Sunil Gavaska – अहमदाबाद में 76 रन की हार के बाद जहां टीम मैनेजमेंट पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं सुनील गावस्कर ने सीधे बल्लेबाजों की मानसिकता पर उंगली रख दी है। उनके शब्द नरम नहीं थे—“अहं छोड़िए, हालात के मुताबिक खेलिए।”
गावस्कर का इशारा साफ था। टी20 क्रिकेट सिर्फ ताकत का खेल नहीं, समझ का भी है। और भारत उस रात समझ में पीछे रह गया।
हर गेंद बाउंड्री के लिए नहीं होती
जि स्टार से बातचीत में गावस्कर ने कहा,
“भारतीय बल्लेबाजों को ब्रेविस और मिलर की साझेदारी से सीख लेकर इस तरह का दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत थी। वे अति आत्मविश्वास के साथ उतरे, हर गेंद पर बल्ला चलाया और विकेट गंवा दिए।”
यह बयान सीधे उस पावरप्ले पर फिट बैठता है, जहां भारत ने 31/3 का स्कोर बनाया।
ईशान किशन – 0
अभिषेक शर्मा – 15
तिलक वर्मा – 1
तीनों विकेट जल्दी गिरे, और मैच का रुख वहीं से बदल गया।
मिलर-ब्रेविस से क्या सीख?
दक्षिण अफ्रीका 20/3 पर था। मैच भारत की मुट्ठी में दिख रहा था। लेकिन फिर आया संयम।
मिलर और ब्रेविस ने 97 रन की साझेदारी की।
कोई हड़बड़ी नहीं।
गैप ढूंढे, स्ट्राइक रोटेट की, खराब गेंद का इंतजार किया।
चौथे विकेट की साझेदारी
| बल्लेबाज | रन | गेंद |
|---|---|---|
| डेविड मिलर | 63 | 35 |
| डेवाल्ड ब्रेविस | 45 | 29 |
| साझेदारी | 97 | 51 |
गावस्कर का कहना है—भारत ने यही सबक नहीं लिया।
“अगर उन्होंने मुश्किल पिच पर अच्छा स्कोर किया है, तो आपको उनका विश्लेषण करना चाहिए था और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करनी चाहिए थी।”
तिलक वर्मा पर खास टिप्पणी
गावस्कर ने तिलक वर्मा का नाम लेकर कहा,
“तिलक बेहद चतुर बल्लेबाज है, लेकिन इस मैच में उनके खेलने के तरीके से मैं निराश था। उन्हें क्रीज पर समय बिताना चाहिए था।”
टी20 में “एंकर” की भूमिका कम आंकी जाती है, लेकिन 180+ के पीछा करते समय साझेदारी ही मैच जिंदा रखती है।
भारत 51/5 हो गया—यहीं मुकाबला खत्म हो गया।
अहं बनाम हालात
गावस्कर का सबसे बड़ा संदेश यही था—
टी20 आक्रामक खेल है, लेकिन आक्रामकता और लापरवाही अलग चीजें हैं।
हर गेंद छक्के के लिए नहीं होती।
हर ओवर 15 रन का नहीं होता।
कभी-कभी 7-8 रन लेकर विकेट बचाना ही जीत की बुनियाद होता है।
अक्षर की वापसी?
भारत का अगला मुकाबला जिम्बाब्वे से है। गावस्कर चाहते हैं कि अक्षर पटेल की वापसी हो।
उन्होंने कहा,
“जिम्बाब्वे की टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाज कम हैं। ऐसे में मैं अक्षर को देखना चाहूंगा। आप उन्हें अर्शदीप की जगह ला सकते हैं, लेकिन अर्शदीप ने अच्छा गेंदबाजी की है, तो शायद वॉशिंगटन को बाहर बैठना पड़े।”
यह बयान भी महत्वपूर्ण है—टीम कॉम्बिनेशन पर चर्चा अब खुलकर हो रही है।
भारत के लिए असली सबक
• पावरप्ले में संयम
• साझेदारी पर जोर
• पिच के अनुसार रणनीति
• चयन में स्पष्टता
भारत अभी टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुआ है। लेकिन यह हार चेतावनी है कि सिर्फ नाम और फॉर्मेट की प्रतिष्ठा से मैच नहीं जीतते।
गावस्कर का संदेश सादा है—
टी20 में भी टेस्ट जैसी समझ चाहिए।
और कभी-कभी सबसे बड़ा शॉट होता है—विकेट बचाना।















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