World Cup : तीन दिन तीन शतक टी20 वर्ल्ड कप 2026 ने रचा नया इतिहास

Atul Kumar
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World Cup – तीन दिन। तीन देश। तीन शतक। और टी20 वर्ल्ड कप 2026 ने रिकॉर्ड बुक का पन्ना ऐसे पलटा है कि अब पीछे देखना मुश्किल लग रहा है। 16 से 18 फरवरी के बीच जो हुआ, वह इस फॉर्मेट के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। बल्लेबाजों ने सिर्फ रन नहीं बनाए—उन्होंने सांख्यिकीय संतुलन ही बदल दिया।

आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 अब आधिकारिक तौर पर इतिहास का सबसे ज्यादा शतक वाला एडिशन बन चुका है। और टूर्नामेंट अभी जारी है।

तीन दिन, तीन शतक: कैसे बना रिकॉर्ड

शुरुआत 16 फरवरी से हुई।

श्रीलंका के पाथुम निसानका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 52 गेंदों में नाबाद 100 रन जड़े। वह टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने। यह सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी—यह विश्व कप के टोन सेट करने जैसा था।

17 फरवरी को कनाडा के युवा बल्लेबाज युवराज सामरा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 110 रन ठोककर सनसनी फैला दी। एसोसिएट देश का खिलाड़ी, और वह भी इतनी कम उम्र में—यह वैश्विक क्रिकेट के विस्तार का संकेत था।

18 फरवरी को पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान ने नामीबिया के खिलाफ मांसपेशियों में खिंचाव के बावजूद नाबाद 100 रन पूरे किए। दबाव में खेली गई यह पारी पाकिस्तान के अभियान के लिए निर्णायक साबित हुई।

तीन लगातार दिन। तीन अलग-अलग देश। तीन शतक।
टी20 विश्व कप इतिहास में पहली बार।

2026: अब तक का सबसे ज्यादा शतक वाला संस्करण

इससे पहले किसी भी एक टी20 विश्व कप एडिशन में दो से ज्यादा शतक नहीं लगे थे। लेकिन 2026 में महज तीन दिनों में तीन शतक दर्ज हो चुके हैं।

टी20 विश्व कप में शतकों का इतिहास

वर्षकुल शतकप्रमुख खिलाड़ी
20071क्रिस गेल
20090
20102सुरेश रैना, महेला जयवर्धने
20121ब्रेंडन मैकुलम
20142एलेक्स हेल्स, अहमद शहजाद
20162तमीम इकबाल, क्रिस गेल
20211जोस बटलर
20222रिली रोसौव, ग्लेन फिलिप्स
2026*3निसानका, सामरा, फरहान

(*अब तक)

यह आंकड़ा साफ बताता है कि 2026 का संस्करण बल्लेबाजों के लिए कितना अनुकूल रहा है। पिचें बेहतर हैं, बल्ले की तकनीक विकसित हो चुकी है, और टी20 का आक्रामक टेम्पलेट अब वैश्विक हो चुका है।

खास क्यों हैं ये तीन शतक?

यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है। हर शतक की अपनी कहानी है।

पाथुम निसानका—ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक।
युवराज सामरा—विश्व कप में शतक जड़ने वाले सबसे युवा बल्लेबाज।
साहिबजादा फरहान—अहमद शहजाद के बाद टी20 विश्व कप में शतक लगाने वाले दूसरे पाकिस्तानी।

क्या पिचें ज्यादा सपाट हैं?

यह सवाल उठना लाजिमी है।

2026 संस्करण में रन-रेट औसतन पिछले एडिशनों से अधिक रहा है। पावरप्ले में आक्रामकता बढ़ी है, और डेथ ओवरों में 10-12 रन प्रति ओवर अब सामान्य हो चुका है। आईसीसी के प्लेइंग कंडीशंस और टूर्नामेंट विवरण पर उपलब्ध हैं, जहां पिच और बॉलिंग नियमों की जानकारी दी गई है।

दो नई गेंदों का इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन बल्लेबाजों की तैयारी और फिटनेस पहले से कहीं बेहतर है। फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट का अनुभव भी अंतर पैदा कर रहा है।

2009: एकमात्र बिना शतक वाला विश्व कप

दिलचस्प बात यह है कि 2009 का टी20 विश्व कप एकमात्र ऐसा संस्करण था, जिसमें कोई भी शतक नहीं लगा। इंग्लैंड में खेले गए उस टूर्नामेंट में पाकिस्तान ने श्रीलंका को हराकर खिताब जीता था।

उस समय टी20 अभी विकसित हो रहा था। बल्लेबाज जोखिम कम लेते थे। आज हालात उलट हैं—पहली गेंद से आक्रमण।

क्या शतकों का सिलसिला जारी रहेगा?

टूर्नामेंट अभी अपने मध्य चरण में है। नॉकआउट मुकाबले बाकी हैं। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो 2026 सिर्फ “सबसे ज्यादा शतक वाला” नहीं, बल्कि “सबसे आक्रामक” टी20 विश्व कप भी कहलाएगा।

बल्लेबाजों का आत्मविश्वास चरम पर है। गेंदबाजों के लिए चुनौती दोगुनी हो गई है।

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