T20I – टेस्ट हो, वनडे हो या टी20…
जब भी भारत को रनचेज में फंसते देखा गया है, दिमाग अपने आप एक ही नाम की तरफ जाता है—विराट कोहली।
सालों तक कोहली ने यह धारणा बना दी कि लक्ष्य का पीछा करना एक कला है, और उस कला के वह बादशाह हैं। तभी तो उन्हें ‘चेज मास्टर’ कहा गया।
लेकिन वक्त बदल रहा है।
और आंकड़े अब एक नई कहानी सुना रहे हैं।
टी20 रनचेज में विराट से आगे निकल गए दो भारतीय
टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए अब दो भारतीय बल्लेबाज़ ऐसे हैं, जिनका औसत विराट कोहली से बेहतर हो चुका है।
ये नाम हैं—
शिवम दुबे और तिलक वर्मा।
न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 में शिवम दुबे की 65 रन की विस्फोटक पारी सिर्फ एक मैच-जिताऊ कोशिश नहीं थी, बल्कि उसने एक बड़े स्टैट को भी हिला दिया।
चेज करते हुए T20I औसत: बदलती तस्वीर
अब अगर सिर्फ आंकड़ों की बात करें, तो तस्वीर चौंकाने वाली है।
| बल्लेबाज़ | औसत | स्ट्राइक रेट |
|---|---|---|
| शिवम दुबे | 82.5 | 167 |
| तिलक वर्मा | 68.0 | 134 |
| विराट कोहली | 67.1 | 136 |
| दिनेश कार्तिक | 55.2 | 155 |
| माइक हसी | 52.6 | 135 |
| एमएस धोनी | 47.7 | 128 |
| मनीष पांडे | 47.6 | 119 |
कम से कम 10 T20I पारियां चेज करते हुए खेलने वाले बल्लेबाज़ों की इस लिस्ट में
टॉप-5 में से 4 भारतीय हैं।
और सबसे ऊपर—
शिवम दुबे।
शिवम दुबे: रोल समझा, गेम बदल दिया
शिवम दुबे की खास बात यह है कि वह खुद को विराट कोहली से कंपेयर करने की कोशिश नहीं करते।
उनका रोल अलग है।
- मिडिल ओवर्स में आकर स्पिन पर हमला
- दबाव में स्ट्राइक रोटेट करने के बजाय मैच को पलटने की कोशिश
- और जरूरत पड़े तो 10 गेंदों में 30 रन
न्यूजीलैंड के खिलाफ 85/5 की हालत में दुबे की पारी यही बताती है कि
टी20 में चेज अब सिर्फ टिके रहने का खेल नहीं रहा।
तिलक वर्मा चोटिल हैं, लेकिन चर्चा में
तिलक वर्मा फिलहाल चोट की वजह से टीम से बाहर हैं,
लेकिन उनका नाम इस लिस्ट में होना अपने आप में बड़ी बात है।
68 का औसत यह दिखाता है कि तिलक सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि टेम्परामेंट भी लेकर आए हैं।
उनकी बैटिंग विराट के क्लासिक स्टाइल और दुबे के पावर-गेम के बीच का पुल है।
विराट कोहली औसत गिरा, भरोसा नहीं
अब सबसे जरूरी बात।
क्या इसका मतलब यह है कि विराट कोहली अब चेज मास्टर नहीं रहे?
बिल्कुल नहीं।
विराट का औसत भले ही 67.1 हो,
लेकिन उनके चेज मैचों की क्वालिटी आज भी बेजोड़ है।
- बड़े टूर्नामेंट
- हाई-प्रेशर गेम
- नॉकआउट मुकाबले
यहीं विराट अलग दिखते हैं।
धोनी, कार्तिक और हसी: पुराने उस्ताद
इस लिस्ट में
एमएस धोनी,
दिनेश कार्तिक
और माइक हसी जैसे नाम होना यह याद दिलाता है कि चेजिंग सिर्फ स्ट्राइक रेट नहीं, दिमाग का खेल भी है।
धोनी का औसत भले 47.7 हो,
लेकिन कितनी ही बार उन्होंने आखिरी ओवर तक मैच को जिंदा रखा—यह आंकड़ों में नहीं आता।















