ी धैर्य के साथ मिलाएं, तो वह फिर वही मैच-विनर बन सकते हैं जिन्हें दुनिया जानती है।

सुनील गावस्कर की बात कड़ी नहीं, बल्कि समझदारी भरी है।
डॉट बॉल दुश्मन नहीं।
जल्दबाजी असली खतरा है।

अभिषेक शर्मा के पास टैलेंट है, ताकत है, आत्मविश्वास भी है।
अब जरूरत है—दो ओवर खुद को देने की।

शायद सुपर-8 में उनका असली वर्ल्ड कप शुरू हो।

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